1 अप्रैल से बदल जाएंगे ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के नियम, जानें RBI Digital Payment Rule

Manya Jain | Mar 24, 2026, 12:04 IST
RBI Digital Payment Rule
1 अप्रैल से बदल जाएंगे ऑनलाइन पेमेंट के नियम। जानें क्या है टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) और कैसे यह आपके यूपीआई और नेट बैंकिंग ट्रांजेक्शन को फ्रॉड से सुरक्षित बनाएगा।

भारत में अब गांव-गांव तक डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल बढ़ गया है। यूपीआई और नेट बैंकिंग का उपयोग अब बहुत ही आसान हो गया है। लेकिन इसके साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी काफी बढ़े हैं। इसी खतरे को देखते हुए आरबीआई नए नियम लागू कर रहा है।



एक अप्रैल 2026 से ऑनलाइन पेमेंट के तरीके पूरी तरह बदल जाएंगे। अब हर डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन बहुत जरूरी होगा। इसके दिशा-निर्देश सितंबर 2025 में ही सभी बैंकों को दे दिए थे। यह कदम ग्राहकों के पैसों को अधिक सुरक्षित बनाने और फिशिंग जैसे साइबर हमलों से बचाने के लिए उठाया गया है।



क्या है टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन?

वर्तमान में, अधिकांश ऑनलाइन लेनदेन के लिए हम केवल ओटीपी (OTP) आधारित सर्टिफिकेशन का उपयोग करते हैं। लेकिन नए नियमों के तहत, अब आपको लेनदेन पूरा करने के लिए सुरक्षा के दो अलग-अलग स्तरों (Factors) से गुजरना होगा।



ऑथेंटिकेशन के लिए ऑप्शन

आरबीआई ने सर्टिफिकेशन के लिए किसी एक विशिष्ट तरीके को थोपा नहीं है। यूजर्स नीचे दिए गए विकल्पों में से किन्हीं भी दो कारकों (Two Factors) को चुन सकते हैं।



  • पासवर्ड या पासफ्रेस (Password/Passphrase): कुछ ऐसा जो आपको याद हो।
  • सिम आधारित ओटीपी (Sim-based OTP): आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आने वाला कोड।
  • बायोमेट्रिक्स (Biometrics): फिंगरप्रिंट (Fingerprint) या फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम(Facial Recognition)।
  • हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर टोकन (Hardware/Software Token): डिवाइस आधारित सुरक्षा कोड।
  • कार्ड आधारित सर्टिफिकेशन (Card-based Authentication): चिप या पिन का उपयोग।

नए नियमों की जरूरत क्यों ?

अभी तक उपयोग किए जा रहे केवल ओटीपी आधारित सिस्टम में कई सुरक्षा खामियां देखी गई हैं। साइबर अपराधी सिम स्वैप स्कैम (Sim Swap Scam), मालवेयर अटैक (Malware Attack) और फिशिंग (Phishing) के जरिए ग्राहकों के खातों में सेंध लगा रहे थे।



कई बार ओटीपी की डिलीवरी में देरी होने के कारण भी ट्रांजेक्शन फेल हो जाते थे। टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन इन सभी समस्याओं का एक मजबूत समाधान देता है, जिससे ट्रांजेक्शन की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है।



ग्राहकों और बैंकों के लिए निर्देश

आरबीआई के ये निर्देश सभी पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स, बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं (NBFCs) पर लागू होंगे।



1. नुकसान की भरपाई (Compensation for Loss)

यदि कोई बैंक या जारीकर्ता (Issuer) इन नए सुरक्षा निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है और उस दौरान ग्राहक के साथ कोई धोखाधड़ी होती है, तो नुकसान की पूरी भरपाई बैंक को करनी होगी। यह नियम ग्राहकों को मानसिक शांति प्रदान करता है।



rule change from 1 april


2. डेटा सुरक्षा (Data Privacy)

जारीकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 (डिजीटल बैंकिंग) के सभी प्रावधानों का कड़ाई से पालन करें। ग्राहकों की निजी जानकारी और बायोमेट्रिक डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहना चाहिए।



3. ग्राहकों को चुनने की आजादी (Freedom of Choice)

सेंट्रल बैंक ने निर्देश दिया है कि ऑथेंटिकेशन के तरीकों को चुनने की सुविधा ग्राहकों को दी जानी चाहिए। यानी आप तय कर सकते हैं कि आप पासवर्ड के साथ फिंगरप्रिंट का उपयोग करना चाहते हैं या ओटीपी के साथ फेस लॉक का।



क्रॉस बॉर्डर ट्रांजेक्शन के लिए क्या हैं नियम?

फिलहाल, 1 अप्रैल से लागू होने वाले ये नियम घरेलू डिजिटल पेमेंट (Domestic Payments) पर प्रभावी होंगे। क्रॉस बॉर्डर या अंतरराष्ट्रीय लेनदेन (bank transactions) पर यह तुरंत लागू नहीं होगा।



cross border transaction


  • 1 अक्टूबर 2026 तक: बैंकों को एक ऐसा सिस्टम विकसित करना होगा जो विदेशी व्यापारियों द्वारा किए गए 'कार्ड नॉट प्रेजेंट' (CNP) ट्रांजेक्शन को वेरीफाई कर सके।
  • जोखिम आधारित सिस्टम: कार्ड नेटवर्क के साथ बैंक आईडेंटिफिकेशन नंबर (BIN) रजिस्टर करना और जोखिम आधारित वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करना अनिवार्य होगा।

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