राम मंदिर ट्रस्ट को लीगल नोटिस: 6 साल के चंदे का 3 दिन में दें पाई-पाई का हिसाब
अयोध्या केराम मंदिर में चंदाचोरी का मामला पहलेसे चल रहा है। अब इसपर एक नया विवादजुड़ गया है।श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्टकेतीन बड़ेपदाधिकारियों को लीगलनोटिस भेजा गया है।नोटिस में वित्तवर्ष 2021-22 से2025-26 तक केदान और खर्च का पूराब्योरा तीनदिनों में मांगागया है। जवाबनहीं मिला तो कानूनीकार्रवाई कीचेतावनी दी गई है।
किसे मिला नोटिस?
यह नोटिस ट्रस्ट केतीन शीर्षपदाधिकारियों को भेजा गया है।इनमें अध्यक्षमहंत नृत्य गोपालदास ,महासचिव चंपत राय औरकोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरिशामिल हैं।यहनोटिस बिहार केबक्सर से राजद(RJD) केमौजूदा सांसदसुधाकर सिंह ने भेजा है।नोटिस की पैरवीएडवोकेट सत्यम सिंहराजपूत कररहे हैं।
क्या-क्या मांगा गया है?
नोटिसमें कईदस्तावेजों की मांग कीगई है। इनमेंऑडिट की गईबैलेंस शीट,आय-व्यय का पूराविवरण, ऑडिटरकी रिपोर्ट,ट्रस्ट द्वाराखरीदी गई जमीनकी जानकारीशामिल है।इसकेअलावा बैंकखातों का ब्योरा औरविदेश सेमिले किसी भीचंदे का विवरण भीमांगा गया है।यह विदेशीचंदा FCRA(ForeignContributionRegulation Act) के तहतआता है।
किन कानूनों का हवाला?
नोटिसमें चारप्रमुख कानूनों काजिक्र किया गयाहै। इनमें इंडियनट्रस्ट्स एक्ट 1882, इनकमटैक्स एक्ट1961, उत्तर प्रदेशपब्लिकट्रस्ट्स एक्ट औरप्रिवेंशन ऑफ मनीलॉन्ड्रिंग एक्ट2002 शामिल हैं।ये सभी कानूनसार्वजनिक धार्मिकट्रस्ट केट्रस्टियों परजवाबदेही और पारदर्शिताकी जिम्मेदारीडालते हैं।
मद्रास हाईकोर्ट का फैसला भी शामिल
नोटिस मेंमद्रास हाईकोर्टके एक हालिया फैसलेका भी हवालादिया गया है। यहफैसला 21 नवंबर2025 को आया था। इसफैसले में कहागया था किकिसी सार्वजनिकधार्मिक संस्था कोदिया गया दानट्रस्टियों की निजीसंपत्ति नहीं होती है।वह पैसा समुदायके फायदे के लिएहोता है। साथ हीसमुदाय को ऑडिट औरपारदर्शिता मांगनेका पूरा अधिकार है।
जनहित में बताया नोटिस
सांसद सुधाकर सिंहने साफ कहा किउनकी चिंता सिर्फ यहहै कि भक्तों कापैसा पारदर्शीतरीके से खर्च हो।उन्होंने जमीन खरीदी,ऑडिट जानकारी नदेने और खर्च मेंपारदर्शिता न होनेको लेकर चिंताजाहिर की है।
वहीं एडवोकेटसत्यम सिंह राजपूतका कहना था कि यहनोटिस पूरी तरहजनहित में जारी कियागया है। कोईराजनीतिक याव्यक्तिगत मकसदइसमें नहीं है।
जवाब नहीं दिया तो क्या होगा?
नोटिस में कहा गया हैकि यदि तीन दिनोंमें संतोषजनक जवाबनहीं मिला, तोमामले को उचितकानूनी मंचों तक लेजाया जाएगा।ट्रस्ट का इनकम टैक्सएक्ट की धारा 80Gके तहतपंजीकरण है। इसलिए जनताके पैसे का हिसाबदेना उनकी कानूनीजिम्मेदारी बनती है।
यहमामला ऐसे समय आयाहै जब राममंदिर में चंदाचोरी की जांच पहलेसे चल रही है।SIT (SpecialInvestigation Team) इसमामले में 40से ज्यादा कर्मचारियोंसे पूछताछकर चुकीहै।
क्या है विवाद
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर बड़ा विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 7 जून 2026 को सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि दान के करोड़ों रुपए गायब हो गए हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उनके सभी आरोपों को गलत और राजनीति से प्रेरित बताया है। तीन करोड़ रुपए की गिनती के दौरान कुछ राशि कम पाए जाने से यह विवाद शुरू हुआ था। अब यह मामला यूपी की सियासत का केंद्र बन गया है।
दान-पात्र से शुरू हुआ विवाद
राम मंदिर में दान की रकम गिनने का काम नियमित होता है। यह विवाद तब बढ़ा, जब दान में मिले तीन करोड़ रुपयों की गिनती के दौरान अंतर की बात सामने आई थी। सूत्रों का कहना है कि दो पदाधिकारियों में इस बात पर नोकझोक भी हुई।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि मंदिर परिसर में दानपात्र की गिनती के दौरान कथित अनियमितता सामने आई है। इस मामले में पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि ट्रस्ट से जुड़े एक अधिकारी को कार्यमुक्त किया गया है। साथ ही और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से दान राशि की गणना प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है।
FAQ
- राम मंदिर ट्रस्ट को लीगल नोटिस किसने और क्यों भेजा?
बिहार के बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह ने यह नोटिस भेजा है। उन्होंने वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक के दान, खर्च और जमीन खरीद का पूरा हिसाब मांगा है। नोटिस का मकसद ट्रस्ट में पारदर्शिता सुनिश्चित करना बताया गया है। - नोटिस में ट्रस्ट से क्या-क्या मांगा गया है?
नोटिस में ऑडिट रिपोर्ट, बैलेंस शीट, आय-व्यय विवरण, बैंक खातों की जानकारी, खरीदी गई जमीन का ब्योरा और FCRA के तहत आए विदेशी चंदे का विवरण मांगा गया है। यह सब जानकारी तीन दिनों के भीतर देनी है। - क्या राम मंदिर ट्रस्ट को हिसाब देना कानूनी रूप से जरूरी है?
हां। ट्रस्ट का पंजीकरण इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80G के तहत है। इंडियन ट्रस्ट्स एक्ट और उत्तर प्रदेश पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट के तहत सार्वजनिक चंदे का हिसाब रखना और मांगे जाने पर देना कानूनी दायित्व है।
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