राम मंदिर में 60 किलो चांदी की ईंटों का हिसाब नहीं, ज्वैलर्स एसोसिएशन का आरोप
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- 60 किलो चांदी की ईंटें रिकॉर्ड से गायब।
- अखंड ज्योति और चांदी के दीपक का कोई हिसाब नहीं।
- ज्वैलर्स एसोसिएशन ने रसीद सहित लगाए आरोप।
- SIT ने 40 से अधिक कर्मचारियों से पूछताछ की।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट में CBI जांच की मांग।
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा विवाद (Ram Mandir Donation Controversy) में हर दिन नई परतें खुल रही हैं। अब इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन ने 60 किलो चांदी की ईंटें और अखंड ज्योति का हिसाब न मिलने की बात कही है।
रसीद और शुद्धता प्रमाण पत्र होने के बावजूद यह सामग्री गायब है। श्रद्धालु खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
अयोध्या के राम मंदिर में दानपात्रों से करोड़ों रुपए गायब होने का दावा सामने आया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 7 जून 2026 को यह मुद्दा सोशल मीडिया पर उठाया था। उन्होंने ट्रस्ट की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए।
तीन करोड़ रुपए की गिनती के दौरान कुछ राशि कम पाए जाने से यह विवाद शुरू हुआ था। इसके बाद से मामला यूपी की राजनीति का केंद्र बन गया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सभी आरोपों को गलत बताया।
60 किलो चांदी कहां गई?
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड अनुराग रस्तोगी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। देशभर के सराफा कारोबारियों ने 10-10 और 20-20 ग्राम चांदी एकत्र की थी।
इस तरह करीब 60 किलो चांदी एकत्र हुई थी। इसे गलाकर एक से सवा किलो की ईंटें बनाई गई थीं। ये ईंटें राम लला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान मंदिर को दान की गई थीं और नींव रखने में उपयोग होनी थीं। अब ये ईंटें रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब हैं।
रसीद थी, फिर भी हिसाब नहीं
20 जुलाई 2020 को महासचिव चंपत राय की सहमति के बाद यह चांदी रामकचहरी में सौंपी गई थी। उस समय डॉ. अनिल मिश्रा और कैशियर प्रकाश गुप्ता भी मौजूद थे। दान सामग्री स्वीकार करने के बाद शुद्धता प्रमाण पत्र (Purity Certificate) और रसीद भी जारी की गई थी।
ज्वेलर्स एसोसिएशन का दावा है कि शिलाएं ट्रस्ट को रसीद के साथ सौंपी गई थीं। इसके बावजूद इन ईंटों का कोई अता-पता नहीं है। यह मामला ट्रस्ट की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है।
अखंड ज्योति और दीपक भी गायब
रस्तोगी ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से एक-एक किलो के दो चांदी के दीपक दान किए थे। उन्होंने दो चांदी के कटोरे और 200 ग्राम की पंचधातु सिल्ली भी दी थी।
एक दीपक में डॉ. अनिल मिश्रा और उनकी पत्नी ने अखंड ज्योति (Akhand Jyoti) जलाई थी। यह ज्योति प्राण प्रतिष्ठा की तस्वीरों में भी दिखाई दी थी। लेकिन मंदिर बनने के बाद न वह दीपक दिखा और न ही चांदी के कटोरे। दानदाताओं ने इन सभी वस्तुओं का सार्वजनिक हिसाब मांगा है।
SIT जांच में क्या निकला?
राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर SIT गठित हुई। ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री से जांच की मांग की थी। एक कर्मचारी के घर से 10 लाख रुपए मिले, जो गोबर के ढेर में छिपाए गए थे।
SIT इस मामले में 40 से ज्यादा कर्मचारियों से पूछताछ कर चुकी है। इसके अलावा पुजारियों और संबंधित व्यक्तियों से भी पूछताछ जारी है। चढ़ावे के संग्रह, संरक्षण और रिकॉर्डिंग की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
हाईकोर्ट और PMO तक पहुंचा मामला
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में चोरी के दावे की जांच सीबीआई (CBI) से कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही चढ़ावे का ऑडिट कैग (CAG) से कराने की भी मांग की गई है।
मामला PMO तक पहुंच चुका है और अविमुक्तेश्वरानंद ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। यह विवाद अब धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गरमाया हुआ है।
पारदर्शिता की मांग जरूरी
राम मंदिर में रोज चार लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन करते हैं और 10 दान काउंटरों पर हर रोज 10 लाख रुपए से अधिक चढ़ावा आता है। इतनी बड़ी दान राशि और बहुमूल्य वस्तुओं के प्रबंधन में पारदर्शिता (Transparency) जरूरी है।
ट्रस्ट ने सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। लेकिन श्रद्धालु और दानदाता रसीद के बावजूद उत्तर मांग रहे हैं। यह विवाद मंदिर प्रबंधन (Temple Management) के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
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