चढ़ावे की गिनती पर अयोध्या राम मंदिर में मचा शोर, दूसरे मंदिरों के क्या है नियम?

Anjali Dwivedi | Jun 12, 2026, 15:29 IST
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अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। अखिलेश यादव सहित विपक्ष ने दान के करोड़ों रुपए गायब होने और धांधली के आरोप लगाए हैं। वहीं, श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित और गलत बताया है।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 7 जून 2026 को सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि दान के करोड़ों रुपए गायब हो गए हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उनके सभी आरोपों को गलत और राजनीति से प्रेरित बताया है। तीन करोड़ रुपए की गिनती के दौरान कुछ राशि कम पाए जाने से यह विवाद शुरू हुआ था। अब यह मामला यूपी की सियासत का केंद्र बन गया है।



दान-पात्र से शुरू हुआ विवाद

राम मंदिर में दान की रकम गिनने का काम नियमित होता है। यह विवाद तब बढ़ा, जब दान में मिले तीन करोड़ रुपयों की गिनती के दौरान अंतर की बात सामने आई थी। सूत्रों का कहना है कि दो पदाधिकारियों में इस बात पर नोकझोक भी हुई।



कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि मंदिर परिसर में दानपात्र की गिनती के दौरान कथित अनियमितता सामने आई है। इस मामले में पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि ट्रस्ट से जुड़े एक अधिकारी को कार्यमुक्त किया गया है। साथ ही और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से दान राशि की गणना प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है।



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अखिलेश ने कोर्ट से मांगा दखल

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 7 जून 2026 को सोशल मीडिया पर यह बात उठाई थी। उन्होंने कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग भी की और सरकार की चुप्पी को संदिग्ध बताया था।



सपा सरकार में मंत्री रहे पवन पांडे ने दान की रकम में 7.5 करोड़ रुपए तक गायब होने की आशंका जताई है। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी दान-पात्रों की गिनती में बड़ी धांधली के आरोप लगाए हैं।



विपक्षी दलों ने एक साथ यह सवाल उठाया कि जब मंदिर की सालाना कमाई सैकड़ों करोड़ में है, तो हिसाब में पारदर्शिता क्यों नहीं है।



ट्रस्ट ने किया इनकार

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (SRJBTK) के महासचिव चंपत राय ने कहा कि मंदिर में नियमित आंतरिक ऑडिट चल रहा है और SBI के प्रतिनिधि भी उसमें शामिल हैं।



ट्रस्ट सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने आरोपों को गलत और राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि हर लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड लिखित रूप में रखा जाता है और वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है।



ऑडिट ट्रस्ट का भी कहना रहा कि उनकी ओर से लगातार ऑडिट हो रहा है और अब तक दान-पात्रों की आय में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने नहीं आई।



राम मंदिर का दान असल में कितना?

ट्रस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच रामलला के दान-पात्रों से 54.79 करोड़ रुपए जमा हुए हैं। दान काउंटरों से 18.88 करोड़ और ऑनलाइन दान से 8.33 करोड़ रुपए मिले हैं।



विदेशी योगदान FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) के जरिए 78 लाख रुपए रहा। दान के अलावा बैंक डिपॉजिट पर ब्याज से ट्रस्ट ने लगभग 138 करोड़ रुपए कमाए हैं।



सालाना कमाई के मामले में राम मंदिर देश का तीसरा सबसे बड़ा मंदिर बन गया है। यहां रोज चार लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन करते हैं और 10 दान काउंटरों पर हर रोज 10 लाख रुपए से अधिक चढ़ावा आता है।



ऐसे में सवाल ये उठता है कि राम मंदिर के चढ़ावे का प्रबंधन कैसे होता है? अन्य प्रसिद्ध मंदिरों की व्यवस्था इससे कितनी अलग है? चलिए जानते हैं विस्तार से …



Ram Mandir


राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती का सिस्टम और कमियां

1.राम मंदिर के चढ़ावे की हर दिन सीसीटीवी कैमरों की देखरेख में गिनती की जाती है।



कमी: आम भक्तों को इस गिनती को देखने की अनुमति नहीं होती और न ही इसके सीसीटीवी फुटेज को पब्लिक किया जाता है।



2. गिनती पूरी होने पर धनराशि को रजिस्टर में दर्ज करके मंदिर परिसर के लॉकर में सुरक्षित रख दिया जाता है। अगले दिन इस राशि को बैंक खाते में जमा करा दिया जाता है।



कमी: मंदिर को कुल कितना दान प्राप्त हुआ, इसका कोई आधिकारिक डेटा नियमित तौर पर सार्वजनिक नहीं किया जाता।



3. राम मंदिर ट्रस्ट की समय-समय पर आयोजित बैठकों में चढ़ावे का विवरण साझा किया जाता है। दिसंबर 2025 की अंतिम बैठक में बताया गया था कि ट्रस्ट गठन से तब तक कुल ₹4575 करोड़ का दान आ चुका है।



कमी: इस बैठक के बाद से जून 2026 तक कितना नया चढ़ावा आया, इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।



4. देश के अधिकांश प्रमुख मंदिरों के खातों का ऑडिट सरकारी विभाग या आंतरिक कमेटियां करती हैं। उदाहरण के लिए, शिरडी साईंबाबा मंदिर का ऑडिट महाराष्ट्र सरकार का लोकल फंड ऑडिट विभाग संभालता है।



कमी: इसके विपरीत, राम मंदिर में चढ़ावे की रकम के ऑडिट की पूरी जिम्मेदारी एक निजी कंपनी टीसीएस (TCS) के पास है।



अब जानते हैं देश के दूसरे बड़े मंदिरों का सिस्टम क्या है…

जिला जज करते हैं चढ़ावे की देखरेख

केरल का श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर विश्व के सबसे धनी देवस्थानों में से एक है। इसके तहखानों में 1.2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति होने का अनुमान है। यहां चढ़ावे और वित्तीय व्यवस्थाओं की देखरेख सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एक विशेष प्रशासनिक समिति द्वारा की जाती है।



तिरुवनंतपुरम के जिला जज इस प्रशासनिक समिति के अध्यक्ष होते हैं। दानपात्र (मंदिर का खुला दानपात्र) से मिलने वाली नगदी और सिक्कों की गिनती कड़ी CCTV निगरानी में की जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान बैंक के अधिकारी, सुरक्षा बल और समिति के प्रतिनिधि अनिवार्य रूप से उपस्थित रहते हैं। साथ ही, वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए खातों का नियमित अंतराल पर ऑडिट भी कराया जाता है।



Shri-Padmanabhaswamy-Temple


आम भक्त भी देख सकते हैं चढ़ावे की गिनती

आंध्र प्रदेश का तिरुमाला तिरुपति श्री वेंकटेश्वर मंदिर अपने दान प्रबंधन और व्यवस्था के लिए दुनिया भर में मिसाल माना जाता है। यहां हर दिन करीब 4 से 4.5 करोड़ रुपए का चढ़ावा आता है। दानपात्रों की रकम गिनने के लिए यहां परकामणि भवन नाम से एक अत्याधुनिक हॉल बनाया गया है। इस हॉल में पारदर्शी शीशे की दीवारें लगी हैं, ताकि बाहर खड़े आम श्रद्धालु भी नोटों की गिनती की पूरी प्रक्रिया को अपनी आंखों से देख सकें।



चढ़ावे को गिनने का काम बेहद कड़े नियमों के तहत होता है। इस जिम्मेदारी के लिए केवल 35 से 65 साल के उन हिंदू पुरुषों को चुना जाता है। साथ ही जो केंद्र/राज्य सरकार, सरकारी बैंकों या सार्वजनिक उपक्रमों में काम करते हों या वहां से रिटायर्ड हों।



गिनती के समय ये कर्मचारी केवल सफेद धोती और अंगवस्त्रम पहनते हैं। उन्हें शर्ट, बनियान या जेब वाले कपड़े पहनने की अनुमति नहीं होती है। इसके अलावा मोबाइल फोन, पर्स और निजी आभूषण ले जाने पर भी पूरी तरह पाबंदी होती है।



Tirupati Sri Venkateswara Temple


श्रद्धालु करते हैं चढ़ावे की गिनती

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर में दान प्रबंधन की प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी और व्यवस्थित है। यहां हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को दानपेटियां खोली जाती हैं, और इसके बाद खुले हॉल में कई दिनों तक चढ़ावे की गिनती चलती है।



इस व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें आम श्रद्धालु भी गिनती के कार्य में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए मंदिर प्रशासन केवल संबंधित व्यक्ति का पहचान-पत्र (आधार कार्ड) अनिवार्य रूप से मांगता है। इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मीडिया प्रतिनिधि भी इसमें स्वयं शामिल हो चुके हैं।



पूरी गिनती के दौरान ADM स्तर के अधिकारी, मंदिर मंडल के पदाधिकारी और बैंक ऑफ बड़ौदा के कर्मचारी निगरानी के लिए मौजूद रहते हैं। करीब 200 लोगों की टीम पूरी प्रक्रिया को सीसीटीवी और लाइव वीडियोग्राफी की कड़ी निगरानी में पूरा करती है।



इसके अतिरिक्त, चढ़ावे में मिले सोने-चांदी को इलेक्ट्रॉनिक कांटों से तौलकर मिलीग्राम तक रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है। फिर उसे सीलबंद स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रख दिया जाता है। हर शाम प्रेस विज्ञप्ति के जरिए उस दिन प्राप्त हुई राशि और कीमती धातुओं का ब्यौरा पब्लिक किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस मंदिर को 337 करोड़ रुपए से अधिक का दान प्राप्त हुआ है।



Sanwaliya Seth Temple


सरकारी विभाग करता है मंदिर के चढ़ावे का ऑडिट

महाराष्ट्र के शिरडी स्थित साईं बाबा मंदिर की वित्तीय व्यवस्था और पारदर्शिता भी एक मिसाल है। यहां मंदिर परिसर में रखे दानपात्रों को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और बैंक के आला अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति में ही खोला जाता है। इसके बाद चढ़ावे की पूरी गिनती बुलेटप्रूफ कांच से निर्मित एक बेहद सुरक्षित हॉल के भीतर की जाती है।



इस काम में लगे कर्मचारियों के लिए सख्त नियम तय हैं। उन्हें बिना जेब वाले वस्त्र पहनने होते हैं और मेटल डिटेक्टर से गहन सुरक्षा जांच से गुजरने के बाद ही हॉल में प्रवेश दिया जाता है। इस मंदिर प्रबंधन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके खातों की जांच किसी निजी CA से न करवाकर, सीधे महाराष्ट्र सरकार के लोकल फंड ऑडिट विभाग द्वारा सरकारी स्तर पर कराई जाती है।



Spiritual Journey to Shird


BJP और सहयोगियों का पलटवार

NDA सहयोगी और यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इस मामले को मंदिर प्रशासन से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि इसका जवाब संबंधित ट्रस्ट और प्रशासन देगा।



UP के डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने कहा कि भूमि पूजन से लेकर प्राण प्रतिष्ठा तक हर बड़े अवसर पर अखिलेश यादव मौन रहे और अब वे ऐसे बयान दे रहे हैं जो भ्रम और विवाद को जन्म देते हैं।



धर्म और राजनीति का मेल

राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। सपा प्रमुख का कहना है कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है।



विपक्ष की मांग है कि किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच हो। ट्रस्ट का कहना है कि सब कुछ पारदर्शी है और कोई गड़बड़ी नहीं हुई। यह विवाद 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सियासी जमीन तैयार करने का जरिया भी बन रहा है।



FAQ

  1. राम मंदिर में दान का पैसा कहां जाता है?
    राम मंदिर में आने वाला दान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खाते में जाता है। ट्रस्ट इसका उपयोग मंदिर निर्माण, रखरखाव और धार्मिक गतिविधियों में करता है। SBI के प्रतिनिधि गिनती प्रक्रिया में शामिल रहते हैं।
  2. क्या राम मंदिर के दान में सच में गड़बड़ी हुई है?
    यह अभी आरोप के स्तर पर है। ट्रस्ट ने हर आरोप खारिज किया है और नियमित ऑडिट का हवाला दिया है। विपक्ष स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है और मामला राजनीतिक रूप ले चुका है।
  3. राम मंदिर की सालाना कमाई कितनी है?
    अयोध्या के राम मंदिर की सालाना कमाई 700 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। यह देश में तीसरे नंबर का सबसे अधिक दान पाने वाला मंदिर है। तिरुपति और पद्मनाभस्वामी मंदिर ही इससे आगे हैं।

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