राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में सुप्रीम कोर्ट ने बंद की सुनवाई, अब निचली अदालत में होगी आगे की कार्रवाई
इसके बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया। कोर्ट ने संबंधित मजिस्ट्रेट को कानून के मुताबिक कार्रवाई करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को भी राहत दी है। अब वे निचली अदालत में अपनी बात रख सकते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों पर कोई फैसला नहीं सुनाया है।
चढ़ावे की गिनती के दौरान चोरी का आरोप
यह मामला राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे से जुड़ा है। आरोप है कि मंदिर में आने वाले दान में हेराफेरी की गई। कैश की गिनती के दौरान भी कथित चोरी की बात सामने आई है। इसी मामले में जांच की मांग करते हुए याचिकाएं दाखिल हुई थीं।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान जांच की जानकारी दी गई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस की SIT जांच कर रही है। टीम इस मामले के हर पहलू की गहराई से पड़ताल कर रही है।
बैंक अकाउंट और संपत्ति की भी हुई जांच
जांच के दौरान आरोपियों के बैंक अकाउंट की पड़ताल की गई। उनके रिश्तेदारों के बैंक अकाउंट की भी जांच हुई। इसके लिए फाइनेंशियल ट्रेकिंग की मदद ली गई। जांच एजेंसियों ने पैसों के लेनदेन का हिसाब भी देखा।
जानकारी के मुताबिक, सुनवाई में बताया गया कि कुछ कर्मचारियों ने महंगी संपत्तियां खरीदी थीं। जांच के दौरान इन संपत्तियों को लेकर सवाल उठे। एक कर्मचारी ने 50 लाख रुपए की संपत्ति खरीदी थी। इस खरीद में केवल 15 लाख रुपए बैंक से दिए गए थे। बाकी कैश का भुगतान बैंक ट्रांजैक्शन में नहीं दिखाया गया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि बाकी कैश नकद दी गई थी। आरोप है कि यह पैसा चढ़ावे की कथित चोरी से जुटाया गया था। जांच एजेंसियां ऐसे लेनदेन की जानकारी जुटा रही हैं। इन जानकारियों को जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के रूप में रखा गया है।
सीजेआई सूर्यकांत ने क्या कहा?
खबरों के मुताबिक, सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं को चेतावनी भी दी। कोर्ट ने उन्हें निचली अदालत में अपनी बात रखने की अनुमति दी। इसके साथ ही उन्होंने इस अनुमति का सही इस्तेमाल करने को कहा।
इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपनी बात रखने का मौका दिया। वे अब संबंधित सिविल कोर्ट में अपना पक्ष रख सकते हैं। लेकिन उन्हें अदालत की अनुमति का सही इस्तेमाल करना होगा।
अब निचली अदालत में होगी आगे की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। अदालत ने आगे की कार्रवाई निचली अदालत पर छोड़ दी है। अब संबंधित मजिस्ट्रेट चार्जशीट के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। इसका मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई खत्म हो गई है। लेकिन पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया अभी बाकी है। निचली अदालत में आरोपों और जांच से जुड़े पहलुओं पर सुनवाई होगी।
पांच जजों के फैसले की समीक्षा की मांग भी उठी
सुनवाई के दौरान एक दूसरी याचिका का मुद्दा भी उठा है। यह याचिका अयोध्या ट्रस्ट से जुड़े पांच जजों के फैसले की समीक्षा से संबंधित थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस याचिका पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह सिविल मुकदमा दाखिल करना सही तरीका नहीं है।
FAQs
- सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े मामले में क्या आदेश दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मजिस्ट्रेट को कानून के मुताबिक कार्रवाई करने का आदेश दिया और याचिकाकर्ताओं को निचली अदालत में अपनी बात रखने की अनुमति दी है। - इस मामले में आरोप क्या है और जांच किस प्रकार की जा रही है?
इस मामले में आरोप है कि राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे में हेराफेरी की गई है, जिसमें नकद की गिनती के दौरान चोरी का भी आरोप लगा है। उत्तर प्रदेश पुलिस की SIT इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। - चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अदालत में क्या चेतावनी दी?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं को चेतावनी दी कि वे निचली अदालत में अपनी बात रखने की अनुमति का सही तरीके से उपयोग करें और इसका दुरुपयोग न करें।