पाकिस्तान में हिंदू आस्था पर बड़ा हमला, कराची में कृष्ण और गोपियों की मूर्तियां तोड़ी
News in Short
- कराची में 'सगन मैसन' इमारत पर हिंदू धर्म के प्रतीकों पर हमला किया गया।
- पाकिस्तान सरकार की चुप्पी ने हिंदू समुदाय में आक्रोश बढ़ाया।
- शिव काछी ने इस हमले की कड़ी निंदा की और कार्रवाई की मांग की।
- पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों और धार्मिक प्रतीकों पर हमले बढ़ रहे हैं।
- पाकिस्तान पुलिस और अदालतें इन हमलों पर निष्क्रिय हैं, जिससे न्याय में दिक्कत हो रही है।
News in Detail
पाकिस्तान में एक बार फिर हिंदू धर्म के प्रतीकों पर हमला हुआ है। कराची में एक ऐतिहासिक इमारत की दीवारों पर भगवान कृष्ण और गोपियों की मूर्तियां तोड़ी गईं। यह इमारत M.A. जिन्ना रोड पर स्थित 'सगन मैसन' है। यह इमारत 1937 में बनी थी और इसमें हिंदू धार्मिक प्रतीकों की समृद्ध उपस्थिति थी।
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पाकिस्तान सरकार की चुप्पी
इस हमले के बाद पाकिस्तान सरकार की चुप्पी ने हिंदू समुदाय में आक्रोश बढ़ा दिया है। बहावलपुर जिले के अल्पसंख्यक अधिकार संगठन के चेयरमैन, शिव काछी ने घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। काछी ने कहा कि यह हमला सिर्फ एक इमारत का नुकसान नहीं, बल्कि पाकिस्तान की बहुसांस्कृतिक विरासत और धार्मिक सद्भाव पर हमला है।
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हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार
पाकिस्तान में हिंदू समुदाय के खिलाफ हमले कोई नई बात नहीं है। हर साल कई हिंदू लड़कियों को अगवा किया जाता है, जिनका फिर जबरन निकाह कर दिया जाता है। इसके अलावा, पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में हिंदू मंदिरों और धार्मिक प्रतीकों पर हमले किए जाते रहे हैं। कराची में हुई यह घटना उसी श्रृंखला की एक कड़ी है, जिसमें हिंदू धर्म के प्रतीकों को तोड़ने की कोशिश की जाती है।
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पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों पर हुए हमले
पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों पर हमले की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। 2021 में रहीम यार खान जिले के भोंग में गणेश मंदिर पर हमला किया गया था। दिसंबर 2020 में खैबर पख्तूनख्वा में श्री परमहंस जी महाराज समाधि और कृष्ण द्वार मंदिर को तोड़ा गया। जुलाई 2023 में सिंध के काशमोर में एक हिंदू मंदिर पर रॉकेट लॉन्चर से हमला किया गया। ये सभी घटनाएं पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय पर हो रहे हमलों का हिस्सा हैं।
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अदालतों की निष्क्रियता
पाकिस्तान में इन घटनाओं के बावजूद पुलिस और अदालतें निष्क्रिय हैं। इससे अल्पसंख्यक समुदाय को न्याय दिलवाना मुश्किल हो गया है। हिंदू समुदाय को बराबरी का नागरिक दर्जा नहीं मिला। उनके धार्मिक स्थानों पर हमले जारी हैं। पुलिस और अदालतें इन मामलों पर ध्यान नहीं देतीं। इसके कारण इन घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहती है।