धर्म बदलने से नहीं मिलेगा ओबीसी आरक्षण का लाभ, रिजर्वेशन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Amresh Kushwaha | Oct 15, 2026, 12:40 IST
हिंदू से मुस्लिम बनने पर क्या मिलेगा आरक्षण?
सुप्रीम कोर्ट ने धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। इस फैसले के मुताबिक, हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने से किसी व्यक्ति को अपने आप पिछड़ा वर्ग मुस्लिम का दर्जा नहीं मिलेगा। केवल धर्म बदलने के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
Supreme Court upheld Madras High Court ruling concerning religious conversion OBC reservation. According court, merely converting Islam automatically grant status Backward Class Muslim.

यह मामला तमिलनाडु सरकार के एक आदेश से जुड़ा है। सरकार ने वर्ष 2024 में धर्म परिवर्तन करने वाले कुछ लोगों को आरक्षण देने का प्रावधान किया था। मद्रास हाई कोर्ट ने इस आदेश को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।



क्या है पूरा मामला?

यह मामला तमिलनाडु के एक व्यक्ति से जुड़ा है। उसका जन्म हिंदू परिवार में हुआ था। उसने वर्ष 2016 में इस्लामी रीति-रिवाजों से एक महिला से निकाह किया था। इसके बाद उसने इस्लाम धर्म अपना लिया और अपना नाम समीर अहमद रख लिया।



याचिकाकर्ता के मुताबिक, कायाथार की सुन्नत जमात ने वर्ष 2015 में उसे एक प्रमाण पत्र दिया था। इसमें उसके इस्लाम धर्म अपनाने की जानकारी थी।



धर्म परिवर्तन के बाद उसने खुद को मुस्लिम लेब्बई समुदाय का सदस्य बताया था। इसके आधार पर उसने जाति प्रमाण पत्र (Community Certificate) के लिए आवेदन किया था। कायाथार के तहसीलदार ने उसका आवेदन खारिज कर दिया था। इसके बाद मामला मद्रास हाई कोर्ट पहुंच गया था।



मद्रास हाई कोर्ट ने क्या कहा?

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने मामले की सुनवाई की थी। अदालत ने साफ कहा कि केवल इस्लाम अपनाने से कोई व्यक्ति पिछड़ा वर्ग मुस्लिम नहीं बन सकता।



हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के वर्ष 2024 के आदेश को भी रद्द कर दिया था। इस आदेश के जरिए कुछ समुदायों से इस्लाम अपनाने वालों को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम में शामिल करने की व्यवस्था की गई थी।



अदालत ने इस व्यवस्था को असंवैधानिक माना था। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इसी फैसले को बरकरार रखा है।



तमिलनाडु सरकार के आदेश में क्या था?

तमिलनाडु सरकार ने वर्ष 2024 में आरक्षण (Reservation) से जुड़ा एक आदेश जारी किया था। इसके तहत कुछ वर्गों के लोगों को धर्म परिवर्तन के बाद भी आरक्षण देने की व्यवस्था थी।



इसमें पिछड़ा वर्ग (BC), अति पिछड़ा वर्ग (MBC), विमुक्त समुदाय (DNC) और अनुसूचित जाति (SC) के लोग शामिल थे।



आदेश के अनुसार, इन वर्गों का कोई व्यक्ति इस्लाम अपनाता है तो उसे पिछड़ा वर्ग मुस्लिम माना जा सकता था। ऐसे लोगों को मुस्लिम समुदाय की सात अधिसूचित श्रेणियों में से किसी एक का प्रमाण पत्र देने का प्रावधान था।



सरकार ने कोर्ट में क्या दलील दी?

तमिलनाडु सरकार ने अदालत में अपने आदेश का बचाव किया था। सरकार का कहना था कि धर्म बदलने से किसी व्यक्ति का आरक्षण लाभ समाप्त नहीं होना चाहिए।



सरकार ने स्पष्ट किया था कि यह सुविधा सभी लोगों के लिए नहीं थी। अगड़ी जाति का कोई व्यक्ति इस्लाम अपनाकर पिछड़ा वर्ग मुस्लिम का दर्जा नहीं पा सकता था।



सरकार का तर्क था कि जो लोग धर्म परिवर्तन से पहले आरक्षण का लाभ ले रहे थे, उनका अधिकार बना रहना चाहिए।



सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या मतलब है?

इस फैसले से साफ है कि केवल धर्म परिवर्तन करना आरक्षण पाने का आधार नहीं बन सकता है। हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने वाले व्यक्ति को अपने आप पिछड़ा वर्ग मुस्लिम का दर्जा नहीं मिलेगा।



यह मामला तमिलनाडु के वर्ष 2024 के सरकारी आदेश और पिछड़ा वर्ग मुस्लिम के प्रमाण पत्र से जुड़ा है। इसलिए इसे धर्म परिवर्तन करने वाले हर व्यक्ति के लिए सभी तरह के आरक्षण पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं माना जाना चाहिए।

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