RBI का बड़ा प्लान: बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी से मोबाइल नंबर की तरह बदल सकेंगे बैंक

Pawan Modiya | Mar 30, 2026, 23:05 IST
Photograph: (the sootr)
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नई योजना के तहत बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी (Bank Account Portability) लागू हो सकती है, जिससे ग्राहक बिना अकाउंट नंबर बदले आसानी से बैंक बदल सकेंगे।

भारत की बैंकिंग व्यवस्था में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी (Bank Account Portability) लागू करने की योजना पर काम कर रहा है।



अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो बैंक ग्राहकों को बैंक बदलने के लिए नया अकाउंट नंबर लेने की जरूरत नहीं होगी। ठीक वैसे ही जैसे मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के तहत आप अपना नंबर बदले बिना टेलीकॉम कंपनी बदल सकते हैं।



इस नए सिस्टम का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को अधिक सुविधा, स्वतंत्रता और बेहतर बैंकिंग (Digital Banking) सेवाएं उपलब्ध कराना है। इससे बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी और बैंक ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने के लिए मजबूर होंगे।



बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी क्या है? (What is Bank Account Portability)

बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी (Bank Account Portability) एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें ग्राहक बिना अपना बैंक अकाउंट नंबर (Bank Account Number) बदले किसी भी दूसरे बैंक में अपना खाता ट्रांसफर कर सकते हैं।



अभी के समय में यदि कोई ग्राहक बैंक बदलना चाहता है, तो उसे नया अकाउंट खोलना पड़ता है और नया अकाउंट नंबर मिलता है। इसके बाद उसे हर जगह जैसे- सैलरी अकाउंट, EMI, SIP, बिल पेमेंट, डिजिटल पेमेंट ऐप में नई जानकारी अपडेट करनी पड़ती है। लेकिन नए सिस्टम में अकाउंट नंबर एक यूनिवर्सल पहचान (Universal Banking Identity) की तरह काम करेगा। इसका मतलब है कि ग्राहक बैंक बदल सकता है, लेकिन उसका अकाउंट नंबर वही रहेगा।



RBI का यह कदम क्यों महत्वपूर्ण है?

भारतीय बैंकिंग सिस्टम तेजी से डिजिटल हो रहा है। ऐसे में ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए RBI बैंकिंग सेवाओं को और आसान बनाना चाहता है।



इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं

  1. ग्राहकों को ज्यादा सुविधा देना
  2. बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाना
  3. डिजिटल बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाना

अगर कोई बैंक खराब सेवा दे रहा है या ज्यादा शुल्क ले रहा है, तो ग्राहक आसानी से दूसरे बैंक में जा सकेगा।



बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी के फायदे

  • अकाउंट नंबर बदले बिना बैंक बदल सकेंगे
  • EMI और SIP पर कोई असर नहीं पड़ेगा
  • बिल पेमेंट और ऑटो-डेबिट जारी रहेंगे
  • बैंकिंग सेवाएं बेहतर होंगी
  • ग्राहकों को अधिक स्वतंत्रता मिलेगी

EMI, SIP और बिल पेमेंट पर क्या होगा असर?

अक्सर लोग बैंक बदलने से इसलिए बचते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि EMI (Equated Monthly Installment), SIP (Systematic Investment Plan), ऑटो बिल पेमेंट रुक सकते हैं। लेकिन बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी सिस्टम में ऐसा नहीं होगा।



जब ग्राहक नया बैंक चुनेगा, तो सभी ऑटो-डेबिट और पेमेंट अपने आप नए बैंक में ट्रांसफर हो जाएंगे। इसका मतलब है कि किसी भी तरह का भुगतान बाधित नहीं होगा।



PaSS सिस्टम कैसे करेगा काम? (Payments Switching Service)

इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए Payments Switching Service – PaSS नाम का एक खास प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है।



PaSS सिस्टम की खासियत

  • यह एक सेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म (Centralized Platform) होगा
  • इसमें ग्राहकों के सभी ऑटो-डेबिट रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे
  • बैंक बदलते ही सभी पेमेंट नए बैंक में ट्रांसफर हो जाएंगे
  • ग्राहकों को अलग-अलग कंपनियों को जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी

इससे बैंक बदलने की प्रक्रिया बेहद आसान हो जाएगी।





ग्राहकों को क्या मिलेगा फायदा?

इस योजना से सबसे ज्यादा फायदा बैंक ग्राहकों को मिलेगा।



  1. बेहतर बैंक चुनने की आजादी
  2. कम शुल्क वाले बैंक में जाना आसान
  3. डिजिटल बैंकिंग का बेहतर अनुभव
  4. समय और मेहनत की बचत

अभी कई ग्राहक सिर्फ झंझट से बचने के लिए खराब बैंकिंग सेवा के बावजूद बैंक नहीं बदलते। लेकिन पोर्टेबिलिटी लागू होने के बाद ग्राहक आसानी से बेहतर बैंक चुन सकेंगे।



बैंकों के लिए क्यों बढ़ेगी चुनौती?

बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी लागू होने के बाद बैंकों के लिए ग्राहकों को बनाए रखना आसान नहीं होगा।



  • ग्राहकों को बेहतर सेवा देनी होगी
  • अतिरिक्त शुल्क कम करना होगा
  • डिजिटल बैंकिंग को मजबूत बनाना होगा

अगर कोई बैंक ग्राहकों को खराब सेवा देगा, तो ग्राहक तुरंत दूसरे बैंक में जा सकता है।



तकनीकी बदलाव क्या होंगे?

हालांकि अकाउंट नंबर वही रहेगा, लेकिन कुछ तकनीकी बदलाव हो सकते हैं। जैसे- IFSC कोड (IFSC Code) बदल सकता है। बैंक का नाम बदल जाएगा। शाखा की जानकारी अपडेट होगी लेकिन इन बदलावों का ग्राहक के लेन-देन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।





FAQs

1. बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी (Bank Account Portability) क्या है?

बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी एक ऐसी सुविधा है, जिसमें ग्राहक अपना बैंक अकाउंट नंबर बदले बिना एक बैंक से दूसरे बैंक (Bank Switching Facility)में खाता ट्रांसफर कर सकता है। इससे बैंक बदलना आसान हो जाएगा।



2. क्या बैंक बदलने पर EMI और SIP बंद हो जाएंगी?

नहीं। बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी सिस्टम में EMI, SIP और ऑटो बिल पेमेंट अपने आप नए बैंक में ट्रांसफर हो जाएंगे। ग्राहकों को अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं होगी।



3. RBI का बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी सिस्टम कब लागू होगा?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस योजना पर काम कर रहा है। इसे लागू करने के लिए Payments Switching Service (PaSS) प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसे लागू किया जा सकता है।



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