देश के परिवारों पर बढ़ा कर्ज का बोझ, हर 100 रुपए की नई संपत्ति पर 50 रुपए कर्ज, एक साल में 88 हजार करोड़ घटी बचत

Kaushiki | Oct 28, 2026, 09:25 IST
फाइनेंशियल एसेट्स बढ़े, फिर भी क्यों घटी देश के परिवारों की नेट सेविंग्स
RBI bulletin data shows families added 12.8 percent more financial assets in 2025-26, but household debt India rose 36.7 percent.
देश में परिवारों की बचत घटी है। इसकी बड़ी वजह तेजी से बढ़ता कर्ज है। RBI के ताजा आंकड़े यही तस्वीर दिखाते हैं। आरबीआई के मुताबिक, 2025-26 में परिवारों की शुद्ध वित्तीय बचत 21.69 लाख करोड़ रुपए रह गई। एक साल पहले यह बचत 22.57 लाख करोड़ रुपए थी। यानी एक साल में 88 हजार करोड़ रुपए की गिरावट आई।

परिवारों के हाउसहोल्ड सेविंग्स का हिसाब सीधा है। परिवार जितनी फाइनेंसियल एसेट्स जोड़ते हैं, उसमें से नया कर्ज घटाया जाता है। जो बचता है, वही शुद्ध वित्तीय बचत (Net financial savings) कहलाती है। परिवारों की बचत घटी, जबकि बैंक कर्ज और एनबीएफसी से कर्ज दोनों बढ़े। आइए जानें पूरे आंकड़े और कर्ज बढ़ने की संभावित वजहें।



नेट फाइनेंसियल सेविंग्स क्यों घटी?

आरबीआई (RBI - Reserve Bank of India) के मुताबिक बचत घटने का गणित आसान है। 2024-25 में हर 100 रुपए की नई संपत्ति पर करीब 41 रुपए कर्ज जुड़ा। 2025-26 में यह आंकड़ा 50 रुपए हो गया। एक परिवार 100 रुपए जोड़ रहा है। उसी पर 50 रुपए का नया कर्ज भी चढ़ रहा है।



इसी वजह से ज्यादा निवेश के बावजूद शुद्ध बचत घट गई। जीडीपी (GDP - Gross Domestic Product) के अनुपात में यह बचत 7.1 फीसदी से घटकर 6.3 फीसदी रह गई। नए कर्ज का अनुपात 4.9 फीसदी से बढ़कर 6.2 फीसदी हो गया। यानी घरेलू कर्ज बढ़ा है। Household Debt India की रफ्तार संपत्ति से कहीं तेज है। बता दें कि 2025-26 के आंकड़े प्रारंभिक अनुमान हैं। इसलिए अंतिम आंकड़ों में थोड़ा बदलाव संभव है।



बैंक कर्ज कितना बढ़ा?

परिवारों के बैंक कर्ज में 2025-26 के दौरान 16.17 लाख करोड़ रुपए जुड़े। पिछले साल यह रकम 12.35 लाख करोड़ रुपए थी। यानी नए बैंक कर्ज में करीब 31 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह रफ्तार वित्तीय संपत्ति की बढ़त से करीब ढाई गुना है। संपत्ति 12.8 फीसदी बढ़ी, जबकि बैंकों से नया कर्ज करीब 31 फीसदी। लेकिन बात सिर्फ बैंकों तक सीमित नहीं है।



एनबीएफसी से कर्ज करीब दोगुना

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी यानी एनबीएफसी (NBFC - Non-Banking Financial Company) से लिया कर्ज लगभग दोगुना हो गया। नया NBFC loan 2.52 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 4.85 लाख करोड़ रुपए पहुंचा। आरबीआई के मुताबिक एनबीएफसी से परिवारों के कर्ज में 93 फीसदी बढ़त रही। यह बैंकों के मुकाबले कहीं तेज रफ्तार है।



गोल्ड लोन की भूमिका हो सकती है?

विशेषज्ञ के मुताबिक इस बढ़त के पीछे gold loan की भूमिका हो सकती है। यानी सोने के गहने गिरवी रखकर लिया कर्ज। रिपोर्ट इसे पक्का कारण नहीं बताती।



शेयर बाजार निवेश से निकासी

परिवारों ने बैंक जमा और म्यूचुअल फंड निवेश में ज्यादा पैसा लगाया। बैंक और गैर-बैंक जमा में 15.32 लाख करोड़ रुपए जुड़े। यह पिछले साल से 22.1 फीसदी ज्यादा है।



छोटी बचत योजनाओं में 48 फीसदी उछाल

पीपीएफ (PPF - Public Provident Fund) को छोड़कर छोटी बचत योजनाओं में निवेश 48 फीसदी बढ़ा। यह 3.45 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया।



सीधे शेयरों से 79 हजार 890 करोड़ निकले

लेकिन सीधे शेयर बाजार निवेश का रुख पलट गया। परिवारों ने शुद्ध 40,353 करोड़ रुपए लगाने के बजाय 79,890 करोड़ रुपए निकाले।



कर्ज बढ़ना सिर्फ तंगी नहीं

विजय कुप्पा के मुताबिक, कर्ज तेजी से बढ़ने की तीन वजहें हो सकती हैं। पहली, घर, गाड़ी या कारोबार के लिए ज्यादा कर्ज लेना। दूसरी, कर्ज का आसानी से मिलना। तीसरी, ज्यादा खर्च या मकान-जमीन में पैसा लगाने से बचत पर दबाव। उनके मुताबिक आय, ब्याज दर, किस्त और कर्ज अवधि के आंकड़े भी देखने होंगे। तभी साफ होगा कि कर्ज की रफ्तार चिंता की बात है या नहीं।



आंकड़ों से क्या समझें?

एक साल में बैंक जमा, छोटी बचत और म्यूचुअल फंड निवेश में पैसा बढ़ा। फिर भी कर्ज ने बचत को पीछे छोड़ दिया। संपत्ति और कर्ज के बीच का यही फासला शुद्ध वित्तीय बचत तय करता है। अब सवाल यह है कि बढ़ते कर्ज का परिवारों पर असर कैसा रहेगा? इसका जवाब आने वाले आंकड़ों से मिलेगा।



यह खबर क्यों जरूरी है

परिवार की बचत मुश्किल वक्त का सहारा होती है। यह रिपोर्ट बताती है कि निवेश बढ़ने के बाद भी बचत घट सकती है, अगर कर्ज उससे तेज बढ़े। हर 100 रुपए की नई संपत्ति पर अब 50 रुपए का कर्ज जुड़ रहा है। आम परिवार के लिए अपनी आय, किस्त और ब्याज का हिसाब रखना जरूरी है। कर्ज हमेशा बुरा नहीं होता, पर उसकी रफ्तार पर नजर रखना जरूरी है।



FAQs:



  1. 2025-26 में परिवारों की शुद्ध वित्तीय बचत कितनी घटी?
    शुद्ध वित्तीय बचत करीब 4 फीसदी घटी। यह 22.57 लाख करोड़ रुपए से घटकर 21.69 लाख करोड़ रुपए रह गई। यानी एक साल में 88 हजार करोड़ रुपए की कमी आई।
  2. परिवारों का कर्ज उनकी संपत्ति से तेज क्यों बढ़ा?
    आरबीआई के आंकड़ों में कर्ज 36.7 फीसदी बढ़ा, जबकि वित्तीय संपत्ति 12.8 फीसदी। विशेषज्ञ के मुताबिक घर, गाड़ी या कारोबार के लिए ज्यादा कर्ज और आसानी से मिलता कर्ज वजह हो सकते हैं। इसे सिर्फ तंगी का संकेत मानना सही नहीं होगा।
  3. एनबीएफसी से परिवारों का नया कर्ज कितना बढ़ा?
    यह 2.52 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 4.85 लाख करोड़ रुपए हो गया। यानी कर्ज लगभग दोगुना हुआ। विशेषज्ञ के मुताबिक इसमें गोल्ड लोन की भूमिका हो सकती है।
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