इथेनॉल गैस स्टोव: पानी से चलने वाला चूल्हा, जानों कैसे करता है काम

Manya Jain | May 29, 2026, 16:25 IST
Ethanol Gas Stove
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में पानी और इथेनॉल से चलने वाला नया स्टोव लॉन्च किया है। यह स्वदेशी चूल्हा घरेलू और कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर का एक बेहद सस्ता और प्रदूषण मुक्त विकल्प बनकर सामने आया है।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में पानी और एथेनॉल वाला स्टोव लॉन्च किया।
  • यह नया चूल्हा पूरी तरह पानी और एथेनॉल के मिश्रण से काम करता है।
  • ईंधन के इस खास मिश्रण में करीब 7 प्रतिशत पानी मिलाया जाता है।
  • दावा है कि यह तकनीक सामान्य एलपीजी गैस सिलेंडर से काफी सस्ती पड़ेगी।
  • यह चूल्हा पर्यावरण के अनुकूल है और इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।

गैस की बढ़ती कीमतों के बीच नई तकनीक

भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। कई जगहों पर समय से गैस सप्लाई न होने की दिक्कतें भी आती हैं। इसी बीच सोशल मीडिया और खबरों में एक नई तकनीक चर्चा में है।



केद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में एक कार्यक्रम में लॉन्च किया है। उन्होंने एथेनॉलऔर पानी से चलने वाले नए स्टोव का प्रदर्शन किया। यह चूल्हा रसोई गैस का एक बड़ा और बेहतर विकल्प बन सकता है।



क्या है पानी और एथेनॉल कुकिंग स्टोव?

यह चूल्हा एक आधुनिक और पूरी तरह स्वदेशी कुकिंग सिस्टम है। इसमें खाना पकाने के लिए मुख्य रूप से एथेनॉल ईंधन का उपयोग होता है। एथेनॉल एक खास तरह का अल्कोहल आधारित फ्यूल होता है।



इसे मुख्य रूप से गन्ने के रस और मक्के से तैयार किया जाता है। कृषि उत्पादों से बनने के कारण यह पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता है। यह तकनीक पूरी तरह भारत में ही विकसित की गई है।



पानी और इथेनॉल मिलकर कैसे जलाते हैं चूल्हा?

इस तकनीक की सबसे अनोखी बात इसका खास ईंधन (ethanol fuel) मिश्रण है। इसमें शुद्ध एथेनॉल के साथ लगभग 7 प्रतिशत सामान्य पानी मिलाया जाता है। इसके बाद यह तरल मिश्रण चूल्हे के कंटेनर में डाला जाता है।



ethanol gas stove


जब चूल्हे को ऑन करके जलाया जाता है तो क्या होता है? इससे एक बहुत ही साफ और लगातार जलने वाली नीली लौ निकलती है। यह लौ दिखने में बिल्कुल सामान्य गैस चूल्हे जैसी ही होती है।



इस्तेमाल करने का तरीका

इस स्टोव का काम करने का तरीका आम जनता के लिए बहुत आसान है। इसमें एक छोटा फ्यूल टैंक या अलग से कंटेनर दिया गया है। इसी टैंक में आपको पानी और एथेनॉल का मिश्रण डालना होगा।



जैसे ही आप स्टोव को ऑन करेंगे तुरंत नीली फ्लेम पैदा हो जाएगी। इसके बाद आप इस पर आसानी से अपना खाना पका सकते हैं। इस तकनीक से रसोई में पारंपरिक भारी गैस सिलेंडरों की जरूरत खत्म हो जाएगी।



कमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर के मुकाबले भारी बचत

नितिन गडकरी ने नागपुर के कार्यक्रम में कहा कि यह स्टोव कमर्शियल गैस के मुकाबले बहुत सस्ता पड़ेगा। इससे आम परिवारों के रसोई का मासिक खर्च काफी कम हो जाएगा।



होटल चलाने वाले कारोबारियों को भी इस तकनीक से बड़ा आर्थिक फायदा होगा। विदेशों से आने वाली महंगी एलपीजी गैस पर भारत की निर्भरता कम होगी। इससे देश का पैसा बचेगा और हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।



धुएं और प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति

लकड़ी, कोयला या मिट्टी के तेल की तुलना में यह ईंधन बहुत साफ है। इसके जलने से घर के अंदर की हवा बिल्कुल खराब नहीं होती है। इससे हानिकारक कार्बन या धुआं नहीं के बराबर निकलता है।



इसके इस्तेमाल से बर्तनों पर कालिख भी नहीं जमती है। खाना जल्दी पकने से समय और ईंधन दोनों की बड़ी बचत होती है। यह घरेलू महिलाओं के स्वास्थ्य के लिहाज से भी बहुत उत्तम है।



देश के अन्नदाता किसानों की आय बढ़ाने में मिलेगी मदद

यह तकनीक सीधे तौर पर हमारे देश के किसानों से जुड़ी हुई है। एथेनॉल का उत्पादन पूरी तरह गन्ने, मक्के और कृषि अवशेषों से होता है। बाजार में इस चूल्हे की मांग बढ़ने से कच्चे माल की जरूरत बढ़ेगी।



इससे किसानों की फसलों की खपत गांव स्तर पर ही ज्यादा होने लगेगी। फैक्ट्रियां सीधे किसानों से गन्ने और मक्के की खरीद करेंगी। इससे किसानों को सही दाम मिलेगा और उनकी कमाई में इजाफा होगा।



आम लोगों के लिए कब उपलब्ध होगा ?

इस समय देश के उपभोक्ताओं के मन में यही सवाल है कि इसे कब खरीद पाएंगे? आपको बता दें कि अभी बड़े पैमाने पर इसकी व्यावसायिक बिक्री शुरू नहीं हुई है। अभी केवल इसका सफल प्रदर्शन किया गया है।



आम लोगों के लिए बाजार में उतारने से पहले इसके सुरक्षा परीक्षण किए जाएंगे। सरकार के विभिन्न विभागों से जरूरी मंजूरी मिलने के बाद यह दुकानों पर मिलेगा। बहुत जल्द इसकी कीमत और लॉन्चिंग डेट सामने आएगी।



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