रेलवे के खाने में गड़बड़ी अब पड़ेगी भारी, AI रखेगा नजर

Sandeep Kumar | Sept 15, 2026, 18:06 IST
रेलवे के खाने में गड़बड़ी अब पड़ेगी भारी,
रेलवे के खाने में गड़बड़ी अब पड़ेगी भारी,
ईस्ट सेंट्रल रेलवे अपने पेंट्री कार और बेस किचन में AI कैमरे लगाने जा रहा है। इससे खाने की सफाई और क्वालिटी पर दूर बैठकर भी नजर रखी जा सकेगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • ईसीआर पेंट्री कारों में एआई आधारित कैमरे लगाने की तैयारी करेगा।
  • बेस किचन की गतिविधियों पर कैमरों से नियमित निगरानी रखी जाएगी।
  • नई व्यवस्था का उद्देश्य रेलवे भोजन की सफाई सुधारना है।
  • ईसीआर जोन में अभी 73 पेंट्री और वेंडिंग सेवाएं हैं।
  • रेलवे जोन के तहत फिलहाल 62 बेस किचन संचालित हैं।

ट्रेन के खाने की गुणवत्ता को लेकर रेलवे बड़ा कदम उठाएगा। पैंट्री कार और बेस किचन में AI कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरे खाना बनाने से लेकर पैकिंग तक निगरानी करेंगे। ईस्ट सेंट्रल रेलवे में 73 पैंट्री कार शामिल हैं। इसके साथ 62 बेस किचन भी निगरानी के दायरे में आएंगे। IRCTC के जनसंपर्क अधिकारी V K भाटी ने इसकी जानकारी दी है। ECR जोन में फिलहाल 73 पेंट्री कार और वेंडिंग सेवाएं चल रही हैं। साथ ही इस जोन में 62 बेस किचन भी मौजूद हैं।



क्यों लगेंगे AI कैमरे

ट्रेन में सफर करने वाले कई यात्री खाने की सफाई को लेकर सवाल उठाते रहते हैं। कुछ लोग तो इसी वजह से ट्रेन का खाना खाने से बचते हैं। रेलवे अब इस भरोसे को मजबूत करना चाहता है। इसीलिए पेंट्री कार और बेस किचन में AI कैमरे लगाने का फैसला लिया गया है।



इन कैमरों के जरिए खाना बनाने से लेकर उसकी पैकिंग और सप्लाई तक हर स्टेप पर नजर रखी जाएगी। अगर कहीं भी सफाई में कमी दिखेगी तो उसे तुरंत पकड़ा जा सकेगा। इससे यात्रियों तक पहुंचने वाला खाना पहले से ज्यादा सुरक्षित होगा।



कहां कितने किचन हैं

73 पेंट्री कार, 62 किचन

IRCTC अधिकारी के अनुसार ECR जोन में Mail और Express ट्रेनों में 73 पेंट्री कार और ट्रेन-साइड वेंडिंग सेवाएं चल रही हैं। इसके अलावा जोन में 62 बेस किचन भी काम कर रहे हैं। इन किचन में तैयार खाना लंबी दूरी और प्रीमियम ट्रेनों के यात्रियों तक पहुंचाया जाता है। यानी बड़ी संख्या में यात्री रोजाना इन्हीं किचन से बने खाने पर निर्भर रहते हैं।



कैसे होगी निगरानी

AI कैमरे लगने के बाद अधिकारी दूर बैठकर भी किचन और पेंट्री कार की गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे। सिर्फ कैमरों की संख्या बढ़ाना मकसद नहीं है। तकनीक के जरिए यह भी देखा जाएगा कि तय मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।



अगर हाइजीन से जुड़ी कोई कमी नजर आती है तो अधिकारी तुरंत एक्शन ले सकेंगे। इससे पूरी कैटरिंग व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। रेलवे का मानना है कि इससे शिकायतों में भी कमी आएगी।



यात्रियों को क्या फायदा

इस कदम का सबसे बड़ा फायदा आम यात्रियों को मिलेगा। उन्हें अब खाने की सफाई को लेकर कम चिंता करनी पड़ेगी। लंबी दूरी की यात्रा में खाने पर निर्भर रहने वाले लोगों के लिए यह राहत की बात है।



रेलवे अधिकारियों को उम्मीद है कि इस पहल से कैटरिंग सेवा की छवि भी सुधरेगी। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले समय में इसे और जोन में भी लागू किया जा सकता है।



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रेलवे के खाने में गड़बड़ी









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