राघव चड्ढा को हटाकर जिस अशोक मित्तल को बनाया नए डिप्टी लीडर वो भी BJP के साथ
समझें क्या है पूरा मामला
AAP ने अप्रैल की शुरुआत में राघव को डिप्टी लीडर पद से हटाया था। उनकी जगह अशोक मित्तल (LPU के संस्थापक) को राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाया गया था। मित्तल ने तब कहा था कि राघव के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में जाने की खबर है। तीन हफ्ते बाद मित्तल खुद राघव के साथ BJP में चले गए। इस पूरे घटनाक्रम ने AAP नेतृत्व को दोहरे झटके में डाल दिया।
दो धोखे, एक ही दिन
शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए एक अजीब और दर्दनाक दिन रहा। पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने विलय का ऐलान किया। यह तो पहले से तय लग रहा था। लेकिन उनके साथ जो नाम था, उसने सबको हैरान कर दिया। वह नाम था डॉ. अशोक कुमार मित्तल का, जिन्हें खुद केजरीवाल ने कुछ हफ्ते पहले राघव की जगह डिप्टी लीडर बनाया था। यानी केजरीवाल ने जिस पर भरोसा जताया, वही भरोसेमंद उन्हें छोड़ गया।
तीन हफ्ते में पलट गई तस्वीर
अप्रैल की शुरुआत में AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा उपनेता (Deputy Leader) के पद से हटाया। यह पार्टी और राघव के बीच बढ़ती दूरी का खुला संकेत था। उस वक्त पार्टी ने अशोक मित्तल को नया डिप्टी लीडर नियुक्त किया। साथ ही राज्यसभा सचिवालय को यह भी लिखा कि राघव चड्ढा को संसद में बोलने का समय न दिया जाए।
उसी दौरान जब मीडिया ने अशोक मित्तल से पूछा कि क्या राघव BJP में जा सकते हैं, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी अफवाह की कोई जानकारी नहीं है।
यह भी कहा कि यह पार्टी की सामान्य सांगठनिक प्रक्रिया है। ठीक तीन हफ्ते बाद वही अशोक मित्तल, राघव चड्ढा के साथ मंच पर खड़े थे और BJP में जाने का ऐलान कर रहे थे।
कौन हैं अशोक मित्तल?
अशोक मित्तल एक उद्योगपति और शिक्षाविद हैं। वे पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हैं। इसके साथ ही वे लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के संस्थापक भी हैं। पंजाब के जालंधर के रहने वाले मित्तल ने गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की। बाद में उन्हें अटल बिहारी वाजपेई यूनिवर्सिटी से मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिली। AAP ने उन्हें 2022 में पंजाब से राज्यसभा भेजा था।
राघव चड्ढा का पार्टी से सफर
राघव चड्ढा ने AAP को अपने 15 साल दिए। 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी की ऐतिहासिक जीत में उनकी भूमिका को बड़ा माना जाता है। उन्हें पंजाब से राज्यसभा भेजा गया और वे पार्टी के युवा और आक्रामक चेहरे के रूप में जाने जाते थे।
लेकिन जब पार्टी के बड़े नेता एक के बाद एक जेल जाते रहे, तब राघव की चुप्पी ने पार्टी नेतृत्व को परेशान किया। आबकारी नीति मामले में राहत मिलने के बाद भी उनकी और केजरीवाल की मुलाकात नहीं हुई। धीरे-धीरे दूरियां इतनी बढ़ गईं कि मामला डिप्टी लीडर पद से हटाने तक जा पहुंचा। और आखिरकार शुक्रवार को वे पार्टी छोड़ BJP में जा मिले।
AAP राज्यसभा में लगभग खाली
राज्यसभा में AAP के 10 सांसद थे। नेता राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप कुमार पाठक, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल के BJP में जाने की खबर है। BJP सूत्रों के अनुसार यह संख्या 8 भी हो सकती है। एक सांसद का हस्ताक्षर अभी बाकी बताया जा रहा है।
अब AAP के पास राज्यसभा में सिर्फ संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और बलवीर सिंह सीचेवाल बचे हैं। दो-तिहाई से अधिक सांसदों के साथ विलय होने के कारण दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) इन पर लागू नहीं होगा। यानी उनकी राज्यसभा सदस्यता सुरक्षित रहेगी।
संदीप पाठक की विदाई भी बड़ा नुकसान
संदीप कुमार पाठक AAP संगठन की रीढ़ माने जाते थे। उनके पास पार्टी से जुड़ा अहम डेटा है। उनके जाने से पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी पर सीधा असर पड़ेगा। जो सांसद AAP छोड़ रहे हैं, उनमें से लगभग सभी पंजाब का प्रतिनिधित्व करते थे। ऐसे में पंजाब में पार्टी की संसदीय और संगठनात्मक ताकत एक झटके में खत्म हो गई।
FAQ
- अशोक मित्तल कौन हैं और AAP में उनकी क्या भूमिका थी?
अशोक मित्तल पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के संस्थापक हैं। उन्हें AAP ने 2022 में पंजाब से राज्यसभा भेजा था। अप्रैल 2026 में जब राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटाया गया, तो मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने खुद कहा था कि राघव के BJP जाने की खबरें सिर्फ अफवाह हैं। लेकिन तीन हफ्ते बाद वे खुद राघव के साथ BJP में चले गए। - क्या डिप्टी लीडर का साथ जाना AAP के लिए ज्यादा बड़ा झटका है?
हां, यह झटका दोगुना है। जब राघव चड्ढा को हटाया गया, तब पार्टी ने अशोक मित्तल को आगे कर यह संदेश देने की कोशिश की कि संगठन मजबूत है। लेकिन उसी मित्तल का राघव के साथ BJP में जाना यह बताता है कि पार्टी के भीतर असंतोष केवल एक नेता तक सीमित नहीं था। इससे AAP के संगठनात्मक दावों पर सवाल उठते हैं। - AAP में यह दरार कब से शुरू हुई?
2022 में पंजाब में सरकार बनने के बाद राघव चड्ढा पर सुपर सीएम की तरह काम करने के आरोप लगे। जब 2024 में केजरीवाल जेल गए, तब राघव की चुप्पी ने पार्टी नेतृत्व को परेशान किया। आबकारी नीति में राहत मिलने के बाद भी केजरीवाल और राघव की मुलाकात नहीं हुई। अप्रैल 2026 में डिप्टी लीडर पद से हटाया जाना इस दरार का आखिरी पड़ाव था। इसके तीन हफ्ते बाद ही पूरी बगावत सामने आ गई।
ये भी पढ़ें...
सांसद तो सासंद, अब दिल्ली में आप के 16 MLA पर भी खतरा
राघव चड्ढा समेत आप के 7 राज्यसभा सांसद ने थामा कमल का दामन, BJP मुख्यालय पहुंचकर ली सदस्यता
राघव चड्ढा समेत आप के 7 राज्यसभा सांसद ने थामा कमल का दामन, BJP मुख्यालय पहुंचकर ली सदस्यता