भारत में Opendoor की छंटनी, AI ने लिया 250 लोगों का काम
समझें क्या है पूरा मामला
- रियल एस्टेट टेक कंपनी Opendoor ने भारत में अपने सभी ऑफिस बंद कर दिए हैं।
- चेन्नई और बेंगलुरु दफ्तरों से करीब 250 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला।
- सीईओ काज नेजातियन के अनुसार, भारतीय टीमों का काम अब AI ने संभाल लिया है।
- कंपनी ने साफ किया कि यह छंटनी एआई के कारण हुई, इसमें स्टाफ की गलती नहीं।
- भारत में दफ्तर बंद करने और छंटनी की खबर आते ही कंपनी का शेयर 8% उछल गया।
भारत में Opendoor कब और क्यों आया था
Opendoor ने 2024 में चेन्नई और बेंगलुरु में दफ्तर खोले थे। उस वक्त कंपनी के पास बहुत सारे अलग-अलग सिस्टम थे। इन्हें चलाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत थी जो हाथ से डेटा एंट्री और बैक-ऑफिस का काम करें। भारत इस तरह के काम के लिए हमेशा से दुनिया की पसंदीदा जगह रही है।
कंपनी ने करीब 250 लोगों की एक मजबूत टीम बनाई। ये लोग अमेरिकी ग्राहकों से जुड़े कामकाज को भारत से संभालते थे। उस वक्त यह फैसला बिल्कुल सही लगता था।
दो साल में बदल गई पूरी तस्वीर
Opendoor ने अपने सभी अलग-अलग सिस्टम को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ लिया। साथ ही कंपनी ने अमेरिका में छोटी-छोटी एआई नेटिव टीमें बना लीं। इन टीमों ने वह सारा काम अपने हाथ में ले लिया जो पहले भारत से होता था।
नेजातियन ने X पर लिखा, हमारे ग्राहक अमेरिका में हैं और इसीलिए हमारा ऑपरेशनल काम भी वहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों में इनमें से कई भूमिकाएं धीरे-धीरे अमेरिका में शिफ्ट होती रही हैं और अब यह प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
कर्मचारियों को क्या मिलेगा
कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह छंटनी काम में कमी की वजह से नहीं है। सभी हटाए जा रहे कर्मचारियों को सेवरेंस पैकेज और नई नौकरी ढूंढने में मदद दी जाएगी। कुछ भारतीय कर्मचारी थोड़े समय के लिए काम करते रहेंगे ताकि जरूरी प्रोजेक्ट अमेरिकी टीम को सौंपे जा सकें।
नेजातियन ने यह भी कहा, हमारे भारत के साथी बेहतरीन लोग हैं। जो भी कंपनी अभी नई भर्ती कर रही हो, वह इन्हें जरूर लेने पर विचार करे।
Opendoor 2.0 क्या है
काज नेजातियन सितंबर 2025 में Opendoor के CEO बने थे। वे इससे पहले Shopify में मुख्य परिचालन अधिकारी (Chief Operating Officer) थे। उन्हें खासतौर पर AI की मदद से कंपनी को नए सिरे से खड़ा करने के लिए लाया गया था।
उन्होंने इस पूरी योजना को Opendoor 2.0 नाम दिया है। इसके तहत खर्च कम करना, बाहर से करवाए जाने वाले काम को अपने हाथ में लेना और AI का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना शामिल है। उनके आने के बाद कंपनी के सह-संस्थापक Keith Rabois और Eric Wu भी बोर्ड में वापस आए।
शेयर क्यों चढ़ा
भारत में दफ्तर बंद करने का जिस दिन ऐलान हुआ, उस दिन Opendoor का शेयर करीब 8 फीसदी बढ़ गया। इसकी वजह यह है कि निवेशक इस कदम को कंपनी की बेहतर होती माली हालत का संकेत मान रहे हैं। कम खर्च, कम कर्मचारी और AI से बढ़ती दक्षता, इन सब चीजों को बाजार ने सकारात्मक रूप से लिया है।
कंपनी के आंकड़े भी बताते हैं कि यह बदलाव पहले से चल रहा था। पिछले साल के अंत में कंपनी के पास दुनियाभर में 1,042 कर्मचारी थे जो एक साल पहले 1,470 थे। भारत सहित विदेश में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या 342 से घटकर 184 रह गई थी।
भारत के लिए बड़ा संकेत
Opendoor कोई बहुत बड़ी कंपनी नहीं है और 250 नौकरियां भारत के लिहाज से बड़ा आंकड़ा नहीं है। लेकिन इस घटना का असर इसके आकार से कहीं ज्यादा है।
भारत अभी दुनिया का सबसे बड़ा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) बाजार है। यहां 2,100 से ज्यादा ऐसे सेंटर हैं जिनमें करीब 23.6 लाख लोग काम करते हैं। इनमें से बड़ा हिस्सा वही बैक-ऑफिस और ऑपरेशनल काम करता है जो AI अब खुद संभाल सकता है।
Opendoor का यह कदम सिलिकॉन वैली में एक बड़ी बहस का कारण बन गया है। आगे ऐसी और कंपनियां भी यही कर सकती हैं।
FAQ
- Opendoor ने भारत में अपना दफ्तर क्यों बंद किया?
Opendoor ने AI तकनीक और एकीकृत सिस्टम की वजह से भारत में दफ्तर बंद किए। कंपनी ने अमेरिका में छोटी AI नेटिव टीमें बना लीं जो पहले भारत की 250 लोगों की टीम करती थी। CEO ने कहा कि ग्राहक अमेरिका में हैं इसलिए ऑपरेशनल काम भी वहीं होना चाहिए। - Opendoor कंपनी क्या करती है और इसके CEO कौन हैं?
Opendoor Technologies सैन फ्रांसिस्को (San Francisco) की एक रियल एस्टेट टेक कंपनी है जो घरों की खरीद-बिक्री आसान बनाती है। इसके CEO काज़ नेजातियन हैं जो सितंबर 2025 में Shopify से आए थे और कंपनी को AI केंद्रित रूप देने के लिए जिम्मेदार हैं। - क्या AI की वजह से भारत में IT नौकरियों पर खतरा बढ़ रहा है?
हां, Opendoor का यह कदम एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। भारत में 2,100 से ज्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हैं जिनमें 23.6 लाख लोग काम करते हैं। इनमें से बड़ा हिस्सा बैक-ऑफिस और मैन्युअल वर्कफ्लो पर निर्भर है, जिसे AI तेजी से अपनी जगह ले रहा है।
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