राममंदिर चढ़ावा रिपोर्ट: ट्रस्ट ने जारी किया चढ़ावे का पूरा हिसाब, देखें रिपोर्ट

Manya Jain | Jul 08, 2026, 12:31 IST
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राम जन्मभूमि ट्रस्ट का 31 मार्च 2026 तक का वित्तीय हिसाब सामने आया है। इसमें दान, सोने-चांदी और जमीन खरीद का पूरा ब्यौरा है, जिससे गड़बड़ी के आरोपों पर विराम लग गया है।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पूरा वित्तीय हिसाब अब सामने आ गया है। यह रिपोर्ट 31 मार्च 2026 तक की स्थिति पर आधारित है। इसमें दान की रकम, सोना-चांदी और जमीन खरीद तक का ब्यौरा दिया गया है। यह जानकारी एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट और ट्रस्ट के वित्तीय विवरण से मिली है।



पिछले कुछ समय से ट्रस्ट पर दान की चोरी और गड़बड़ी के आरोप लगे थे। इसी वजह से यह रिपोर्ट अहम मानी जा रही है। रिपोर्ट में हर बड़े खर्च और आमदनी का हिसाब दर्ज है।



कितना पैसा मिला ट्रस्ट को

साल 2020 से लेकर 31 मार्च 2026 तक ट्रस्ट को कुल 3 हजार 264 करोड़ रुपए मिले। यह पैसा निधि समर्पण अभियान और कॉर्पस डोनेशन से आया। इसमें से 2 हजार 370 करोड़ रुपए मंदिर निर्माण पर खर्च हुए। इसमें निर्माण कार्य के साथ-साथ अन्य पूंजीगत खर्च भी शामिल हैं।



582 करोड़ का नकद चढ़ावा

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रस्ट को 582 करोड़ रुपए नकद चढ़ावे के तौर पर मिले। इसमें से 391 करोड़ रुपए संचालन और रोजमर्रा के खर्चों पर लगे। 31 मार्च 2026 तक ट्रस्ट के पास कुल 1876.30 करोड़ रुपए की निधि बची हुई थी।



यह रकम अलग-अलग जगह सुरक्षित रखी गई है। इसमें भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट शामिल हैं। कुछ पैसा म्यूचुअल फंड और बैंक खातों में भी है।



32 किलो सोना और डेढ़ हजार किलो चांदी

रिपोर्ट में सोने का भी पूरा हिसाब है। ट्रस्ट के रिकॉर्ड में 32.259 किलोग्राम सोना जैसी वस्तुएं दर्ज हैं। यह सारा सोना दान में मिला था।



चांदी को लेकर भी विस्तार से बताया गया है। दान में मिली चांदी को सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SPMCIL – Security Printing and Minting Corporation of India) भेजा गया। वहां इसे शुद्ध करके सिल्वर बार में बदला गया।



ट्रस्ट के पास अभी 849.272 किलोग्राम 99.99 प्रतिशत शुद्ध चांदी दर्ज है। इसके अलावा 669.653 किलोग्राम अन्य चांदी जैसी धातु भी रिकॉर्ड में है। इस तरह कुल 1518.925 किलोग्राम चांदी का हिसाब मिलता है।



गायब चांदी के आरोप निकले गलत

सोशल मीडिया पर दान में मिली चांदी की सिल्ली गायब होने के आरोप लगे थे। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन और विश्व सिंधी सेवा समाज की दान की गई चांदी पर सवाल उठे थे। जांच में यह आरोप सही नहीं पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार सारी वस्तुएं सरकारी टकसाल और ट्रस्ट के रिकॉर्ड में मौजूद मिलीं।



ढाई एकड़ जमीन की खरीद

रिपोर्ट में जमीन खरीद का भी जिक्र है। 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच ट्रस्ट ने अलग-अलग जगह 2.57 एकड़ जमीन खरीदी या उसके लिए समझौते किए। इस पर कुल 20.16 करोड़ रुपए खर्च हुए।



यह पूरी रिपोर्ट अनऑडिटेड और अस्थायी बताई गई है। इसमें ट्रस्ट की आमदनी, खर्च, नकद चढ़ावा, निर्माण खर्च, जमीन खरीद और कीमती धातुओं का पूरा ब्यौरा शामिल है।



कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद

6 जून 2026 को अयोध्या से एक बड़ी खबर आई थी। मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने सबसे पहले आरोप लगाया था कि दानपात्रों से करीब 7 करोड़ रुपए की चोरी हुई है। उनके मुताबिक यह कोई एक बार की घटना नहीं थी।



ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया। इसके बाद जांच का दायरा तेजी से बढ़ता गया।



जांच में क्या-क्या सामने आया

SIT ने अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंपी। यह रिपोर्ट 140 पन्नों की है। इसमें कई सेवादारों और अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। SI+T ने दोषियों पर FIR दर्ज कराने की सिफारिश भी की है।



जांच का दायरा सिर्फ नकद चढ़ावे तक सीमित नहीं रहा। जांच में जमीन खरीद और निर्माण कार्य में भी अनियमितता मिली। ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और विशेष सदस्य गोपाल राव के परिजनों की भूमिका भी सामने आई।



SIT ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से करीब छह घंटे तक पूछताछ की। इससे पहले चंदा गिनने से जुड़े आठ लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी थी। आरोपी अविनाश शुक्ला को पुलिस रिमांड पर लिया गया, उसके घर से 20.40 लाख रुपए नकद बरामद हुए।



चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा

विवाद बढ़ने के बाद 6 जुलाई 2026 को ट्रस्ट की अहम बैठक हुई। इस बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया। कृष्ण मोहन दास को अंतरिम महासचिव बनाया गया।



बैठक के बाद ट्रस्ट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने इस घटना को बेहद दुखद और शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि मीडिया में चल रही खबरों की सच्चाई जांचनी चाहिए और झूठ फैलाने से बचना चाहिए।



चंपत राय का जवाब और सफाई

इस्तीफे के अगले ही दिन चंपत राय ने चुप्पी तोड़ी। उन्होंने रामभक्तों के नाम एक हाथ से लिखा पत्र जारी किया और कहा कि SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वे हर आरोप का क्रमवार जवाब देंगे।



इसके बाद उन्होंने SIT को लिखित जवाब भी दिया। इसमें उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक की अयोध्या शाखा पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना था कि गिनती के दौरान कर्मचारियों की तलाशी नहीं ली गई और तय सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ।



हालांकि जांच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक SIT की रिपोर्ट में चंपत राय की कोई सीधी संलिप्तता नहीं पाई गई, लेकिन उन्हें क्लीन चिट भी नहीं दी गई है।



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