अब 2000 रुपए से ऊपर के UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा चार्ज, सरकार ने अफवाहों पर लगाया विराम
समझें क्या है पूरा मामला
- सरकार ने यूपीआई को लेकर बड़ा स्पष्टीकरण दिया है।
- यूजर्स से किसी भी तरह का लेन-देन शुल्क नहीं लिया जाएगा।
- पी2पी यानी व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले लेन-देन हमेशा फ्री रहेंगे।
- व्यापारियों के लिए भी अधिकांश लेन-देन निःशुल्क रहेंगे।
- यह स्पष्टीकरण पीएसएस एक्ट में हुए संशोधन को लेकर फैली भ्रांतियों के बाद आया है।
क्यों जरूरी हुआ यह स्पष्टीकरण
भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में हाल ही में संशोधन हुआ था। इसे लेकर कुछ लोगों ने गलत व्याख्या शुरू कर दी। कई जगह यह अफवाह फैली कि आम यूजर्स से भी शुल्क लिया जा सकता है।
सरकार ने इस भ्रम को पूरी तरह गलत बताया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह संशोधन यूपीआई को मजबूत बनाने के लिए है। इसका मकसद शुल्क लगाना बिल्कुल नहीं है।
आखिर क्या है पूरा मामला
सरकार 2000 रुपए से ज्यादा के UPI मर्चेंट पेमेंट पर चार्ज लगाने पर विचार कर रही थी। यह चार्ज मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR कहलाता है। इसे बैंक और दुकानदार, ग्राहक नहीं, आपस में तय करेंगे। छोटे दुकानदार और आम लोगों के बीच पेमेंट पर कोई असर नहीं होगा। संसद में इससे जुड़ा एक बिल पहले ही पेश किया है।
केंद्र सरकार बड़े कारोबारियों से होने वाले UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR – Merchant Discount Rate) फिर से लगाने पर विचार कर रही है। यह चार्ज सिर्फ 2000 रुपए से ऊपर के बिजनेस ट्रांजैक्शन पर लगेगा।
व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर इससे बाहर रहेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, यह चार्ज 0.25 से 0.4 प्रतिशत के बीच हो सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में इसे 0.5 प्रतिशत तक बताया गया है। अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
यूजर्स के लिए क्या रहेगा नियम
सरकार ने साफ कहा है कि भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को कोई शुल्क नहीं देना होगा। सभी पर्सन-टू-पर्सन यानी पी2पी लेन-देन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
इसका मतलब है कि आम आदमी जो रोजमर्रा में यूपीआई से भुगतान करता है, उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दुकानदार को पैसे भेजना हो या दोस्त को, दोनों तरह के लेन-देन पहले जैसे ही रहेंगे।
व्यापारियों के लिए क्या बदलेगा
व्यापारियों के लिए भी ज्यादातर लेन-देन निःशुल्क ही रहेंगे। यदि किसी सीमित मामलों में एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू होता भी है, तो वह बहुत मामूली दर पर होगा।
सरकार के मुताबिक यह शुल्क डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले एमडीआर से काफी कम होगा। साथ ही यह हर व्यापारी लेन-देन पर नहीं, बल्कि एक निश्चित सीमा से ऊपर के कुछ चुनिंदा मामलों में ही लागू हो सकता है।
मर्चेंट पेमेंट क्या है
मर्चेंट पेमेंट (Merchant Payment) का मतलब होता है जब आप किसी दुकान, शोरूम या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (जैसे Amazon, Zomato) से कोई सामान या सर्विस खरीदते हैं। उसके बदले डिजिटल तरीके से (जैसे UPI, कार्ड या QR कोड स्कैन करके) पैसे ट्रांसफर करते हैं।
इस प्रोसेस में पैसे किसी आम इंसान के पर्सनल अकाउंट में जाने के बजाय सीधे उस दुकानदार या कंपनी के बिजनेस यानी 'मर्चेंट अकाउंट' में जमा होते हैं। इजी शब्दों में, किसी भी बिजनेसमैन या वेंडर को अपनी खरीदारी के बदले किया गया डिजिटल पेमेंट ही मर्चेंट पेमेंट कहलाता है।
संसद में पेश हुआ बिल
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल पेश किया था। इस बिल का मकसद बैंकों और पेमेंट कंपनियों पर लगी वह रोक हटाना है, जो उन्हें नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड पर MDR लेने से रोकती है। अधिकारियों ने साफ किया है कि अभी इसे कब लागू करना है, यह तय नहीं हुआ है।
पहले क्यों हटाया गया था चार्ज
जनवरी 2020 में सरकार ने UPI और रुपे डेबिट कार्ड पेमेंट पर लगने वाला MDR पूरी तरह हटा दिया था। मकसद था डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना। तब से मर्चेंट को UPI पर कोई चार्ज नहीं देना पड़ता। इसकी भरपाई के लिए सरकार बैंकों को एक इंसेंटिव स्कीम के तहत भुगतान करती है। साल 2023-24 में इस स्कीम पर सरकार ने 3,631 करोड़ रुपये खर्च किए थे।
क्रेडिट कार्ड पर पहले से लगता है चार्ज
क्रेडिट और डेबिट कार्ड पेमेंट पर पहले से MDR लगता है। ज्यादातर दुकानदार यह चार्ज ग्राहकों से नहीं वसूलते। उद्योग के जानकारों का कहना है कि UPI में फंडिंग कॉस्ट नहीं होती, इसलिए चार्ज पर एक सीमा तय करना ठीक रहेगा।
आम लोगों के लिए क्या मायने
अधिकारियों ने साफ किया है कि आम ग्राहकों से UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। यह चार्ज सिर्फ बड़े मर्चेंट और बैंक के बीच का मामला रहेगा। हालांकि कुछ दुकानदार इसका असर कीमतों में जोड़ सकते हैं, यह अभी साफ नहीं है।
गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल में एक अलग खबर आई थी कि UPI पेमेंट पर GST लगाने की तैयारी है। वित्त मंत्रालय ने उस खबर को पूरी तरह गलत बताया था। मौजूदा MDR प्रस्ताव उस खबर से अलग है।
इस प्रस्ताव में छोटे व्यापारियों का खास ध्यान रखा गया है। सालाना डेढ़ करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाले दुकानदारों को यह चार्ज नहीं देना होगा। यह छूट ट्रांजैक्शन के अमाउंट पर निर्भर नहीं करेगी। दूध, सब्जी, ऑटो या टैक्सी जैसे रोजमर्रा के पेमेंट पर भी असर की संभावना कम है।
क्या बदल सकता है UPI पेमेंट तरीका
ऑनलाइन पेमेंट को सुरक्षित बनाने के लिए नए बदलाव की तैयारी है। संदिग्ध लेनदेन होने पर UPI ऐप स्क्रीन पर एक पॉप-अप दिखाएगा। ऐप आपसे पूछेगा कि क्या आप वास्तव में ये पेमेंट करना चाहते हैं?
अगर आप Yes चुनते हैं तो पैसा तुरंत ट्रांसफर हो जाएगा। अगर आप No चुनते हैं तो पेमेंट तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। अगर आप कोई जवाब नहीं देते तो पैसा एक घंटे बाद पहुंचेगा।
बैंकों ने साफ किया है कि ये नियम हर पेमेंट पर नहीं होगा। इसे केवल बहुत अधिक जोखिम वाले ट्रांजैक्शन पर लागू किया जाएगा। जैसे रात दो बजे अचानक कोई बड़ा पेमेंट किया जा रहा हो।
अगर आप किसी बिल्कुल नए व्यक्ति को पहली बार पैसे भेज रहे हों। जिस खाते में पैसे जा रहे हैं वह हाल ही में खोला गया हो। ऐसी स्थिति में ही ऐप आपसे दोबारा कंफर्मेशन मांगेगा।
RBI क्यों ला रहा है यह नया प्रस्ताव
हाल ही में RBI ने डिजिटल फ्रॉड रोकने पर एक पेपर जारी किया था। इसमें संदिग्ध ट्रांजैक्शन में थोड़ी देरी करने का सुझाव शामिल था। हाल ही में हुई बैठकों में भी इस पर गंभीर चर्चा हुई है। वर्ष 2021 में डिजिटल फ्रॉड के 2.6 लाख मामले सामने आए थे।
साल 2025 तक यह संख्या बढ़कर 28 लाख तक पहुंच चुकी है। धोखाधड़ी की रकम 551 करोड़ से बढ़कर 22 हजार 931 करोड़ रुपए हो गई। इसी बड़ी चपत को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने जरूरी हैं।
बैंक हर पेमेंट में देरी क्यों नहीं चाहते
बैंकों का मानना है कि हर पेमेंट में देरी करना सही नहीं होगा। अगर हर बड़े पेमेंट में एक घंटा लगेगा तो लोग परेशान होंगे। UPI की सबसे बड़ी ताकत तुरंत पैसा भेजना ही मानी जाती है।
देरी होने पर लोग फिर से कैस या नकद लेनदेन करने लगेंगे। इससे देश के डिजिटल पेमेंट अभियान को बड़ा झटका लग सकता है। इसीलिए बैंक केवल जोखिम वाले खातों पर ही सुरक्षा चाहते हैं।
NPCI की क्या है इस पर अलग राय
UPI का कण्ट्रोल (UPI पेमेंट सिस्टम में बदलाव)करने वाली संस्था NPCI (National Payments Corporation of India) की राय थोड़ी अलग है। NPCI का मानना है कि भारतीय अब बहुत तेज पेमेंट के आदी हैं। दूसरे देशों की तरह पेमेंट में देरी करना भारत के लिए सही नहीं।
फर्जी खातों और निवेश फ्रॉड को केवल देरी से नहीं रोका जा सकता। इसके लिए मजबूत तकनीक और तुरंत खाते फ्रीज करने की जरूरत है। NPCI ग्राहकों के अनुभव को बिना खराब किए सुरक्षा चाहती है।
FAQ
- RBI का नया UPI पेमेंट नियम क्या है?
RBI के नए प्रस्ताव के मुताबिक, यदि आप किसी संदिग्ध या बहुत अधिक जोखिम वाले खाते में पैसे भेजते हैं, तो UPI ऐप आपसे दोबारा पुष्टि मांगेगा। अगर आप जवाब नहीं देते हैं, तो पैसा एक घंटे बाद ट्रांसफर होगा। - क्या यह एक घंटे की देरी वाला नियम हर UPI पेमेंट पर लागू होगा?
नहीं, यह नियम हर पेमेंट पर लागू नहीं होगा। बैंक इसे केवल रात के समय अचानक बड़े पेमेंट, नए खाते में पहली बार ट्रांजैक्शन या संदिग्ध खातों में पैसे भेजने पर ही लागू करने का सुझाव दे रहे हैं। - RBI यह नया सुरक्षा नियम क्यों ला रहा है?
देश में ऑनलाइन फ्रॉड के मामले 2021 में 2.6 लाख से बढ़कर 2025 में 28 लाख हो गए हैं। आम नागरिकों को साइबर ठगी से बचाने और डिजिटल लेनदेन को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
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