सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पजेशन के बाद भी मांग सकते हैं मुआवजा
समझें क्या है पूरा मामला...
- चाबी मिली तो क्या, मुआवजा मांगने का हक नहीं गया।
- SC का फैसला: बिल्डर की मनमानी अब नहीं चलेगी।
- पजेशन लिया तो भी उपभोक्ता हो, अदालत जा सकते हो।
- 22 साल बाद मिला न्याय, करोड़ों होम बायर्स को राहत।
- फ्लैट की चाबी लो, लेकिन अपना हक मत छोड़ो।
सुप्रीम कोर्ट ने होम बायर्स के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि फ्लैट का पजेशन लेने के बाद भी खरीदार का 'उपभोक्ता' का दर्जा खत्म नहीं होता। देरी या सर्विस में कमी के लिए वह कंज्यूमर फोरम में शिकायत कर सकता है।
बिल्डर और खरीदार के बीच हुए समझौते की कोई भी शर्त इस अधिकार को नहीं छीन सकती। यह मामला 2003 में दिल्ली के द्वारका प्रोजेक्ट से शुरू हुआ था और 22 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने खरीदार के हक में फैसला दिया।
22 साल पुरानी लड़ाई, ऐतिहासिक जीत
जनवरी 2003 में दिल्ली की एक कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी में एक व्यक्ति को फ्लैट आवंटित हुआ। द्वारका स्थित प्रोजेक्ट में फ्लैट का कब्जा समय पर नहीं मिला। साल 2005 में उसने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई।
लेकिन जिला फोरम, राज्य आयोग और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग तीनों ने शिकायत खारिज कर दी। तर्क यह था कि जब पजेशन मिल चुका है, तो खरीदार अब उपभोक्ता नहीं रहा। 22 साल की लड़ाई के बाद 4 जून को सुप्रीम कोर्ट ने यह तर्क नकार दिया।
SC ने क्या कहा
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने साफ कहा कि पजेशन स्वीकार करना इस बात का सबूत नहीं है कि खरीदार ने अपने सभी कानूनी अधिकार छोड़ दिए।
अदालत ने NCDRC (National Consumer Disputes Redressal Commission- राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग) के 2016 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि पजेशन मिलने के बाद खरीदार मुआवजा नहीं मांग सकता। कोर्ट ने 2005 की मूल शिकायत फिर से बहाल की और जिला उपभोक्ता फोरम को एक साल में फैसला देने का निर्देश दिया।
फैसले की तीन अहम बातें
पहली बात- पजेशन मिलने के बाद भी आप उपभोक्ता हैं। आपका यह दर्जा तब तक नहीं जाता जब तक आपकी शिकायत पूरी तरह हल न हो जाए।
दूसरी बात- बिल्डर के साथ हुए समझौते में मौजूद आर्बिट्रेशन क्लॉज (Arbitration Clause- मध्यस्थता की शर्त) आपको कंज्यूमर फोरम जाने से नहीं रोक सकती। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत मिला यह अधिकार किसी निजी समझौते से नहीं छिना जा सकता।
तीसरी बात- सिर्फ देरी नहीं, 'सर्विस में कमी' पर भी शिकायत होगी। अगर बिल्डर ने स्विमिंग पूल, पार्किंग, लिफ्ट या निर्माण की क्वालिटी में वादे नहीं निभाए, तो भी आप पजेशन के बाद अदालत जा सकते हैं।
बिल्डरों का 'वसूली का खेल' होगा बंद
RERA (Real Estate Regulatory Authority — रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण) के आने के बाद भी कई बिल्डर मनमानी जारी रखे हुए हैं। पजेशन देते वक्त अचानक 'सुपर एरिया', EDC/IDC (External Development Charges / Internal Development Charges — बाहरी एवं आंतरिक विकास शुल्क), या बिजली कनेक्शन के नाम पर लाखों के बिल थमा दिए जाते हैं।
होम बायर्स झगड़े से बचने के लिए पैसा चुका देते थे। अब वे पजेशन शांति से ले सकते हैं और बाद में उपभोक्ता अदालत में इन गलत चार्जेज को चुनौती दे सकते हैं।
किन खरीदारों को सबसे ज्यादा फायदा
यह फैसला उन लोगों के लिए खास तौर पर राहत लेकर आया है जिन्हें सालों की देरी से फ्लैट मिला। जिन्होंने पजेशन लेने के बाद भी आर्थिक नुकसान उठाया। जिनसे अतिरिक्त चार्ज वसूले गए। जिन्हें आर्बिट्रेशन क्लॉज दिखाकर उपभोक्ता फोरम जाने से रोका गया।
RERA और उपभोक्ता अदालत दोनों की ताकत बढ़ी
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला देशभर के लाखों होम बायर्स के लिए एक मजबूत ढाल बन गया है। अब खरीदार बिना डरे पजेशन ले सकते हैं और अपनी कानूनी लड़ाई साथ-साथ जारी रख सकते हैं। उपभोक्ता संरक्षण कानून और RERA दोनों मिलकर अब बिल्डरों की जवाबदेही और पक्की करते हैं।
FAQ
- अगर मैंने फ्लैट का पजेशन ले लिया है तो क्या अब भी मुआवजा मांग सकता हूं?
हां। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि पजेशन लेने के बाद भी आपका उपभोक्ता का दर्जा बना रहता है। देरी या सर्विस में कमी के लिए आप कंज्यूमर फोरम में शिकायत कर सकते हैं और मुआवजा मांग सकते हैं। - बिल्डर ने एग्रीमेंट में आर्बिट्रेशन क्लॉज लिखा है, तो क्या मैं उपभोक्ता फोरम नहीं जा सकता?
जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आर्बिट्रेशन क्लॉज आपको कंज्यूमर फोरम जाने से नहीं रोक सकता। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत मिला यह अधिकार किसी निजी समझौते की शर्त से खत्म नहीं होता। - सर्विस में कमी का मतलब क्या है और इस पर शिकायत कैसे करें?
अगर बिल्डर ने पार्किंग, स्विमिंग पूल, लिफ्ट, निर्माण की क्वालिटी या कोई अन्य वादा पूरा नहीं किया, तो यह सर्विस में कमी है। इसके लिए आप जिला उपभोक्ता फोरम या NCDRC में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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