राहुल के गांधी स्मृति मार्च में 120 से ज्यादा विपक्षी सांसद, पुलिस ने रोकी बसें
समझें क्या है पूरा मामला
- राहुल गांधी के आवास पर 120 से ज्यादा विपक्षी सांसद जुटे।
- सांसद दो बसों से गांधी स्मृति जाने के लिए निकले।
- दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड लगाकर दोनों बसों को रोक दिया।
- अनुमति मिलने के बाद सभी सांसद गांधी स्मृति पहुंचे।
- विपक्ष ने नीट पेपर लीक मामले में छात्रों का समर्थन किया।
नई दिल्ली में गुरुवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने मिला। विपक्षी दल छात्रों के समर्थन में सड़कों पर उतरे। इसका नेतृत्व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने किया। विपक्षी सांसद पहले राहुल गांधी के सरकारी आवास पहुंचे। यहां सुबह से नेताओं का आना शुरू हो गया था। शाम तक 120 से ज्यादा सांसद एकत्र हो गए।
सभी सांसद दो बसों में सवार होकर निकले। उनका उद्देश्य गांधी स्मृति पहुंचकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना था। सांसदों ने हाथों में संविधान की प्रतियां भी रखी थीं। प्रदर्शन राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा से जुड़ा था। इसे नीट (National Eligibility cum Entrance Test) कहा जाता है। विपक्ष ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया।
नेताओं ने पेपर लीक मामलों पर भी सवाल किए। उन्होंने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा मांगा।
राहुल के घर जुटे नेता
राहुल गांधी का आवास सुनहरी बाग रोड पर है। गुरुवार सुबह से यहां नेताओं का जमावड़ा शुरू हुआ। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसद पहुंचे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी बैठक में शामिल हुए। प्रियंका गांधी वाड्रा और जयराम रमेश भी पहुंचे। विपक्षी गठबंधन के कई प्रमुख चेहरे वहां मौजूद रहे।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा भी पहुंचीं। शिवसेना के अरविंद सावंत बैठक में शामिल हुए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले भी मौजूद रहीं। राष्ट्रीय जनता दल की मीसा भारती भी पहुंचीं। समाजवादी पार्टी के रामजी लाल सुमन भी शामिल हुए। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जॉन ब्रिटास भी बैठक में पहुंचे।
राहुल गांधी के आवास पर दो बसें बुलाई गईं। इससे नेताओं की अगली योजना पर उत्सुकता बढ़ गई। खड़गे से बैठक का कारण भी पूछा गया।खड़गे ने सवाल का हल्के अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राहुल ने उन्हें चाय पर बुलाया था। इसलिए वह राहुल के आवास पर आए हैं।
दो बसों से निकले सांसद
कुछ समय बाद विपक्षी सांसद बसों में सवार हुए। दोनों बसें 30 जनवरी मार्ग के लिए निकलीं। गांधी स्मृति इसी मार्ग पर स्थित है। सांसदों के हाथों में अलग-अलग पोस्टर मौजूद थे। इनमें पेपर लीक का मुद्दा उठाया गया था। कुछ पोस्टरों पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग थी। कई सांसदों ने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जलाई। उन्होंने इसके जरिए प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। बसों के भीतर भी नारे लगाए गए।
इस प्रदर्शन में इंडिया गठबंधन के सांसद शामिल हुए। इंडिया का पूरा नाम इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस है। गठबंधन ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण मार्च बताया। सांसद गांधी स्मृति जाकर छात्रों को समर्थन देना चाहते थे। उन्होंने इसे किसी दल का कार्यक्रम नहीं बताया। नेताओं ने छात्र हितों को मुख्य मुद्दा कहा।
पुलिस ने रोका काफिला
दोनों बसें राहुल गांधी के आवास से रवाना हुईं। कुछ दूरी पर दिल्ली पुलिस ने रास्ता रोक दिया। वहां सफेद बस और भारी बैरिकेड लगाए गए।मौके पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई। रैपिड एक्शन फोर्स के जवान भी बुलाए गए। इसे RAF (Rapid Action Force) कहा जाता है।
पुलिस ने निषेधाज्ञा लागू होने की जानकारी दी। यह आदेश बीएनएसएस की धारा 163 के तहत था। बीएनएसएस का मतलब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता है। इसका अंग्रेजी नाम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता ही प्रचलित है। यह कानून सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े अधिकार देता है। प्रशासन भीड़ पर जरूरी प्रतिबंध लगा सकता है।
बैरिकेडिंग के कारण दोनों बसें आगे नहीं बढ़ सकीं। इससे सड़क पर कुछ समय तक गतिरोध बना रहा। विपक्षी नेताओं ने पुलिस अधिकारियों से बातचीत की। प्रियंका गांधी बस की अगली सीट तक पहुंचीं। उन्होंने वहां मौजूद अधिकारियों से चर्चा की। राहुल गांधी बस के भीतर से स्थिति देखते रहे। पुलिस और नेताओं के बीच बातचीत काफी देर चली। विपक्ष ने शांतिपूर्ण यात्रा की अनुमति मांगी। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला दिया।
राहुल बोले- छात्रों को अकेला नहीं छोड़ेंगे
बस रोके जाने पर राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश के छात्र सड़कों पर हैं। पुलिस छात्रों पर बल प्रयोग कर रही है। राहुल के अनुसार विपक्ष छात्रों को अकेला नहीं छोड़ेगा। इसलिए सांसदों ने सड़क पर उतरने का निर्णय लिया। उन्होंने पूरे विपक्ष की एकजुटता का दावा किया।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी संदेश दिया। उन्होंने मार्च का उद्देश्य अपने पोस्ट में बताया। उन्होंने इसे शांतिपूर्ण कार्यक्रम बताया। उनके अनुसार विपक्ष मृत छात्रों को याद करना चाहता था। उन्होंने घायल प्रदर्शनकारी छात्रों का भी उल्लेख किया। उन्होंने छात्रों को हरसंभव समर्थन देने की बात कही।
गांधी स्मृति पहुंचे सांसद
कुछ समय बाद पुलिस ने बैरिकेड हटा दिए। दोनों बसों को आगे जाने की अनुमति मिली। इसके बाद सांसद गांधी स्मृति के लिए रवाना हुए। काफिला मध्य दिल्ली के रास्तों से आगे बढ़ा। पूरे मार्ग पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। पुलिसकर्मी हर प्रमुख स्थान पर तैनात दिखे। राहुल गांधी और अन्य सांसद गांधी स्मृति पहुंचे। वहां नेताओं ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाया। इसके बाद राहुल गांधी ने सरकार पर हमला बोला।
राहुल ने गांधी स्मृति के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया। महात्मा गांधी की हत्या इसी स्थान पर हुई थी। उन्होंने मौजूदा हालात से इसकी तुलना की। राहुल ने केंद्र पर लोकतंत्र कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने छात्रों पर अत्याचार होने का दावा किया। उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
प्रियंका का सरकार पर हमला
प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलनों की भारतीय परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने महात्मा गांधी और किसान आंदोलनों का उदाहरण दिया। प्रियंका ने कहा कि छात्र अपने अधिकार मांग रहे हैं। वे न्याय और निष्पक्ष परीक्षा की मांग कर रहे हैं। ऐसे छात्रों पर बल प्रयोग गलत है।
उन्होंने लगातार पेपर लीक होने का आरोप लगाया। प्रियंका ने परीक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से छात्रों की शिकायतें सुनने को कहा। प्रियंका के अनुसार आंदोलनकारी बच्चों को पीटा गया। उन्होंने इसे बेहद गंभीर मामला बताया। उन्होंने छात्र हितों को राजनीतिक विवाद से ऊपर रखा।
भाजपा ने बताया ड्रामा
भारतीय जनता पार्टी ने प्रदर्शन की आलोचना की। पार्टी ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को निशाना बनाया। संतोष ने पूरे कार्यक्रम को राजनीतिक ड्रामा बताया।
उन्होंने राहुल गांधी के आवास पर जुटान पर सवाल उठाया। उन्होंने बसें बुलाने की योजना पर भी टिप्पणी की। उनका आरोप था कि विपक्ष ध्यान भटका रहा है। संतोष ने जंतर-मंतर के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। उन्होंने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए। भाजपा ने छात्रों के नाम पर राजनीति का आरोप लगाया।
पेपर लीक बना बड़ा मुद्दा
नीट विवाद ने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। छात्र निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। विपक्ष ने इन्हीं मांगों को अपना समर्थन दिया। कथित पेपर लीक अब राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। संसद के भीतर भी इस पर टकराव दिखा। गुरुवार को यह विवाद सड़कों तक पहुंच गया।
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