IAS माता-पिता के बच्चों को आरक्षण क्यों मिले? SC की अहम टिप्पणी
News in Short
- SC ने OBC आरक्षण और क्रीमी लेयर पर सुनवाई की।
- कोर्ट ने IAS माता-पिता के बच्चों को लाभ देने पर सवाल उठाया।
- जस्टिस नागरत्ना ने कहा, असली मकसद कमजोरों तक फायदा पहुंचाना।
- सुनवाई में ग्रुप A और B कर्मचारियों को क्रीमी लेयर में रखने पर चर्चा हुई।
News in Detail
सुप्रीम कोर्ट में OBC आरक्षण और क्रीमी लेयर की सुनवाई हुई। कोर्ट ने IAS माता-पिता के बच्चों को आरक्षण का लाभ देने पर सवाल उठाया। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि आरक्षण का असली मकसद वंचितों तक लाभ पहुंचाना है। सुनवाई में ग्रुप A और B कर्मचारियों को क्रीमी लेयर में रखने पर भी चर्चा हुई।
OBC आरक्षण पर SC की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान OBC आरक्षण (OBC Reservation) और क्रीमी लेयर (Creamy Layer) पर बड़ा सवाल उठाया। कोर्ट ने पूछा कि अगर किसी उम्मीदवार के माता-पिता IAS अधिकारी हैं, तो उसे आरक्षण का लाभ क्यों मिलना चाहिए। यह टिप्पणी क्रीमी लेयर की सीमा को लेकर बहस को फिर से तेज कर देती है।
जस्टिस नागरत्ना की राय
सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने की। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि आरक्षण का असली मकसद समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों तक फायदा पहुंचाना है। उन्होंने पूछा कि जब किसी परिवार के माता-पिता देश की सबसे ऊंची प्रशासनिक सेवाओं में हैं, तो उनके बच्चों को आरक्षण क्यों मिले।
पीठ ने कहा कि परिवार आरक्षण से सशक्त हो जाने पर अगली पीढ़ी की पात्रता पुनर्मूल्यांकन होनी चाहिए। जस्टिस ने कहा कि संतुलन होना चाहिए। सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े परिवार एक स्तर प्राप्त कर लेने पर पुनर्मूल्यांकन जरूरी है। अदालत ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS ) और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों के लिए आरक्षण में अंतर का भी उल्लेख किया।
वकील का पक्ष
सुनवाई में वकील शशांक रत्नू ने कहा कि उन्हें वेतन के कारण नहीं बल्कि स्थिति के कारण बर्खास्त किया गया। उन्होंने बताया कि ग्रुप A और कुछ मामलों में ग्रुप B कर्मचारियों को क्रीमी लेयर में रखा जाता है। कर्मचारियों को सिर्फ वेतन के आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक स्थिति के आधार पर बाहर किया जाता है।
क्रीमी लेयर क्या होता है और इसे क्यों बनाया गया?
OBC आरक्षण में क्रीमी लेयर उस वर्ग को कहा जाता है जो सामाजिक और आर्थिक रूप से अपेक्षाकृत मजबूत हो चुका है। आरक्षण का उद्देश्य पिछड़े और कमजोर तबकों को आगे लाना है, इसलिए यह तय किया गया कि जो परिवार पहले से आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत हैं, उन्हें OBC आरक्षण का लाभ न दिया जाए। इसी को क्रीमी लेयर कहा जाता है।
सरकार समय-समय पर एक आय सीमा तय करती है। अगर परिवार की कुछ तरह की आय इस सीमा से ऊपर चली जाती है, तो उस परिवार के बच्चों को OBC आरक्षण नहीं मिलता। फिलहाल यह सीमा 8 लाख रुपये सालाना के आसपास मानी जाती है।
आरक्षण का असली मकसद
कोर्ट ने यह समझने की कोशिश की कि आरक्षण का लाभ किन लोगों तक सीमित होना चाहिए। OBC आरक्षण का उद्देश्य केवल आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों तक फायदा पहुंचाना है। कुछ लोग इसे सामाजिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर देखते हैं। लेकिन SC ने आर्थिक और प्रशासनिक स्थिति पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत बताई।
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