सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: RTI बना ब्लैकमेलिंग का नया बिजनेस

Manya Jain | Jun 15, 2026, 21:16 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि आरटीआई (RTI) एक्टिविज्म अब नया बिजनेस बन गया है। अदालत ने पंजाब के एक आरटीआई कार्यकर्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह तीखी टिप्पणी की है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरटीआई एक्टिविज्म अब एक नया बिजनेस बन गया है।
  • अदालत ने पंजाब के दो आरटीआई कार्यकर्ताओं की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
  • इन लोगों पर सड़क निर्माण कार्य में बाधा डालने और मजदूरों को धमकाने का आरोप है।
  • जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने यह सख्त आदेश दिया।
  • अदालत ने जनहित याचिकाओं (PIL) के गलत इस्तेमाल पर भी गहरी चिंता जताई है।

सुप्रीम कोर्ट ने RTI के गलत इस्तेमाल पर जताई नाराजगी

देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर बहुत बड़ी बात कही है। अदालत ने कहा कि आज के समय में आरटीआई एक्टिविज्म एक नया बिजनेस बन चुका है।



सुप्रीम कोर्ट की यह तीखी टिप्पणी पंजाब के एक आरटीआई कार्यकर्ता की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपियों की जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।



अदालत का मानना है कि अच्छे उद्देश्य से बनाए गए इस कानून का कुछ लोग निजी स्वार्थ के लिए गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे सरकारी कामों में बिना वजह बाधा आ रही है।



मजदूरों को धमकाने का है पूरा मामला

यह पूरा मामला पंजाब के गुरदासपुर जिले का है। यहां के आरटीआई कार्यकर्ता राकेश बेहल और उनके सहयोगी राजीव कुमार पर कई गंभीर आरोप लगे हैं।



आरोप है कि इन दोनों ने इलाके में चल रहे एक सड़क निर्माण कार्य में जबरन अड़ंगा लगाया था। सिर्फ इतना ही नहीं, इन्होंने निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे लोगों और मौके पर मौजूद मजदूरों को डराया और धमकाया भी था।



इसी मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों ने अदालत से अग्रिम जमानत की गुहार लगाई थी, लेकिन अदालत ने उनके इस कृत्य को कानून का उल्लंघन माना।



निगरानी करने वाले आप कौन होते हैं?

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच इस बर्ताव से बेहद खफा दिखी। उन्होंने आरोपियों से सीधे और तीखे सवाल पूछे।



अदालत ने पूछा कि इन सड़कों के निर्माण की निगरानी करने वाले आखिर आप कौन होते हैं? आप कौन सी अथॉरिटी हैं और आपको यह अधिकार किसने दिए हैं?



सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि सरकार अपने काम का ध्यान खुद रख सकती है। किसी भी आम नागरिक या कार्यकर्ता को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। इससे पहले पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट भी इनकी जमानत खारिज कर चुका था।



जनहित याचिकाओं पर भी सुप्रीम कोर्ट ने कसा तंज

सुप्रीम कोर्ट सिर्फ आरटीआई के गलत इस्तेमाल तक ही नहीं रुका। अदालत ने जनहित याचिकाओं (PIL) के बदलते स्वरूप पर भी गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया।



अदालत ने कहा कि पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन अब प्राइवेट इंटरेस्ट और पब्लिसिटी इंटरेस्ट बन गई है। कुछ लोगों के लिए यह सिर्फ 'पैसा इंटरेस्ट लिटिगेशन' बनकर रह गई है।



अदालत ने एक पुरानी याचिका का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं कानून की प्रक्रिया का मजाक उड़ाती हैं। वकीलों को पब्लिसिटी के बजाय समाज की भलाई के लिए काम करना चाहिए।



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