SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग की बैठक, BLO घर जाकर लेंगे छूटे नामों के दस्तावेज
समझें क्या है पूरा मामला
- एसआईआर में छूटे मतदाताओं के लिए EC ने फैसला लिया।
- BLO घर जाकर दस्तावेज लेकर ऑनलाइन अपलोड करेंगे।
- दिल्ली और महाराष्ट्र में क्लेम तारीख बढ़ाई गई।
- फॉर्म-6 से मतदाता नाम जोड़ने की प्रक्रिया होगी।
- SIR को लेकर कांग्रेस और EC के बीच विवाद जारी है।
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने शनिवार को अहम बैठक की। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त शामिल हुए। आयोग ने फैसला लिया कि विशेष पुनरीक्षण में छूटे मतदाताओं के दस्तावेज BLO घर जाकर लेंगे।
दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे और अधिकारी दावों पर फैसला करेंगे। चुनाव आयोग ने बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों में SIR पूरा कर लिया है। छूटे मतदाता नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। दिल्ली और महाराष्ट्र में क्लेम की तारीख बढ़ाई गई है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन किया है।
घर आकर लेंगे दस्तावेज
जिन लोगों को नोटिस मिला है, उनके घर अब बूथ लेवल अफसर (BLO – Booth Level Officer) जाएंगे। वे मौके पर जाकर जरूरी दस्तावेज लेंगे। ये दस्तावेज ECINet पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। इसके बाद रीजनल अफसर मामले पर फैसला लेगा। जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन सुनवाई भी होगी।
गोवा में भी ऐसे ही वोटरों के लिए व्यवस्था बनाई गई है। वहां ब्लॉक अफसर घर-घर जाकर फॉर्म-6 इकट्ठा करेंगे। यह फॉर्म नाम जोड़ने के दावे के लिए भरा जाता है।
डेडलाइन 30 अक्टूबर तक बढ़ी
बैठक में दिल्ली और महाराष्ट्र को लेकर बड़ा फैसला हुआ। यहां क्लेम और ऑब्जेक्शन दाखिल करने की तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है। दिल्ली में विवादों का निपटारा 30 नवंबर तक करना होगा। महाराष्ट्र में यह काम 10 नवंबर तक पूरा करना होगा।
चुनाव आयोग ने साफ किया कि फॉर्म-6 पर कोई कानूनी विवाद नहीं है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस फॉर्म को बरकरार रख चुका है। जिनका नाम लिस्ट से छूटा है, वे इसी फॉर्म से दावा कर सकते हैं।
कांग्रेस का हंगामा और आरोप
यह बैठक ऐसे समय हुई जब SIR को लेकर सियासी घमासान चल रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आपत्ति जताई। आरोप है कि इन आपत्तियों पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
कांग्रेस का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मनमानी कर रहे हैं। पार्टी का आरोप है कि वे बाकी दो आयुक्तों की बात नहीं सुन रहे। इसी मांग को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को देशभर में प्रदर्शन किया। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की है।
चुनाव से जुड़े कुछ आदेशों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल हुई है। इसमें कथित सॉफ्टवेयर बदलावों का जिक्र किया गया है।
आयुक्तों ने उठाए 4 सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने चार बड़े मुद्दों पर सवाल उठाए थे।
फॉर्म-6 में बदलाव
नए वोटरों से पुरानी SIR लिस्ट की जानकारी मांगी जा रही है। इसमें खुद या परिवार का नाम पूछा जाता है। संधू ने इसे गैरकानूनी बताया। उन्होंने इस बदलाव को हटाने की मांग की।
डेटा कंट्रोल पर सवाल
दोनों आयुक्तों ने वोटर डेटाबेस के कंट्रोल पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि दिल्ली में कंट्रोल लगातार बढ़ रहा है। वहीं राज्यों की पहुंच सीमित होती जा रही है।
बंगाल की 16 लाख अपीलें
पश्चिम बंगाल में करीब 16 लाख अपीलें दायर हुई हैं। ये अपीलें हटाए गए नामों को लेकर हैं। संधू ने पूछा कि ये अपीलें किसकी अनुमति से दायर हुईं।
गोवा के 97 वोटर
जांच में गोवा के 97 वोटर योग्य पाए गए थे। लेकिन सॉफ्टवेयर की खराबी के चलते उनका नाम अंतिम लिस्ट में नहीं जुड़ सका। इसी वजह से अब घर-घर जाकर फॉर्म जुटाए जा रहे हैं।
अब तक 13.37 करोड़ नाम हटाए गए
SIR के दौरान अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13.37 करोड़ नाम हटाए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार देश में 96.88 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं। इसके हिसाब से करीब 14.1 प्रतिशत मतदाताओं के नाम SIR प्रक्रिया में कम हुए हैं।
FAQ
- SIR में नाम छूट जाए तो क्या करें?
फॉर्म-6 भरकर नाम जोड़ने का दावा किया जा सकता है। अधिकारी घर आकर दस्तावेज भी ले सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस फॉर्म को वैध माना है। - दिल्ली-महाराष्ट्र में क्लेम की आखिरी तारीख क्या है?
दोनों जगह क्लेम और ऑब्जेक्शन की तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है। दिल्ली में निपटारा 30 नवंबर तक होगा। महाराष्ट्र में यह काम 10 नवंबर तक पूरा होगा।
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