निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती, NCERT किताबों से ही पढ़ाई का आदेश
VINAY VERMA | Apr 24, 2026, 14:58 IST
private-school-ncert-books-mandatory-chhattisgarh-order
छत्तीसगढ़ सरकार ने निजी स्कूलों में किताबों की मनमानी पर सख्त कदम उठाए हैं। अब CBSE से मान्यता प्राप्त स्कूलों में NCERT की किताबें ही पढ़ाई जाएंगी, और छात्रों या पालकों को निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
NEWS IN SHORT
- सरकार ने निजी स्कूलों में किताबों की मनमानी पर सख्त रुख अपनाया
- CBSE स्कूलों में अब केवल NCERT की किताबें होंगी
- अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए नहीं किया जाएगा मजबूर
- सरकारी आदेश से कक्षा 1 से 10 तक NCERT किताबें अनिवार्य
- स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए सरकार ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए है
NEWS IN DETAIL
Chhattisgarh education :जारी कर दिए हैं—अब CBSE से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में NCERT की किताबों से ही पढ़ाई होगी। किसी भी छात्र या पालक को निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा।
मंत्रालय महानदी भवन से जारी इस आदेश में साफ कहा गया है कि विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल NCERT की किताबों की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोप रहे हैं।
इतना ही नहीं, स्कूल प्रबंधन छात्रों और पालकों को खास दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए बाध्य कर रहे थे। इस खेल में कमीशनखोरी और सांठगांठ की भी आशंका जताई जा रही थी।
सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए साफ कर दिया है कि जहां CBSE से संबद्ध स्कूलों में पढ़ाई हो रही है, वहां कक्षा पहली से 10वीं तक NCERT (एनसीईआरटी पुस्तक)की ही किताबें लागू होंगी।
ये किताबें पहले से ही राज्य के (एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम )पाठ्यपुस्तक निगम के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऐसे में किसी भी अन्य प्रकाशक की किताबें खरीदने का दबाव पूरी तरह गैरकानूनी माना जाएगा।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कक्षा पहली से आठवीं तक शिक्षा का अधिकार कानून लागू है, जिसके तहत बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा दी जानी है।
ऐसे में इन कक्षाओं के छात्रों पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना नियमों का सीधा उल्लंघन होगा। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि स्कूल केवल निर्धारित किताबें ही लगाएं, ताकि पालकों को अनावश्यक खर्च न उठाना पड़े।
कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए भी स्पष्ट आदेश है कि उन्हें किसी विशेष दुकान से किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
इसी तरह यूनिफॉर्म और स्टेशनरी के मामले में भी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाई गई है। पालकों को यह स्वतंत्रता होगी कि वे अपनी सुविधा अनुसार कहीं से भी सामग्री खरीद सकें।
सरकार ने सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। यदि कहीं भी शिकायत मिलती है
तो उसके निपटारे के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
स्पष्ट है कि सरकार अब शिक्षा के नाम पर चल रहे इस ‘किताब कारोबार’ पर लगाम कसने के मूड में है। लंबे समय से अभिभावक इस मुद्दे को उठा रहे थे
लेकिन अब जाकर प्रशासन हरकत में आया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि जमीनी स्तर पर इन आदेशों का कितना असर दिखता है और निजी स्कूलों की मनमानी पर वास्तव में कितनी रोक लग पाती है।
यह खबरें भी पढ़े...
निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आक्रोश, अब आजादी की दूसरी लड़ाई लड़ने सड़कों पर उतरेंगे अभिभावक और छात्र
निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ द सूत्र की मुहिम, लोगों ने द सूत्र को बताई आपबीती
निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर लगा लगाम
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
By VINAY VERMA
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान
By Ashish Bhardwaj