घर-घर पहुंचा पीएनजी पाइपलाइन कनेक्शन, फिर भी क्यों बंद पड़े हैं 59 लाख चूल्हे? जानें सरकार का नया प्लान
समझें क्या है पूरा मामला
- केंद्र सरकार घरों की रसोई तक पीएनजी पहुंचाने पर जोर दे रही है।
- देश में 1.75 करोड़ कनेक्शन हैं पर 59 लाख घरों को लाभ नहीं मिला।
- रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40% कनेक्शन चालू नहीं हो पा रहे हैं।
- राजस्थान में 72% और मध्यप्रदेश में 35% कनेक्शन चालू नहीं हैं।
- इस बड़ी समस्या को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल पीएनजी ड्राइव शुरू की है।
पीएनजी कनेक्शन चालू क्यों नहीं हो रहे
रिपोर्ट में चार वजहें गिनाई गई हैं। पहली, हर क्षेत्र की व्यावहारिकता अलग-अलग हो सकती है। दूसरी, रेजिडेंशियल एरिया में कंपनियों की रुचि सीमित है। तीसरी वजह राज्यों का टैक्स है।
इसे वैट (राज्य में बिक्री पर लगने वाला कर) कहते हैं। चौथी वजह निर्बाध आपूर्ति (Uninterrupted supply) का न होना है। इन चारों वजहों से घरेलू पीएनजी कनेक्शन चालू नहीं हो पा रहे।
पीएनजी पर वैट कितना लगता है
पीएनजी पर वैट की दर हर राज्य में अलग है। उत्तर प्रदेश में यह शून्य है। वहां 69.1% कनेक्शन सक्रिय हैं। महाराष्ट्र में वैट 3% है। गुजरात, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में 5% वैट लगता है। राजस्थान में वैट 7.5% और मध्यप्रदेश में 14% है। रिपोर्ट के मुताबिक इसका असर कनेक्शनों पर पड़ता है।
राजस्थान में पीएनजी की हालत कैसी
राजस्थान में पीएनजी के कुल घरेलू कनेक्शन 5.59 लाख हैं। इनमें बिल वाले कनेक्शन सिर्फ 1.58 लाख हैं। सक्रिय कनेक्शन 28.3% ही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में दिखावे के कनेक्शनों की संख्या 72% है। यानी हर 100 में से करीब 72 कनेक्शन चालू नहीं हैं।
मध्यप्रदेश में पीएनजी का हाल
मध्यप्रदेश में पीएनजी के कुल घरेलू कनेक्शन 3.41 लाख हैं। बिल वाले कनेक्शन 2.24 लाख हैं। सक्रिय कनेक्शन 65.5% हैं। यानी मध्यप्रदेश में 35% कनेक्शन चालू नहीं हैं। मध्यप्रदेश की स्थिति राजस्थान से बेहतर है। लेकिन गुजरात के 92.4% से यह काफी पीछे है।
दूसरे राज्यों की तस्वीर कैसी है
अब जरा दूसरे राज्यों को देखते हैं। एक्टिव कनेक्शन का मतलब कुल कनेक्शन में बिल वाले कनेक्शन का हिस्सा है। टेबल से समझें:
| राज्य | कुल घरेलू कनेक्शन | एक्टिव कनेक्शन (बिल वाले) | सक्रियता (%) |
| गुजरात | 39.81 लाख | 36.78 लाख | 92.4% |
| दिल्ली | 19.94 लाख | 14.74 लाख | 73.9% |
| उत्तर प्रदेश | 23.66 लाख | 16.36 लाख | 69.1% |
| मध्य प्रदेश | 3.41 लाख | 2.24 लाख | 65.5% |
| महाराष्ट्र | 47.73 लाख | 28.14 लाख | 58.9% |
| कर्नाटक | 6.27 लाख | 3.60 लाख | 57.4% |
| राजस्थान | 5.59 लाख | 1.58 लाख | 28.3% |
| छत्तीसगढ़ | 22 हजार | 700 | 3.1% |
एवरेज कंस्यूमर की परेशानियां क्या है
कनेक्शन के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना पड़ता है। पाइपलाइन बिछने के बाद भी महीनों तक मीटर चालू नहीं होता। सोसाइटी और कॉलोनियों में एनओसी मिलने में देरी होती है।
सड़क खुदाई की परमिशन न मिलने से काम रुक जाता है। गैस लीक होने की डर से भी कई लोग बचते हैं। कस्टमर केयर से सही समय पर मदद नहीं मिल पाती है। बिल में गड़बड़ी होने पर सुधार कराना बहुत मुश्किल होता है।
लोकल वेंडर्स काम आधा छोड़कर गायब हो जाते हैं। सिलेंडर सरेंडर करने के बाद भी पीएनजी शुरू नहीं होती। इन वजहों से लोग पीएनजी लेने में हिचकिचा रहे हैं। इन समस्याओं को हल करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
सिंगल विंडो क्लियरेंस से काम में तेजी आ सकती है। स्थानीय निकायों को भी सहयोग बढ़ाना होगा। तभी हर घर तक सुरक्षित गैस पहुँचाई जा सकेगी।योजना की सफलता जमीनी सुधार पर ही टिकी हुई है।
आगे की राह और सरकारी प्रयास
नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0 से काफी उम्मीदें जुड़ी हैं। सरकार का लक्ष्य सभी 59 लाख बंद कनेक्शन चालू करना है। राज्यों से वैट कम करने की अपील की जा रही है। टैक्स एक समान होने से गैस सस्ती हो सकती है।
कंपनियों के लिए कड़े नियम बनाए जा रहे हैं। समय पर सप्लाई न देने पर पेनल्टी लगाई जाएगी। नए रिहायशी प्रोजेक्ट्स में पीएनजी अनिवार्य की जा रही है। सुरक्षा मानकों की नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं।
कंस्यूमर को जागरूक करने के लिए कैंप लगाए जाएंगे। टोल-फ्री नंबर से शिकायतों का जल्दी निपटारा होगा। अगर यह कदम सही से लागू हुए तो तस्वीर बदलेगी। हर घर को आसानी से रसोई गैस मिल सकेगी।
सिलेंडर की लाइन और बुकिंग का झंझट खत्म होगा। पर्यावरण को भी साफ-सुथरा रखने में मदद मिलेगी। यह योजना देश के विकास के लिए बहुत जरूरी है।
यह खबर क्यों जरूरी है
पाइपलाइन बिछ जाना और रसोई में गैस आना दो अलग बातें हैं। 59 लाख घरों के लिए यह फर्क रोजमर्रा की सुविधा से जुड़ा है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के कंस्यूमर के लिए वैट की ऊंची रेट भी मायने रखती है। नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0 से चालू कनेक्शन बढ़ने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि कंपनियां और राज्य इसमें कितना सहयोग करते हैं।
क्या है नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0
नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0 केंद्र सरकार की एक स्पेशल ड्राइव है। इसका मेन ऑब्जेक्टिव देश के लाखों घरों में लगे बंद पीएनजी (Piped Natural Gas) कनेक्शनों को एक्टिव और चालू करना है।
ये कैंपेन कैसे काम करता है
पीएनजी मेनली मीथेन गैस होती है, जो नैचुरली जमीन के नीचे पाई जाती है। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां इसे प्रोसेसिंग प्लांट से पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए शहरों तक लाती हैं। सड़क के नीचे से बिछी मेन पाइपलाइन से होकर यह गैस आपकी सोसाइटी और घर की दीवारों तक पहुंचती है।
घर के बाहर सुरक्षा के लिए एक कंट्रोल वॉल्व और प्रेशर रेगुलेटर लगाया जाता है, जो गैस के दबाव को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखता है। जब आप अपनी रसोई में चूल्हे का नॉब ऑन करते हैं। तो गैस बिना किसी रुकावट के सीधे पाइप से चूल्हे तक पहुंचती है। इसमें सिलेंडर खत्म होने या बुकिंग कराने का झंझट नहीं होता।
गैस कंपनियां अब केवल नए कनेक्शन लगाने के बजाय बंद पड़े नेटवर्क को शुरू करने पर ध्यान दे रही हैं। टेक्निकल टीम घर-घर पहुंचकर रुके हुए काम, जैसे मीटर इंस्टॉलेशन, पाइपलाइन टेस्टिंग और सेफ्टी चेक को तेजी से पूरा कर रहे हैं। इससे कंस्यूमर एलपीजी सिलेंडर छोड़कर सीधे रसोई गैस की सप्लाई का लाभ ले सकेंगे।