उद्धव की शिव सेना फिर टूटी , 6 सांसद शिंदे गुट में जाने को तैयार, स्पीकर से मिलेंगे
समझें क्या है पूरा मामला
- शिव सेना (UBT) में टूट के नए संकेत मिले हैं।
- पार्टी के 6 सांसद शिंदे गुट में जाने की तैयारी में हैं।
- संजय राउत ने सांसदों को 15 करोड़ रुपए के ऑफर का दावा किया।
- सांसद दिल्ली पहुंचे और शिंदे गुट के नेताओं से मिले।
- पार्टी ने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर मान्यता न देने की मांग की।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। शिव सेना (UBT) के अंदर टूट की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के कुछ सांसद कथित तौर पर शिंदे गुट में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। यह खबर पार्टी के स्थापना दिवस से ठीक दो दिन पहले आई है। शिव सेना का स्थापना दिवस 19 जून को मनाया जाता है। इससे पहले 2022 में भी पार्टी में बड़ी टूट हुई थी। उस समय एकनाथ शिंदे ने बागी रुख अपनाया था। अब चार साल बाद वैसा ही माहौल फिर बनता दिख रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शिव सेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 शिंदे गुट के संपर्क में हैं। इनमें संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल आष्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव के नाम शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से दो सांसद पहले ही दिल्ली पहुंच गए हैं। बाकी सांसद भी जल्द दिल्ली आने वाले हैं। यह सभी सांसद दिल्ली में शिव सेना सांसद श्रीकांत शिंदे के घर पर मिलने वाले हैं। इस मुलाकात में एकनाथ शिंदे भी शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि इस मीटिंग के बाद यह सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से भी मुलाकात करेंगे।
संजय राउत का बड़ा आरोप
इस पूरे मामले पर शिव सेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राउत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि महाराष्ट्र के सांसदों को पार्टी बदलने के लिए 15 करोड़ रुपए प्रति सांसद ऑफर किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे शॉकिंग और शर्मनाक बताया। राउत ने अपने पोस्ट में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी टैग किया। उन्होंने लिखा कि यह पैसे का खेल है। हालांकि राउत ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी में किसी तरह की टूट नहीं हो रही है। उनके मुताबिक यह सब अफवाह है।
राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी इस मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले उद्धव ठाकरे ने सभी सांसदों की एक मीटिंग बुलाई थी। उस मीटिंग में सभी सांसदों ने उद्धव ठाकरे पर भरोसा जताया था। राउत के मुताबिक कुछ नेताओं ने तो अपने परिवार की कसम खाकर पार्टी के साथ रहने का वादा किया। राउत ने इस खबर को पूरी तरह झूठा करार दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के पास ऐसी कोई सूचना नहीं है।
स्पीकर को लिखी चिट्ठी
टूट की अफवाहों के बीच शिव सेना (UBT) ने एक बड़ा कदम उठाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में सावंत ने मांग की है कि किसी भी अलग गुट को मान्यता न दी जाए। उनका कहना है कि शिव सेना (UBT) कानूनी रूप से एक ही पार्टी है। अगर कोई सांसद अलग गुट बनाने की कोशिश करता है तो वह संविधान के खिलाफ होगा। सावंत ने चिट्ठी में साफ लिखा कि किसी भी टूटे हुए गुट को अलग पहचान, सुविधा या मान्यता नहीं दी जानी चाहिए।
हालांकि अरविंद सावंत ने कहा कि उनके सभी 11 सांसद पूरी तरह उद्धव ठाकरे के साथ हैं। इनमें 9 लोकसभा और 2 राज्यसभा सांसद शामिल हैं। सावंत के मुताबिक सभी सांसद बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा पर एकजुट हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एक दिन पहले लोकसभा में पार्टी का ऑफिस खुला था और सभी सांसद वहां मौजूद थे।
शिंदे गुट का पक्ष भी आया सामने
इस विवाद में शिंदे गुट की तरफ से भी बयान आया है। शिव सेना नेता शाइना एनसी ने किसी भी तरह की तोड़फोड़ की बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को दूसरों को तोड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं है। शाइना के मुताबिक एकनाथ शिंदे की लोकप्रियता जमीनी स्तर पर काम करने की वजह से है। उन्होंने यह भी कहा कि शिंदे घर बैठकर काम नहीं करते। हालांकि शिव सेना के एक नेता क्रुपाल तुमाने ने अलग बात कही। तुमाने ने दावा किया कि 7 सांसदों के साथ बातचीत आखिरी चरण में पहुंच गई है। इसे मीडिया में 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया जा रहा है।
उद्धव ठाकरे ने क्या कहा
उद्धव ठाकरे ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ सांसदों के बागी रुख का अंदाजा पहले से था। उद्धव ने 2022 की टूट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्हें पता था कि क्या होने वाला है। फिर भी उन्होंने किसी पर दबाव नहीं डाला था। उद्धव ने कहा कि आज का दिन उनका नहीं है, लेकिन आने वाला कल जरूर उनका होगा। उन्होंने कहा कि तब तक उन्हें यह कठिन समय सहना होगा। उद्धव के इस बयान से साफ है कि वे अंदरूनी असंतोष से अनजान नहीं हैं।
कानून के मुताबिक क्या होगा आगे
इस पूरे मामले में दल बदल कानून भी अहम भूमिका निभा सकता है। अगर शिव सेना (UBT) के सांसद अलग गुट बनाना चाहते हैं तो उन्हें कम से कम 7 सांसदों की जरूरत होगी। पार्टी के पास फिलहाल कुल 9 लोकसभा सांसद हैं। यानी अगर 6 सांसद भी अलग होते हैं तो दल बदल कानून के तहत कार्रवाई की आशंका बनी रहेगी। ऐसे में स्पीकर की भूमिका बहुत अहम हो जाती है। 2022 में भी एकनाथ शिंदे गुट को इसी तरह मान्यता मिली थी। उस समय भी लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शिंदे गुट के सांसद राहुल शेवाले को नेता के तौर पर मान्यता दी थी।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यह कदम आने वाले मॉनसून सत्र को देखकर उठाया जा रहा है। अगर शिव सेना (UBT) के सांसद शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो NDA (National Democratic Alliance) की संसद में ताकत और बढ़ जाएगी। इससे सरकार को कई जरूरी बिल पास कराने में आसानी होगी। यही वजह है कि इस मामले को सिर्फ पार्टी की अंदरूनी राजनीति नहीं, बल्कि बड़ी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।
फिलहाल पूरी नजर 19 जून पर टिकी है। यही वह दिन है जब शिव सेना अपना स्थापना दिवस मनाती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर टूट होनी है तो इसी दिन के आसपास साफ हो जाएगा। तब तक दोनों गुटों के बीच आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है।
जरूरी FAQ
शिव सेना (UBT) में टूट की अफवाह क्यों चल रही है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शिव सेना (UBT) के 9 में से 6 लोकसभा सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं। यह सांसद दिल्ली पहुंच गए हैं और श्रीकांत शिंदे के घर पर मुलाकात करने वाले हैं। इसके बाद इनके लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलने की भी चर्चा है। यह पूरा मामला पार्टी के स्थापना दिवस से ठीक पहले सामने आया है, जिससे टूट की अफवाहें और तेज हो गई हैं।
संजय राउत ने किस बात का आरोप लगाया है?
संजय राउत ने आरोप लगाया कि शिवसेना (UBT) के सांसदों को पार्टी छोड़कर शिंदे गुट में जाने के लिए 15 करोड़ रुपए प्रति सांसद का ऑफर दिया जा रहा है। उन्होंने इसे शॉकिंग और शर्मनाक बताते हुए सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को टैग किया। हालांकि राउत ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी में अभी कोई टूट नहीं हुई है और यह सब अफवाह है।
अगर सांसद पार्टी छोड़ते हैं तो दल बदल कानून के तहत क्या होगा?
दल बदल कानून के मुताबिक अलग गुट बनाने के लिए कम से कम दो तिहाई सांसदों की जरूरत होती है। शिव सेना (UBT) के पास कुल 9 लोकसभा सांसद हैं, इसलिए कम से कम 7 सांसदों का साथ छोड़ना जरूरी होगा। अगर सिर्फ 6 सांसद अलग होते हैं तो उन पर दल बदल कानून के तहत कार्रवाई और अयोग्यता का खतरा बना रहेगा। ऐसे में स्पीकर का फैसला बहुत अहम साबित होगा।
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