CJP के बाद GenZ की नई मुहिम, सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल आरक्षण हटाओ आंदोलन

Manya Jain | Jul 27, 2026, 18:45 IST
reservation hatao andolan viral instagram
सोशल मीडिया पर 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' तेजी से वायरल हो रहा है। इंस्टाग्राम पर इसे 46 लाख से अधिक फॉलोअर्स मिले। सीजेपी के प्रदर्शनों के बाद युवाओं का यह अभियान चर्चा में आया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सोशल मीडिया पर एक नया अभियान तेजी से फैल रहा है।
  • इसका नाम आरक्षण हटाओ आंदोलन (Reservation Hatao Andolan) है।
  • यह ग्रुप आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ है।
  • कम समय में इसे इंस्टाग्राम पर 46 लाख फॉलोअर्स मिल चुके हैं।
  • यह (CJP) के नेतृत्व वाले जेनजी प्रदर्शनों के बाद सामने आया है।

संगठन ने खुद को बताया अराजनीतिक

आरक्षण हटाओ आंदोलन का इंस्टाग्राम अकाउंट यूजरनेम reservationhataomovement से चलता है। इस अकाउंट पर अब तक 109 पोस्ट डाली जा चुकी हैं। यह अकाउंट सिर्फ भारतीय सेना को फॉलो करता है। प्रोफाइल में लिखा है कि यह अभियान उन नागरिकों का समर्थन है जो मानते हैं कि सुधार की आवाज उठनी चाहिए।



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समूह का नारा डॉ. भीमराव आंबेडकर के "शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो" से प्रेरित बताया गया है। साथ ही अकाउंट पर हिंदी में लिखा गया है, "सारी जाति एक समान, मेरा बस ये देश महान।" पोस्ट के अंत में "जय हिंद" भी लिखा जाता है।



किसी पार्टी से जुड़ाव नहीं होने का दावा

समूह ने अपनी एक पोस्ट में साफ किया कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है। पोस्ट में लिखा गया कि कई नागरिकों की तरह उन्हें भी उम्मीद थी कि सरकार बदलने से आरक्षण व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा। समूह के मुताबिक भाजपा भी यह बदलाव नहीं ला पाई, बल्कि आरक्षण नीति और आगे बढ़ती गई।



समूह ने कहा कि यह मुद्दा किसी पार्टी की राजनीति तक सीमित नहीं किया जा सकता। उनका फोकस नीति पर है, पार्टी पर नहीं। समूह ने इसे नागरिकों के नेतृत्व वाला आंदोलन बताया, जो हर राजनीतिक दल से स्वतंत्र है।



समूह की मुख्य मांग क्या है

आरक्षण हटाओ आंदोलन ने अपनी नीति संबंधी मांग भी सामने रखी है। समूह के मुताबिक अगर जातिगत भेदभाव खत्म करना है, तो सरकार को रोजमर्रा के सार्वजनिक जीवन में जाति की पहचान मांगना या मानना बंद कर देना चाहिए।





समूह ने कहा कि किसी को भी ब्राह्मण, जाट, गुर्जर, एससी या एसटी के तौर पर पहचाना नहीं जाना चाहिए। उन्होंने जाति दिखाने को गैरकानूनी बनाने की मांग की है।



समूह का कहना है कि सरकारी फॉर्म, शिक्षा में दाखिले, नौकरी के आवेदन या किसी भी सार्वजनिक प्रक्रिया में नागरिकों को अपनी जाति बताने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। समूह का लक्ष्य "एक राष्ट्र, एक पहचान, भारतीय" है। इसका नारा है, "आरक्षण हटाओ, जातिवाद हटाओ।"



CJP प्रदर्शन के बाद कई नए अभियान

यह सिर्फ एक अभियान नहीं है। कॉकरोच जनता पार्टी के महीनेभर चले प्रदर्शन की सफलता के बाद सोशल मीडिया पर लगातार नए अभियान सामने आ रहे हैं। 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लंबे छात्र प्रदर्शनों के बाद इस्तीफा दिया था। इसके एक दिन बाद ही E20 जनता पार्टी नाम का एक और अभियान सामने आया।



इस नए अभियान ने CJP आंदोलन जैसी ही भाषा, ब्रांडिंग और प्रदर्शन शैली अपनाई है। यह अभियान मांग कर रहा है कि उपभोक्ताओं को इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के साथ 100 प्रतिशत पेट्रोल खरीदने का विकल्प भी मिलना चाहिए। इसने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की है।



दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स ने E20 पेट्रोल के खिलाफ 4 अगस्त को संसद तक मार्च की घोषणा की है। इससे इस अभियान को और समर्थन मिल रहा है।



CJP आंदोलन कैसे खत्म हुआ

कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन 49 दिन बाद शनिवार को समाप्त हुआ। समूह ने कहा कि केंद्र सरकार ने उनकी मुख्य मांगें मान ली हैं। इनमें आंदोलन का इस्तीफा और आगे सुधार के आश्वासन शामिल हैं। नई दिल्ली में हुई बातचीत के बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन तुरंत रोक दिया। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्वक घर लौटने की अपील की।



FAQ

  1. आरक्षण हटाओ आंदोलन क्या है?
    यह एक सोशल मीडिया आधारित अभियान है जो आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ है। इसे इंस्टाग्राम पर 46 लाख फॉलोअर्स मिल चुके हैं। समूह खुद को नागरिक-नेतृत्व वाला और अराजनीतिक बताता है।
  2. इस आरक्षण हटाओ आंदोलन की मुख्य मांग क्या है?
    समूह चाहता है कि सरकारी दस्तावेजों और प्रक्रियाओं में जाति की पहचान मांगना बंद किया जाए। इसका नारा है, "आरक्षण हटाओ, जातिवाद हटाओ।" समूह का लक्ष्य एक समान राष्ट्रीय पहचान है।
  3. यह अभियान कब और कैसे शुरू हुआ?
    यह अभियान कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व वाले NEET विरोधी प्रदर्शनों के बाद सामने आया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इस तरह के कई अभियान सोशल मीडिया पर सक्रिय हुए हैं।

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