एसबीआई की नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, अपराध घटने से बढ़ेगी देश की जीडीपी
समझें क्या है पूरा मामला
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने देश के 28 राज्यों पर एक खास रिसर्च की है।
- इस स्टडी के अनुसार अपराध कम होने से देश की विकास दर बढ़ जाती है।
- अगर जुर्म सिर्फ 1% कम होता है, तो लंबे समय में जीडीपी 0.133% बढ़ती है।
- जिन शहरों में ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, वहां पर अपराध काफी कम हैं।
- महिला सुरक्षा बेहतर होने से नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है।
SBI Research Report: क्या आप जानते हैं कि देश की कानून व्यवस्था का हमारी इकॉनमी और GDP ग्रोथ से सीधा कनेक्शन है? हाल ही में, SBI (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) ने देश के 28 राज्यों पर एक बहुत ही इंट्रेस्टिंग स्टडी की है।
इस रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, जब किसी राज्य में क्राइम रेट घटता है, तो वहां बिजनेस और इन्वेस्टमेंट के लिए एक सेफ एनवायरनमेंट बनता है। इससे देश की विकास दर तेजी से बूस्ट होती है।
इस रिपोर्ट में हाई-टेक सिक्योरिटी जैसे CCTV सर्विलांस सिस्टम्स, पुलिस बजट और वीमेन सेफ्टी का वर्कफोर्स पर पड़ने वाले इम्पैक्ट को डिटेल में एनालाइज किया गया है। आइए समझते हैं कि कैसे सुरक्षा पर होने वाला खर्च देश की आर्थिक तरक्की का रास्ता साफ करता है।
सुरक्षा खर्च बढ़ाने से अपराध में कितनी कमी आती है
एसबीआई की इस रिपोर्ट में सरकारों के लिए एक बहुत जरूरी सलाह छिपी हुई है। इस स्टडी के लिए देश के सभी 28 राज्यों के आंकड़ों को देखा गया। अगर देश में अपराध का ग्राफ सिर्फ 1% नीचे आता है, तो जीडीपी तुरंत बढ़ने लगती है। शॉर्ट टर्म में ये 0.11% और लॉन्ग टर्म में 0.133% तक बढ़ जाती है। रिपोर्ट कहती है कि पुलिस और सुरक्षा पर निवेश बढ़ाना बहुत फायदेमंद होता है।
जब भी कोई सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा पर प्रति व्यक्ति 1% खर्च बढ़ाती है। तब उस राज्य की कुल अपराध दर में 0.36% की बड़ी गिरावट आती है। इसका सीधा और साफ मतलब यह हुआ कि सुरक्षा पर जितना ज्यादा बजट खर्च होगा। समाज में कानून व्यवस्था उतनी ही मजबूत होगी और जुर्म का ग्राफ नीचे जाएगा।
सीसीटीवी लगाने से क्राइम रेट पर क्या असर हुआ
इस स्टडी में हाईटेक सुरक्षा यानी सीसीटीवी कैमरों की भूमिका को भी नापा गया है। शहरों में प्रति वर्ग मील लगे कैमरों के आधार पर यह डेटा तैयार हुआ। चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों ने इस मामले में देश में सबसे बेहतरीन काम किया है।
चेन्नई में प्रति वर्ग मील 615 और हैदराबाद में 157 कैमरे लगे हैं। यही कारण है कि ज्यादा कैमरों की वजह से इन दोनों शहरों में क्राइम रेट बहुत कम है। हालांकि इंदौर और सूरत जैसे कुछ शहर इस मामले में अभी अपवाद बने हुए हैं।
महिला सुरक्षा और वर्कफोर्स भागीदारी का कनेक्शन
ये रिपोर्ट महिलाओं के लिए काम के माहौल और उनकी सुरक्षा पर भी बात करती है। जहां महिलाओं के खिलाफ अपराध ज्यादा हैं, वहां वे नौकरी करने से बचती हैं। हरियाणा, बिहार, पंजाब और पश्चिम बंगाल इस मामले में नेशनल एवरेज से काफी पीछे चल रहे हैं।
इन राज्यों में नेशनल एवरेज 64.6 से ज्यादा महिला अपराध दर्ज हुए हैं। इस वजह से इन राज्यों के वर्कफोर्स यानी श्रम बल में महिलाओं की हिस्सेदारी कम हुई है। राजस्थान में क्राइम रेट ज्यादा होने के बाद भी महिला वर्कफोर्स 50% पर है।
साल 2024 में अपराध के कुल कितने मामले आए
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 के दौरान पूरे देश में अपराध के मामलों में थोड़ी राहत जरूर देखी गई है। इस साल कुल 58.86 लाख गंभीर और संज्ञेय अपराध पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हुए। ये संख्या पिछले साल के मुकाबले लगभग 6.0% कम है, जो एक अच्छा संकेत है।
पूरे भारत की अपराध दर भी प्रति लाख आबादी पर 448.3 से गिरकर 418.9 हो गई है। राज्यों की बात करें तो केरल में प्रति लाख सबसे ज्यादा एक हजार 389 अपराध दर्ज किए गए। वहीं नगालैंड में सबसे सुरक्षित माहौल रहा, जहां यह आंकड़ा केवल 61.6 रहा।
क्या पुलिस के पास अपराध के सभी मामले दर्ज होते हैं
इस पूरी रिपोर्ट (एसबीआई की रिपोर्ट) का एक दूसरा और कड़वा पहलू एफआईआर दर्ज न होना भी है। कई बार समाज और लोकलाज के डर से लोग पुलिस स्टेशन तक नहीं जाते हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक, घरेलू हिंसा के केवल 20.4% मामले ही दर्ज हो पाते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक लगभग 80% मामले तो पुलिस के कागजों तक पहुंच ही नहीं पाते। अनुमान के मुताबिक करीब 5.94 लाख मामले दर्ज होने चाहिए थे, पर सिर्फ 1.21 लाख ही दर्ज हुए। पश्चिम बंगाल में भी चोरी और सेंधमारी के कई केस दर्ज नहीं कराए गए।
FAQ
- एसबीआई रिसर्च के अनुसार अपराध दर घटने से जीडीपी ग्रोथ पर क्या असर पड़ता है?
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार देश में अपराध दर में 1% की कमी आने से देश की अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा होता है। इससे शॉर्ट टर्म यानी अल्पकाल में वास्तविक जीडीपी 0.11% और लॉन्ग टर्म में देश की विकास दर 0.133% तक बढ़ जाती है। - सुरक्षा पर प्रति व्यक्ति खर्च बढ़ाने से अपराधों में कितने प्रतिशत की कमी आती है?
एसबीआई की स्टडी बताती है कि जब भी सरकार सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था पर अपना बजट बढ़ाती है, तो उसके अच्छे नतीजे मिलते हैं। यदि प्रति व्यक्ति सुरक्षा खर्च में 1% की बढ़ोतरी की जाती है, तो उस राज्य की अपराध दर में लगभग 0.36% की कमी आ जाती है। - सीसीटीवी कैमरों की संख्या का शहरों में अपराध के ग्राफ से क्या संबंध है?
जिन शहरों में प्रति वर्ग मील सीसीटीवी कैमरों की संख्या ज्यादा है, वहां सुरक्षा का बेहतर माहौल है और अपराध कम हैं। चेन्नई में सबसे ज्यादा 615 कैमरे हैं, जिससे वहां क्राइम रेट कम है। इसके विपरीत कम कैमरों वाले इलाकों में सुरक्षा का खतरा हमेशा बना रहता है।
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