ऑनलाइन शॉपिंग से बढ़ा सेक्स टॉयज का मार्केट, जानें सबसे ज्यादा क्या खरीद रहे भारतीय
ऑनलाइन शॉपिंग ने सेक्स टॉयज को भारतीय घरों तक पहुंचा दिया है। आंकड़े बताते हैं कि सेक्सुअल वेलनेस सेमगेंट के प्रोडक्ट सबसे ज्यादा बिकने वाले प्रोडक्ट की सूची में गिने जा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि एक दशक में यह बाजार दोगुने से भी ज्यादा हो जाएगा।
समझें क्या है मामला...
- ग्लोबल सेक्सुअल वेलनेस मार्केट 2025 में 30.23 अरब डॉलर का था।
- यह आंकड़ा 2035 तक बढ़कर 68.59 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
- यानी लगभग साढ़े पांच लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा का धंधा…
- यह जानकारी मार्केट रिसर्च फर्म SNS Insider की रिपोर्ट से आई है।
- ग्रोथ रेट सालाना करीब 8.56% रहने का अनुमान है।
- कंडोम अभी भी सबसे बड़ा प्रोडक्ट सेगमेंट है, लेकिन सेक्स टॉय सबसे तेज बढ़ रहे हैं।
यह आपसे क्यों जुड़ा है?
आप सोच सकते हैं कि यह सिर्फ एक इंटरनेशनल इंडस्ट्री रिपोर्ट है। इससे आम भारतीय परिवार को क्या लेना-देना। लेकिन असल बात यह है कि यह ट्रेंड सीधे भारत के शहरों तक भी पहुंच चुका है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर डिस्क्रीट डिलीवरी की सुविधा अब मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु से आगे टियर टू शहरों तक फैल रही है। जो बातचीत कभी दुकान पर करने में झिझक होती थी, वह अब ऐप पर कुछ टैप में हो जाती है।
पहले क्या था
पिछले एक दशक तक यह सेक्टर भारत और दुनिया दोनों जगह स्टिग्मा में बंधा रहा। खरीदारी दुकान के काउंटर तक सीमित थी और बातचीत लगभग नहीं होती थी। कंडोम को छोड़ दें तो बाकी प्रोडक्ट कैटेगरी निशे मार्केट ही मानी जाती थी। डिजिटल रिटेल के आने से यह तस्वीर बदलनी शुरू हुई। प्राइवेसी की गारंटी और होम डिलीवरी ने खरीदार को दुकान के सामने झिझकने से बचा लिया।
क्या हुआ और क्यों
रिपोर्ट के मुताबिक कंडोम सेगमेंट ने 2025 में 28.47% रेवेन्यू शेयर के साथ बढ़त बनाए रखी। लेकिन सेक्स टॉय (Sex Toys) और डिवाइस कैटेगरी 10.84% की दर से सबसे तेज बढ़ रही है। यहीं से मामला दिलचस्प होता है। बड़ा शेयर पुराने प्रोडक्ट का है, लेकिन नया पैसा नए प्रोडक्ट में जा रहा है। उम्र के हिसाब से देखें तो 25 से 34 साल के लोग सबसे ज्यादा खर्च कर रहे हैं।
कुल रेवेन्यू का लगभग 31.62%। लेकिन 18 से 24 साल की उम्र वाला ग्रुप 11.37% की रफ्तार से सबसे तेज बढ़ रहा है। यानी अगली पीढ़ी इस बाजार को और तेजी से आगे ले जाएगी। ऑनलाइन रिटेल की हिस्सेदारी 2025 में 42.18% थी, और यही चैनल आगे भी सबसे तेज ग्रोथ दिखाएगा, करीब 9.56% सालाना।
सोचिए एक बार, प्राइवेसी की जरूरत ने पूरी एक इंडस्ट्री का बिजनेस मॉडल बदल दिया। पुरुष उपभोक्ताओं का शेयर 2025 में 36.73% रहा। लेकिन LGBTQ+ सेगमेंट की ग्रोथ रेट सबसे तेज होगी, लगभग 11.92% सालाना। SNS Insider एनालिस्ट Parry Kardani ने कहा कि इनोवेशन, इनक्लूजन और कंज्यूमर एजुकेशन पर फोकस करने वाली कंपनियां लंबी अवधि में आगे रहेंगी।
सबसे ज्यादा क्या खरीद रहे भारतीय
भारत में सेक्सुअल वेलनेस मार्केट में कंडोम सबसे ज्यादा बिकने वाला प्रोडक्ट है। मेल कंडोम की बाजार हिस्सेदारी 42.5% है। इसकी बड़ी वजह सरकारी वितरण कार्यक्रम, किफायती दाम और मजबूत रिटेल पहुंच है। एक अन्य रिपोर्ट में यह हिस्सेदारी और भी ज्यादा बताई गई है, करीब 54% तक।
लेकिन दूसरे नंबर पर जो कैटेगरी सबसे तेज बढ़ रही है, वह है लुब्रिकेंट्स। शहरी इलाकों में सेक्सुअल वेलनेस को लेकर खुलकर बातचीत बढ़ी है। इसी का असर है कि लुब्रिकेंट्स की मांग तेजी से ऊपर गई है। सेक्स टॉय भी इस लिस्ट में पीछे नहीं हैं। फीमेल कॉन्ट्रासेप्टिव और प्रेगनेंसी टेस्टिंग प्रोडक्ट की मांग शहरी और सेमी अर्बन इलाकों में स्थिर बनी हुई है। खरीदारी के तरीके में भी बड़ा बदलाव आया है। 2023 में भारत में 20 करोड़ से ज्यादा ऑनलाइन शॉपर्स दर्ज हुए, और इसका सीधा असर सेक्सुअल वेलनेस मार्केट पर भी पड़ा। उपभोक्ता अब ऑनलाइन खरीदारी की प्राइवेसी और सुविधा को तरजीह देने लगे हैं।
एक जरूरी बात यहां साफ करनी होगी। अलग-अलग रिसर्च फर्मों के आंकड़ों में बड़ा फर्क है। SNS Insider का अनुमान 68.59 अरब डॉलर का है, जबकि Emergen Research के मुताबिक यह बाजार 2025 में ही 108.46 अरब डॉलर का था और 2035 तक 274.38 अरब डॉलर तक जा सकता है। एक तीसरी फर्म Roots Analysis का आंकड़ा इन दोनों से भी अलग, 2035 तक 101.18 अरब डॉलर का है। यह फर्क मार्केट को परिभाषित करने के तरीके में अंतर से आता है, फिर भी पाठकों को यह जानना जरूरी है कि "एक" सही आंकड़ा नहीं है।
दोनों साइड की बात
एक तरफ इंडस्ट्री और कुछ हेल्थ एक्सपर्ट इसे पॉजिटिव ट्रेंड मानते हैं, क्योंकि इससे सुरक्षित सेक्स और रिप्रोडक्टिव हेल्थ अवेयरनेस बढ़ती है। दूसरी तरफ कुछ सामाजिक टिप्पणीकार सवाल उठाते हैं कि तेज कमर्शियलाइजेशन कहीं जरूरी सेक्स एजुकेशन को पीछे तो नहीं छोड़ रहा।
आगे क्या होगा
अगले कुछ साल में एशिया पैसिफिक क्षेत्र में सबसे तेज ग्रोथ दिख सकती है, करीब 10.34% सालाना। भारत जैसे देशों में शहरीकरण, स्मार्टफोन और डिजिटल पेमेंट इसकी बड़ी वजह होंगे। लंबी अवधि में सवाल यह रहेगा कि क्या रेगुलेशन और प्रोडक्ट क्वालिटी स्टैंडर्ड इस तेज ग्रोथ के साथ तालमेल बिठा पाएंगे।
एक बात जो आप नहीं जानते थे
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि यह सिर्फ यंग अर्बन कंज्यूमर की कैटेगरी है। लेकिन डेटा कुछ और कहता है। बढ़ती उम्र के कंज्यूमर सेगमेंट में भी मांग तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि हेल्थ अवेयरनेस अब सिर्फ जवानी तक सीमित नहीं रही।
यह खबर क्यों जरूरी है?
यह रिपोर्ट सिर्फ बिजनेस आंकड़ों की बात नहीं करती, यह रिप्रोडक्टिव हेल्थ और नागरिक अधिकार से भी जुड़ती है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 निजता और स्वास्थ्य के अधिकार की गारंटी देता है, और डिजिटल प्राइवेसी में यह प्रोडक्ट खरीदना उसी दायरे में आता है। साथ ही यह सामाजिक नैतिकता पर भी सवाल छोड़ता है, क्या तेज कमर्शियलाइजेशन जिम्मेदार सेक्स एजुकेशन के साथ चल रहा है, या उससे आगे निकल गया है।
स्रोत- SNS Insider Report
FAQ
- सेक्सुअल वेलनेस मार्केट 2035 तक कितना बड़ा होगा?
SNS Insider के मुताबिक यह बाजार 2035 तक 68.59 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। हालांकि अन्य रिसर्च फर्मों के आंकड़े इससे अलग भी हैं। - सेक्सुअल वेलनेस मार्केट में सबसे तेज ग्रोथ किस सेगमेंट में है?
सेक्स टॉय और डिवाइस कैटेगरी सबसे तेज बढ़ रही है, करीब 10.84% सालाना दर से। कंडोम अभी भी सबसे बड़ा सेगमेंट बना हुआ है। - भारत में सेक्सुअल वेलनेस का बाजार कितना बड़ा है?
अलग-अलग रिपोर्ट के मुताबिक भारत का सेक्सुअल वेलनेस बाजार 2025 में करीब 1.4 से 1.5 अरब डॉलर का था, जो ग्लोबल मार्केट के मुकाबले अभी छोटा है।
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