क्या स्कूल में स्मार्टफोन बैन से सुधरती है पढ़ाई? जानिए क्या कहती है रिसर्च

Anjali Dwivedi | Apr 03, 2026, 13:43 IST
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school smartphone ban
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हंगरी और ऑस्ट्रेलिया की रिसर्च बताती है कि स्कूलों में स्मार्टफोन बैन से बच्चों का तनाव और ध्यान भटकना कम होता है। लेकिन पढ़ाई पर असर सीमित ही है। जानें क्या कह रही है ये रिसर्च…

समझें क्या है पूरा मामला

  • हंगरी में मोबाइल बैन के बाद फोन का इस्तेमाल 37% से घटकर 4% रह गया।
  • ऑस्ट्रेलिया की रिसर्च के मुताबिक फोन बैन से बच्चों का तनाव 2.4% कम हुआ।
  • यूनेस्को रिपोर्ट के मुताबिक फोन का एक नोटिफिकेशन देखने से 20 मिनट की पढ़ाई खराब होती है।
  • हंगरी में 64% टीचर्स ने माना कि फोन बैन से पढ़ाई में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
  • एक्सपर्ट्स की कहना है सिर्फ फोन बैन काफी नहीं, डिजिटल ट्रेनिंग देना भी जरूरी है।
दुनियाभर के स्कूल बच्चों के मोबाइल फोन यूज करने की समस्या से जूझ रहे हैं। इसी बीच स्कूलों में फोन बैन करने पर दो देशों में बड़ी रिसर्च हुई है। हंगरी में बैन के बाद स्कूल समय में फोन यूज 37% से घटकर 4% हो गया।

ऑस्ट्रेलिया में मोबाइल फोन बैन से बच्चों का मानसिक तनाव 2.4% कम हुआ। दो तिहाई टीचर्स ने पढ़ाई में कोई खास सुधार नहीं देखा। एक्सपर्ट कहते हैं कि सिर्फ बैन काफी नहीं, जिम्मेदार डिजिटल ट्रेनिंग भी जरूरी है।

दुनिया भर के स्कूलों में फोन की चिंता

स्मार्टफोन और बच्चों की पढ़ाई का रिश्ता आज दुनिया भर के स्कूलों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। फ्रांस, चीन, कनाडा, डेनमार्क, स्वीडन और इंग्लैंड जैसे देशों ने स्कूलों में फोन के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई है।

इन देशों का मानना है कि फोन बच्चों का ध्यान भटकाते हैं और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं। अब इन नीतियों के नतीजों पर ताजा रिसर्च आई हैं जो कुछ जरूरी सवालों के जवाब देती हैं।

हंगरी में क्या हुआ बैन के बाद?

हंगरी के स्कूलों में मोबाइल फोन, टैबलेट, लैपटॉप और स्मार्टवॉच पर पूरी तरह पाबंदी है। यह छूट सिर्फ तब मिलती है, जब टीचर या प्रिंसिपल खास अनुमति दें। इस नीति के एक साल बाद हंगरी के शोधकर्ताओं ने 1 हजार 198 सेकंडरी स्कूल टीचर्स का सर्वे किया। नतीजे चौंकाने वाले थे।

स्कूल के समय में फोन का बार-बार इस्तेमाल करने वाले छात्र पहले 37% थे जो बैन के बाद घटकर सिर्फ 4% रह गए। करीब दो तिहाई स्कूलों ने पढ़ाई के कामों के लिए सीमित डिवाइस यूज की छूट दी। तो करीब 28% स्कूलों ने पूरी तरह बैन लागू किया।

टीचर्स ने क्या देखा क्लासरूम में?

टीचर्स ने बताया कि बैन के बाद बच्चे आपस में ज्यादा बात करने लगे। मैदान में उनका खेलना बढ़ा, शतरंज और ताश जैसे खेलों में रुचि बढ़ी। हालांकि किताबें पढ़ने और क्लास की तैयारी में सुधार बहुत मामूली ही रहा।

क्लासरूम के अनुभव मिले-जुले रहे। करीब एक तिहाई टीचर्स ने कहा कि बच्चों का ध्यान बेहतर हुआ है। भागीदारी बढ़ी और याद करने की क्षमता में भी सुधार आया है। लेकिन 64% टीचर्स ने कोई खास बदलाव नहीं देखा।

कुछ टीचर्स ने यह भी बताया कि कुछ बच्चे स्कूल में फोन छुपाकर रखते थे। दूसरी ओर कुछ बच्चे स्कूल में गंवाया हुआ फोन टाइम रात को घर पर पूरा करने लगे और देर तक जागते रहे।

UNESCO की रिपोर्ट क्या कहती है?

UNESCO (United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization) की 2023 की Global Education Monitoring Report ने भी इस मुद्दे पर ध्यान दिलाया है। रिपोर्ट के मुताबिक फोन का सिर्फ एक नोटिफिकेशन देखना भी पढ़ाई में खलल डाल देता है।

इसके बाद छात्रों को दोबारा ध्यान लगाने में 20 मिनट तक लग सकते हैं। यह एक बड़ी बात है, क्योंकि स्कूल के 6-7 घंटों में अगर बार-बार ऐसा हो तो पढ़ाई का कितना वक्त बर्बाद होता है, यह सोचा जा सकता है।

ऑस्ट्रेलिया में मानसिक स्वास्थ्य पर असर

दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में शोधकर्ता Stephanie Baggio, Tracey Waden और उनकी टीम ने एक हजार से अधिक सेकंडरी छात्रों पर रिसर्च की। इसमें पाया गया कि फोन बैन से मनोवैज्ञानिक तनाव 2.4% कम हुआ।

उदासी, डर और दुख जैसी नकारात्मक भावनाएं 5.2% तक घटीं। हालांकि खुशी या उत्साह जैसी सकारात्मक भावनाओं में कोई खास बदलाव नहीं आया। ये आंकड़े छोटे लग सकते हैं लेकिन लाखों बच्चों पर लागू करके देखें तो असर बड़ा हो जाता है।

सिर्फ स्मार्टफोन बैन से काम नहीं चलेगा

हंगरी के शोधकर्ताओं ने साफ कहा है कि अकेला बैन काफी नहीं है। पाबंदी से ध्यान भटकना कम होता है लेकिन इससे डिजिटल लर्निंग के मौके भी छिन जाते हैं। बच्चों को एआईजैसी नई तकनीकों को समझने और इस्तेमाल करने के मौके मिलने चाहिए।

इसीलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि संतुलित नीति, जिम्मेदार डिजिटल ट्रेनिंग और टीचर्स का सहयोग जरूरी है। सिर्फ फोन छीन लेना समाधान नहीं है। असली जरूरत है कि बच्चों को यह सिखाया जाए कि फोन का सही इस्तेमाल कैसे करें।

भारत के लिए सबक

भारत में भी स्कूलों में फोन को लेकर बहस जारी है। कई राज्यों में स्कूलों में फोन लाने पर अनौपचारिक रोक है, लेकिन कोई एक समान राष्ट्रीय नीति नहीं है। दुनिया के इन अनुभवों से भारत को सीखने की जरूरत है।

बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना जरूरी है लेकिन डिजिटल दुनिया से पूरी तरह काटना भी सही नहीं। एक सोची-समझी और संतुलित नीति ही असल में काम आएगी।

यह खबर क्यों जरूरी है? बच्चों में बढ़ता स्क्रीन टाइम और उससे जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं आज एक राष्ट्रीय चिंता बन चुकी हैं। संवैधानिक नजरिए से हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वस्थ माहौल का अधिकार है। डिजिटल नैतिकता के पैमाने पर यह रिसर्च यह बताती है कि तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी से होना चाहिए। सामाजिक नजरिए से देखें तो जो बच्चे आज स्कूल में हैं वही कल देश के नागरिक बनेंगे। उनकी मानसिक सेहत और एकाग्रता की क्षमता पूरे समाज के भविष्य को प्रभावित करती है।

FAQ

  1. क्या स्कूलों में स्मार्टफोन बैन से पढ़ाई सुधरती है?
    रिसर्च के नतीजे मिले-जुले हैं। हंगरी में 1,198 टीचर्स के सर्वे में सिर्फ एक तिहाई ने पढ़ाई में सुधार बताया। 64% टीचर्स ने कोई खास बदलाव नहीं देखा। बैन से फोन यूज जरूर कम हुआ लेकिन पढ़ाई के नतीजे अपने आप नहीं सुधरे। विशेषज्ञ कहते हैं कि बैन के साथ-साथ जिम्मेदार डिजिटल ट्रेनिंग भी जरूरी है।
  2. स्कूल में फोन बैन का बच्चों की मानसिक सेहत पर क्या असर होता है?
    दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में 1,000 से अधिक छात्रों पर हुई रिसर्च में पाया गया कि फोन बैन से मनोवैज्ञानिक तनाव 2.4% कम हुआ। उदासी, डर और दुख जैसी नकारात्मक भावनाएं 5.2% घटीं। यह बदलाव मामूली लेकिन सार्थक माना गया। हालांकि सकारात्मक भावनाओं में कोई खास सुधार नहीं आया।
  3. फोन का सिर्फ नोटिफिकेशन देखने से पढ़ाई पर कितना असर पड़ता है?
    UNESCO की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार फोन का एक नोटिफिकेशन देखना भी छात्र का ध्यान तोड़ने के लिए काफी है। इसके बाद दोबारा पढ़ाई में ध्यान लगाने में 20 मिनट तक लग सकते हैं। इसीलिए क्लासरूम में फोन की मौजूदगी भी, भले ही बच्चा उसे इस्तेमाल न कर रहा हो, पढ़ाई पर असर डालती है।
Source:

Hungarian study: researchers Eniko Pozsonyi, Tunde Lengyelne Molnar, Reka Racsko
Hungary policy: mobiles, tablets, laptops, smartwatches banned unless teacher/principal permission

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