राम मंदिर में चंदा चोरी ही नहीं, फर्जी रसीद काटकर जेब साफ करते थे आरोपी

Amresh Kushwaha | Jul 09, 2026, 11:20 IST
राम मंदिर चंदा चोरी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में फर्जी रसीद बुक बरामद हुई है। आरोपी श्रद्धालुओं से फर्जी रसीद देकर दान वसूलते थे। चंपत राय पर एफआईआर में देरी को लेकर सवाल उठे हैं। SIT ने SBI की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में नया खुलासा हुआ है।
  • आरोपियों के पास से फर्जी चंदा रसीद बुक बरामद हुई है।
  • श्रद्धालुओं को असली जैसी दिखने वाली नकली रसीद दी जाती थी।
  • चंपत राय पर एफआईआर में देरी को लेकर भी सवाल उठे हैं।
  • SIT ने SBI (State Bank of India) की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। हर दिन इस मामले में नए तथ्य सामने आ रहे हैं। ताजा खुलासे में आरोपियों की निशानदेही पर एक अहम सबूत बरामद हुआ है। यह सबूत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के नाम पर छपी फर्जी रसीद बुक है।



फर्जी रसीद से होती थी उगाही

पूछताछ में आरोपियों ने बड़ी बात कबूल की है। उन्होंने बताया कि वे सिर्फ दान की चोरी नहीं करते थे। वे फर्जी रसीद काटकर श्रद्धालुओं से सीधे पैसे भी वसूलते थे। यह रसीद बुक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के नाम पर बनाई गई थी। इस पर तीर्थ क्षेत्र का असली जैसा लोगो भी छपवाया गया था।



टिन्नू यादव और अन्य आरोपी शामिल

शुरुआती जांच में टिन्नू यादव, लव कुश, करुणेश और अनुकल्प जैसे आरोपियों के नाम सामने आए हैं। ये आरोपी दान देने वाले श्रद्धालुओं को यही फर्जी पर्ची पकड़ाते थे। इससे श्रद्धालुओं को किसी तरह का शक नहीं होता था। रसीद हूबहू असली रसीद जैसी ही दिखती थी। इसी वजह से यह धोखा लंबे समय तक चलता रहा।



ऑनलाइन व्यवस्था के बाद बंद हुआ खेल

सूत्रों के मुताबिक मंदिर में जब नई ऑनलाइन रसीद व्यवस्था लागू हुई, तब यह फर्जीवाड़ा रुक गया। इसके बाद आरोपियों ने कागजी फर्जी रसीदों का इस्तेमाल बंद कर दिया। अब श्रद्धालु सीधे मंदिर के बैंक खाते में दान भेजते हैं। कुछ लोग मंदिर परिसर के दान काउंटर से आधिकारिक स्लिप भी लेते हैं। इससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश काफी हद तक कम हो गई है।



चंपत राय सवालों के घेरे में

इस पूरे मामले में पूर्व महासचिव चंपत राय पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने 05 जून को ही चोरी पकड़ ली थी। पुलिस की मदद से चोरी की गई रकम भी बरामद करवा ली गई थी। लेकिन उस वक्त एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। यही देरी अब पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। ट्रस्ट की मीटिंग में भी इस देरी पर सवाल उठे हैं।



अखिलेश यादव ने उठाया था मुद्दा

यह मामला 07 जून को सार्वजनिक हुआ था। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे सबसे पहले उठाया था। इसके बाद यह मुद्दा देशभर में चर्चा का विषय बन गया। ट्रस्ट की मीटिंग में यह भी स्वीकार किया गया कि अगर पहले ही मुकदमा दर्ज हो जाता, तो विवाद इतना नहीं बढ़ता। समय पर कानूनी कार्रवाई से मामला जल्दी सुलझ सकता था।



चंपत राय की भूमिका पर सवाल

राम मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद चंपत राय की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बनी थी। वहीं, इस विवाद के बाद उनकी छवि पर असर पड़ा है। ट्रस्ट की चर्चा में यह भी पूछा गया कि तलाशी और बरामदगी का अधिकार उन्हें किसने दिया। साथ ही यह भी पूछा गया कि बरामदगी के बाद एफआईआर क्यों नहीं हुई। सूत्रों के मुताबिक अगर पदाधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई, तो उन पर आपराधिक जिम्मेदारी भी तय हो सकती है।



SBI की भूमिका पर भी सवाल

इस बीच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी SIT (Special Investigation Team) की जांच में एक और अहम पहलू सामने आया है। SIT ने दान गिनती के काम में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी SBI की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बैंक की जिम्मेदारी सिर्फ गिनती के बाद कैश जमा करने तक सीमित नहीं थी। बैंक को पूरी गिनती प्रक्रिया की निगरानी भी करनी थी।



SOP का पालन नहीं हुआ

जांच में सामने आया कि बैंक को नोट गिनने वाली मशीनों की सही कार्यप्रणाली भी सुनिश्चित करनी थी। गिनती में लगे कर्मचारियों पर नजर रखना भी बैंक का काम था। सुरक्षा नियमों को लागू करवाना और तय एसओपी (Standard Operating Procedure) का पालन करवाना भी जरूरी था। वहीं, SIT ने पाया कि ये जिम्मेदारियां ठीक से नहीं निभाई गईं। कई सुरक्षा उपाय या तो लागू नहीं हुए या अधूरे रह गए। इससे पूरी निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ गई।



आगे की जांच जारी

सूत्रों के मुताबिक अब जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा। अयोध्या पुलिस जल्द ही SBI के अधिकारियों से पूछताछ करेगी। बैंक द्वारा रखे गए बाहरी कर्मचारियों से भी सवाल-जवाब होंगे। इस दौरान यह भी जांचा जाएगा कि इन कर्मचारियों की तैनाती किस आधार पर हुई थी। पूरे मामले में अब कई एजेंसियां मिलकर जांच को आगे बढ़ा रही हैं।



इस पूरे प्रकरण ने राम मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं के भरोसे से जुड़ा यह मामला अब कानूनी दायरे में पहुंच गया है। आने वाले दिनों में जांच के और भी नतीजे सामने आ सकते हैं। लोगों की नजर अब आगे की कार्रवाई पर टिकी है।



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