पद्मश्री न्यूरोसर्जन डॉ. अशोक महापात्रा का निधन, 870 शोध पत्र और 16 किताबें लिखीं

Arohi Raj | Sootr Creatives | Nov 04, 2026, 15:24 IST
AIIMS भुवनेश्वर के पहले निदेशक डॉ. अशोक महापात्रा का निधन हो गया है।
The medical world has lost a great doctor. Padma Shri-awarded neurosurgeon Dr. Ashok Kumar Mahapatra has passed away. He breathed his last at the age of 74.
चिकित्सा जगत ने एक महान डॉक्टर को खो दिया है। पद्मश्री सम्मानित न्यूरोसर्जन डॉ. अशोक कुमार महापात्रा का निधन हो गया है। उन्होंने 74 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। वह दिल्ली के AIIMS में इलाज करा रहे थे। सोमवार रात यानी 2 नवंबर को उनका निधन हो गया। महापात्रा ने अपना पूरा जीवन चिकित्सा क्षेत्र को समर्पित किया। उन्होंने हजारों मरीजों की जिंदगी बचाने में मदद की।

अपने करियर में 870 से ज्यादा शोध पत्र लिखे। इसके अलावा उन्होंने 16 किताबें भी प्रकाशित की हैं। खास बात यह है कि उन्होंने न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया। जिस बीमारी और चिकित्सा क्षेत्र पर उन्होंने जीवनभर काम किया, उसी से जुड़ी बीमारी का इलाज कराते समय उनका निधन हुआ। उनके जाने से चिकित्सा जगत में शोक है।



870 से ज्यादा शोध पत्र और 16 किताबें लिखीं

खबरों के मुताबिक, डॉ. अशोक कुमार महापात्रा ने चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अपने करियर में 870 से अधिक रिसर्च पेपर लिख चुके हैं। उनकी 16 किताबें भी प्रकाशित हुई हैं। वह न्यूरोसर्जरी के जाने-माने विशेषज्ञ थे। उन्होंने इलाज के साथ शोध पर भी लगातार काम किया। उनके शोध और अनुभव से चिकित्सा के क्षेत्र को मदद मिली। उन्होंने कई युवा डॉक्टरों को भी मार्गदर्शन दिया है।



उनके काम को देखते हुए साल 2024 में पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। यह देश के प्रमुख नागरिक सम्मानों में शामिल है। इस सम्मान से चिकित्सा क्षेत्र में उनके योगदान को पहचान मिली। डॉ. महापात्रा सिर्फ मरीजों का इलाज नहीं करते थे। वह नई पीढ़ी के डॉक्टरों को भी तैयार करते थे। उनके अनुभव से कई डॉक्टरों को सीखने का मौका मिला।



दो बच्चे की सर्जरी से मिली देशभर में पहचान

डॉ. महापात्रा का नाम साल 2017 में देशभर में चर्चा में आया। उन्होंने दिल्ली AIIMS में एक बेहद मुश्किल सर्जरी का नेतृत्व किया था। यह सर्जरी सिर से जुड़े जुड़वां बच्चों के लिए की गई थी। इन बच्चों के नाम जगा और कालिया थे। दोनों को अलग करने के लिए डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन किया। यह सर्जरी करीब 16 घंटे तक चली थी। इस ऑपरेशन पर पूरे देश की नजर थी।



इसे भारत में अपनी तरह की पहली सर्जरी बताया गया था। इस जटिल ऑपरेशन ने डॉ. महापात्रा को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। ओडिशा में भी उनका नाम घर-घर तक पहुंचा। इस उपलब्धि से उनकी विशेषज्ञता की चर्चा देशभर में हुई।



AIIMS भुवनेश्वर की स्थापना में निभाई अहम भूमिका

खबरों के मुताबिक, डॉ. अशोक महापात्रा का ओडिशा से भी गहरा जुड़ाव था। उन्होंने भुवनेश्वर में AIIMS की स्थापना में अहम भूमिका निभाई है। बाद में वह इस संस्थान के पहले निदेशक बने। इस जिम्मेदारी के दौरान उन्होंने संस्थान के विकास में योगदान दिया। उनके नेतृत्व में संस्थान ने अपनी पहचान बनाई। सेवानिवृत्ति के बाद भी वह चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े रहे।



इसके बाद वह इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड SUM हॉस्पिटल से जुड़े। साल 2020 में उन्होंने SOA विश्वविद्यालय के कुलपति की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने दो साल तक इस पद पर काम किया। इस तरह उन्होंने इलाज और शोध के अलावा शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया। उन्होंने कई संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।



FAQs



  1. डॉ. अशोक कुमार महापात्रा कौन थे?
    डॉ. अशोक कुमार महापात्रा देश के एक प्रख्यात न्यूरोसर्जन थे, जिन्हें चिकित्सा विज्ञान में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए साल 2024 में पद्मश्री सम्मान मिला था।
  2. डॉ. अशोक महापात्रा का निधन कैसे हुआ और उनकी उम्र क्या थी?
    डॉ. अशोक महापात्रा का निधन 74 वर्ष की उम्र में हुआ, और उन्होंने दिल्ली स्थित AIIMS में अंतिम सांस ली।
  3. डॉ. महापात्रा ने चिकित्सा क्षेत्र में कौन-कौन से योगदान दिए?
    डॉ. महापात्रा ने 870 से अधिक शोध पत्र लिखे और 16 किताबें प्रकाशित कीं। इसके अलावा, उन्होंने सिर से जुड़े जुड़वां बच्चों की जटिल सर्जरी सहित हजारों मरीजों का इलाज किया।
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