SIR विवाद में CEC ज्ञानेश कुमार की बढ़ी मुश्किलें? सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
Sumit Kumar | Sept 25, 2026, 13:26 IST
SIR विवाद में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। Photograph: (The Sootr)
SIR विवाद में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में SIR प्रक्रिया के दौरान वोटर डिलीट किए जाने के आरोपों की SIT जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।
SIR controversy:विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर सवाल उठाते हुए एसआईटीजांच और कार्रवाई की मांग की गई है।
यह याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में मांग की गई है कि चुनाव आयोग द्वारा ऐसे सभी फैसलों को अवैध घोषित किया जाए, जिन्हें तीन सदस्यीय आयोग के बहुमत की सहमति के बिना लिया गया।
याचिका में दावा किया गया है कि इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर SIR को लेकर मतभेद सामने आने की बात कही गई थी। याचिका के मुताबिक, आयोग के तीन सदस्यों में से दो चुनाव आयुक्तों ने कई फैसलों पर औपचारिक रूप से असहमति दर्ज की थी।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि ऐसे सभी फैसले, दिशा-निर्देश, निर्देश और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों की जांच की जाए, जिन्हें CEC ज्ञानेश कुमार के तहत आयोग के सभी सदस्यों की सहमति के बिना शुरू, मंजूर या लागू किया गया।
याचिका में इसे संविधान के खिलाफ, अधिकार क्षेत्र से बाहर और शुरुआत से ही अमान्य घोषित करने की मांग की गई है।
याचिका में आधिकारिक फाइलों का हवाला दिया गया है। जिसमें दावा किया गया है कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दो चुनाव आयुक्तों- डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई।
याचिका के मुताबिक, इन आपत्तियों में आयोग के कुछ फैसलों पर सवाल उठाए गए थे। आरोप है कि कुछ फैसले एकतरफा लिए गए और जरूरी मंजूरी के बिना लागू किए गए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि चार बार एक ही दिन आपत्ति दर्ज की गई थी। हालांकि, ये सभी बातें याचिका में लगाए गए दावे हैं। इन पर सुप्रीम कोर्ट का कोई अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।
जनहित याचिका में सिर्फ CEC ज्ञानेश कुमार का नाम नहीं है। इसमें सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग और ECI की डायरेक्टर जनरल (इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने सक्षम वैधानिक प्राधिकरण को शिकायत दर्ज करने और Representation of the People Act, 1950 की धारा 32 के तहत अभियोजन शुरू करने के निर्देश देने की मांग की है। यह मांग उन अधिकारियों के खिलाफ की गई है, जो जांच के बाद आधिकारिक कर्तव्य के जानबूझकर उल्लंघन के दोषी पाए जाएं।
याचिका का एक बड़ा हिस्सा मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने SIR के दौरान मतदाता सूची से 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाए जाने के दावे की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की है।
याचिका में इस कथित वोटर डिलीशन की पूरी प्रक्रिया की जांच करने और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने की मांग की गई है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाने का दावा याचिका में किया गया है और यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रमाणित तथ्य या अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं है।
याचिका में मतदाता पंजीकरण से जुड़े Form 6 को लेकर भी मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित वैधानिक Form 6 को बहाल किया जाए।
इसके साथ ही याचिका में मांग की गई है कि सभी पात्र वयस्कों को मूल वैधानिक नियमों के आधार पर मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने की अनुमति दी जाए।
याचिका का मूल तर्क यह है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके फैसले आयोग के सदस्यों की वैधानिक भूमिका और बहुमत की व्यवस्था के अनुरूप होने चाहिए।
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि यदि आयोग के भीतर बहुमत की सहमति के बिना महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं, तो उनकी वैधता की न्यायिक समीक्षा जरूरी है।
इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट से SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं की जांच कराने की मांग की गई है।
फिलहाल यह मामला याचिका दायर किए जाने के स्तर पर है। याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार समेत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कई मांगें रखी गई हैं, लेकिन इन आरोपों पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।
याचिका को अधिवक्ता चांद कुरैशी के माध्यम से दाखिल किया गया है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुनवाई और आगे की कार्यवाही के बाद ही साफ होगा कि अदालत इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
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यह याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में मांग की गई है कि चुनाव आयोग द्वारा ऐसे सभी फैसलों को अवैध घोषित किया जाए, जिन्हें तीन सदस्यीय आयोग के बहुमत की सहमति के बिना लिया गया।
चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि ऐसे सभी फैसले, दिशा-निर्देश, निर्देश और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों की जांच की जाए, जिन्हें CEC ज्ञानेश कुमार के तहत आयोग के सभी सदस्यों की सहमति के बिना शुरू, मंजूर या लागू किया गया।
याचिका में इसे संविधान के खिलाफ, अधिकार क्षेत्र से बाहर और शुरुआत से ही अमान्य घोषित करने की मांग की गई है।
दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार जताई आपत्ति
याचिका के मुताबिक, इन आपत्तियों में आयोग के कुछ फैसलों पर सवाल उठाए गए थे। आरोप है कि कुछ फैसले एकतरफा लिए गए और जरूरी मंजूरी के बिना लागू किए गए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि चार बार एक ही दिन आपत्ति दर्ज की गई थी। हालांकि, ये सभी बातें याचिका में लगाए गए दावे हैं। इन पर सुप्रीम कोर्ट का कोई अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।
CEC समेत इन अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
याचिकाकर्ता ने सक्षम वैधानिक प्राधिकरण को शिकायत दर्ज करने और Representation of the People Act, 1950 की धारा 32 के तहत अभियोजन शुरू करने के निर्देश देने की मांग की है। यह मांग उन अधिकारियों के खिलाफ की गई है, जो जांच के बाद आधिकारिक कर्तव्य के जानबूझकर उल्लंघन के दोषी पाए जाएं।
SIR में 13 करोड़ वोटरों के नाम काटने की जांच की मांग
याचिका में इस कथित वोटर डिलीशन की पूरी प्रक्रिया की जांच करने और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने की मांग की गई है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाने का दावा याचिका में किया गया है और यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रमाणित तथ्य या अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं है।
Form 6 को फिर बहाल करने की मांग
इसके साथ ही याचिका में मांग की गई है कि सभी पात्र वयस्कों को मूल वैधानिक नियमों के आधार पर मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने की अनुमति दी जाए।
किस आधार पर दायर हुई याचिका?
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि यदि आयोग के भीतर बहुमत की सहमति के बिना महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं, तो उनकी वैधता की न्यायिक समीक्षा जरूरी है।
इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट से SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं की जांच कराने की मांग की गई है।
अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?
याचिका को अधिवक्ता चांद कुरैशी के माध्यम से दाखिल किया गया है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुनवाई और आगे की कार्यवाही के बाद ही साफ होगा कि अदालत इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
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