दिवाली से पहले RBI का बड़ा झटका: रेपो रेट बढ़कर हुआ 5.5%, अब इतनी बढ़ जाएगी आपकी EMI
आरबीआई ने बढ़ाया रेपो रेट
दिवाली का त्योहार सिर पर है। लोग अपने सपनों का घर या नई गाड़ी खरीदने की तैयारी में जुटे हैं। दूसरी ओर त्योहारों की इस रौनक के बीच Reserve Bank of India (RBI) ने आम आदमी को बड़ा झटका दे दिया है।
केंद्रीय बैंक ने करीब 4 साल के लंबे अंतराल के बाद रेपो रेट (Repo Rate) में बढ़ोतरी कर दी है। इस बदलाव के बाद अब रेपो रेट बढ़कर 5.5% पर पहुंच गया है।
सीधे शब्दों में कहें तो सस्ता कर्ज मिलने का सुनहरा दौर अब खत्म हो गया है। आप इस त्योहारी सीजन में होम लोन या कार लोन लेने की योजना बना रहे थे, तो अब आपको हर महीने पहले से ज्यादा EMI चुकानी होगी।
हालांकि जो लोग बैंकों में बचत योजनाओं पर भरोसा करते हैं, उनके लिए यह फैसला एक तोहफा लेकर आया है। अब बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी कराने पर ग्राहकों को पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मुनाफा मिलेगा।
क्या होता है रेपो रेट?
रेपो रेट (Repo Rate) असल में वह तय ब्याज दर होती है, जिस पर RBI बाकी कमर्शियल बैंकों को कम समय के लिए कर्ज देता है। जब बैंकों को ही आरबीआई से महंगी दरों पर कर्ज मिलेगा, तो वे अपनी जेब से नुकसान नहीं उठाएंगे। इसलिए बैंक भी अपने ग्राहकों के लिए होम लोन, पर्सनल लोन और गाड़ी के लोन की ब्याज दरें तुरंत बढ़ा देते हैं।
आपकी जेब पर कितना असर?
अगर बैंक की ब्याज दरें 7.5% से बढ़कर 7.75% हो जाती हैं, तो आपकी हर महीने की किस्त और कुल ब्याज पर सीधा असर पड़ेगा। इसे अलग-अलग लोन अमाउंट के हिसाब से समझ सकते हैं।
- 20 लाख रुपए का लोन (20 साल के लिए): पहले इस लोन पर 16 हजार 112 रुपए की ईएमआई बनती थी। अब यह बढ़कर 16 हजार 419 रुपए हो गई है। यानी आपको हर महीने 307 रुपए अतिरिक्त देने होंगे। पूरे 20 साल के दौरान आपको कुल 73 हजार 706 रुपए ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ेगा।
- 30 लाख रुपए का लोन (20 साल के लिए): पुरानी ईएमआई 24 हजार 168 रुपए थी, जो अब बढ़कर 24 हजार 628 रुपए हो गई है। इसमें हर महीने 461 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। इस तरह पूरे लोन टेन्योर में कुल 1.10 लाख रुपए ज्यादा ब्याज लगेगा।
- 50 लाख रुपए का लोन (25 साल के लिए): पहले हर महीने की किस्त 36 हजार 950 रुपए आती थी, जो अब बढ़कर 37 हजार 766 रुपए हो गई है। इसका मतलब है कि हर महीने 817 रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इससे 25 साल में कुल 2.45 लाख रुपए तक ज्यादा ब्याज भरना होगा।
महंगे कर्ज का बोझ कैसे हल्का करें?
कर्ज महंगा होने पर आपको घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। बैंक बाजार के सीईओ आदिल शेट्टी का कहना है कि जो ग्राहक समझदारी दिखाते हुए अपनी ईएमआई (EMI) बढ़ाएगा, उसे सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा।
ब्याज का भार कम करने के लिए आप ये आसान रास्ते चुन सकते हैं।
- किस्त में थोड़ी बढ़ोतरी करें: अगर आपकी आर्थिक स्थिति इजाजत देती है, तो हर महीने अपनी ईएमआई (EMI) में थोड़ा सा इजाफा कर लें। इससे आपका लोन तय समय से पहले खत्म हो जाएगा।
- पार्ट-पेमेंट (Part Payment) का सहारा लें: हर साल अपनी बचत से लोन की मूल रकम का कुछ हिस्सा एकमुश्त चुका दें। ऐसा करने से कुल लगने वाला ब्याज काफी कम हो जाता है।
- बैंक से सही जानकारी लें: अपने बैंक से तुरंत यह पता कर लें कि दरें बढ़ने पर वे सिर्फ आपकी ईएमआई बढ़ा रहे हैं, या लोन की समयसीमा भी बढ़ा रहे हैं, ताकि आप अपने बजट की सही योजना बना सकें।
इन बड़े बैंकों ने तुरंत बढ़ा दीं अपनी ब्याज दरें
आरबीआई (RBI) के इस कदम के बाद कई बैंकों ने 8 अप्रैल से ही अपनी नई ब्याज दरें लागू कर दी हैं।
- एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank): यहां पुरानी ब्याज दर 8.10% थी, जो अब बढ़कर 8.35% हो गई है।
- इंडियन बैंक (Indian Bank): पहले ब्याज दर 7.95% थी, जिसे बढ़ाकर अब 8.20% कर दिया गया है।
- पंजाब नेशनल बैंक (PNB): पुरानी दर 7.90% थी, जो अब बढ़कर 8.15% पहुंच गई है।
- बैंक ऑफ इंडिया (BOI): पहले दर 8.10% थी, जो अब नई बढ़ोतरी के बाद 8.35% हो गई है।
- ओबीसी (OBC): पुरानी ब्याज दर 8.10% थी, जिसे बढ़ाकर 8.35% कर दिया गया है।
इसके साथ ही, ब्याज फॉरवर्ड में 12 से 60 आधार अंक तक बदलाव आने की वजह से बैंकों ने एफडी की दरों में भी 0.15% से लेकर 0.40% तक की बढ़ोतरी कर दी है।
घर खरीदारों पर दोहरी मार
दिवाली पर नया घर खरीदने का प्लान बना रहे परिवारों के लिए चिंता बढ़ सकती है। रियल एस्टेट कंसल्टेंट फर्म एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने बताया कि जुलाई से सितंबर के बीच देश के 7 बड़े शहरों में 1 लाख 220 घर बिके। यह बिक्री पिछले साल के मुकाबले 3% ज्यादा रही। वहीं पिछली तिमाही की तुलना में बिक्री 10% बढ़ी।
इन बिके घरों में किफायती घरों की हिस्सेदारी सिर्फ 16% रही। वहीं शहरों में घरों की औसत कीमतें पहले ही 7% तक बढ़ चुकी हैं। ऐसे में ब्याज दरों में हुई नई बढ़ोतरी से घर खरीदने वालों का बजट बिगड़ सकता है। इसका असर उन परिवारों पर भी पड़ सकता है जो इस फेस्टिव सीजन में नया घर लेने की तैयारी कर रहे थे।