रिटायरमेंट पर मोहन भागवत ने रखी अपनी बात, कहा- न रिटायर होऊंगा, न किसी को होने को कहूंगा

Dablu Kumar | Aug 29, 2025, 08:30 IST
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संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर रिटायरमेंट पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट होने के लिए किसी भी तरह की जल्दी की जरूरत नहीं है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूरे होने पर दिल्ली में तीन दिवसीय कार्यक्रम हुआ। इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत भी शामिल हुए और उन्होंने संबोधित किया। कार्यक्रम के तीसरे दिन यानी 28 अगस्त को मोहन भागवत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई सवालों के जवाब दिए। इस मौके पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने यह साफ किया कि वह न तो 75 वर्ष की आयु में रिटायर होंगे, न ही किसी अन्य व्यक्ति को रिटायर होने के लिए कहेंगे। यह बयान उन्होंने कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए दिया।



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रिटायरमेंट पर सरसंघचालक ने दिया जवाब

मोहन भागवत ने कहा कि मोरोपंत पिंगले ने उस समय कहा था कि जब आपने मुझे यह शॉल दिया है, तो इसका मतलब है कि आपकी उम्र अब अधिक हो गई है और अब आपको एक कुर्सी पर बैठकर देखना चाहिए कि क्या हो रहा है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि ऐसा कभी नहीं कहा कि मैं रिटायर हो जाउंगा या किसी को रिटायर हो जाना चाहिए।



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रिटायरमेंट बेनिफिट नहीं होता- मोहन भागवत

संघ शताब्दी परसरसंघचालक ने यह भी स्पष्ट किया कि संघ में हम सभी स्वयंसेवक हैं। अगर वह 80 वर्ष के हो जाएं और संघ उन्हें कहे कि शाखा चलाने जाएं, तो वह बिना किसी संकोच के जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह यह नहीं कह सकते कि वे अब 75 वर्ष से अधिक के हो गए हैं और अब रिटायरमेंट लाभ का आनंद लेना चाहते हैं। सरसंघचालक ने स्पष्ट किया कि संघ में कोई रिटायरमेंट बेनिफिट नहीं होता है।



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मोहन भागवत ने कहा कि हम वही करते हैं जो संघ हमसे करने को कहता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या आपको लगता है कि मैं ही वह अकेला व्यक्ति हूं जो सरसंघचालक बन सकता है? मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि हम जीवन के किसी भी मोड़ पर रिटायरमेंट के लिए तैयार हैं और 75 वर्ष की उम्र के बाद भी काम करने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे।



धर्मांतरण को बताया हिंसा समान

संघ प्रमुख ने कहा कि हम धर्मांतरण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जबरन या लालच देकर किया गया धर्मांतरण हिंसा के समान है। उन्होंने यह भी कहा कि देशभक्ति के इस माहौल में सभी मतभेद और आपसी प्रतिस्पर्धाओं को हम भुला चुके हैं। अब देश के हित में सभी प्रतिस्पर्धी एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं। यह दृश्य वास्तव में एक आदर्श प्रजातंत्र का प्रतीक है। उन्होंने यह इच्छा व्यक्त की कि यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहनी चाहिए। हालांकि, इस बात का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि भविष्य में क्या होगा या कैसे होगा, लेकिन यह जरूर है कि सभी को यह विश्वास है कि ऐसा होना चाहिए।



काशी और मथुरा आंदोलन पर रखी अपनी बात

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि राम मंदिर एकमात्र ऐसा आंदोलन था, जिसका संघ ने समर्थन किया था और वह काशी और मथुरा के स्थलों के पुनरुद्धार सहित ऐसे किसी भी अन्य आंदोलन का समर्थन नहीं करेगा।



तीन बच्चों का पालन-पोषण करना चाहिए- भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को यह कहा कि सभी परिवारों को तीन बच्चों का पालन-पोषण करना चाहिए। उनका कहना था कि यह कदम भविष्य में परिवार व्यवस्था को बनाए रखने और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। मोहन भागवत ने यह भी कहा कि संघ ने विभाजन का विरोध किया था और वह अखंड भारत के समर्थक हैं। उनका विश्वास है कि देश को एकजुट रखना आवश्यक है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हमारी एक ही पहचान है, और वह पहचान हिंदू होने की है। आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि एकता की बात तभी की जानी चाहिए, जब कोई अंतर हो।



FAQ

  1. मोहन भागवत ने रिटायरमेंट के बारे में क्या कहा?
    मोहन भागवत ने संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर कहा कि वह न तो 75 वर्ष की आयु में रिटायर होंगे, न ही किसी अन्य को रिटायर होने के लिए कहेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ में कोई रिटायरमेंट बेनिफिट नहीं होता है और संघ में कार्य करने की कोई उम्र की सीमा नहीं है।
  2. संघ में रिटायरमेंट का क्या नियम है?
    संघ में कोई रिटायरमेंट का प्रावधान नहीं है। संघ के सभी कार्यकर्ता स्वयंसेवक होते हैं, और उम्र की कोई सीमा नहीं होती। मोहन भागवत ने कहा कि यदि संघ उन्हें किसी कार्य के लिए कहे, तो वह 80 साल की उम्र में भी बिना किसी संकोच के वह कार्य करेंगे।

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