मेडिकल साइंस की नई खोज, 5 या 6 नहीं, शरीर में छिपे हैं पूरे 33 सेंस ऑर्गेन
समझें क्या है पूरा मामला
- वैज्ञानिकों ने इंसानी शरीर में एक इनविजिबल छठी इंद्रीय (सिक्स्थ सेंस) का पता लगाया है।
- इस अनोखे अंदरूनी सेंस को साइंस की भाषा में Interoception कहते हैं।
- ये सिस्टम दिमाग को शरीर के हर अंदरूनी बदलाव का अपडेट देता है।
- कमजोर इंटरोसेप्शन से लोगों में ईटिंग डिसऑर्डर और एंग्जायटी बढ़ जाती है।
- महिलाओं और पुरुषों में इस अंदरूनी इशारे को समझने की क्षमता अलग होती है।
क्या होती है इंसानी शरीर की छठी इंद्रीय
क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर के अंदर एक सीक्रेट सिग्नल सिस्टम काम करता है? हम सब बचपन से सिर्फ 5 सेंस ऑर्गन्स (आंख, कान, नाक, जीभ, त्वचा) के बारे में ही पढ़ते आ रहे हैं। लेकिन, साइंस की नई रिसर्च ने एक बड़ा खुलासा किया है। इंसानी शरीर में एक इनविजिबल सिक्स्थ सेंस भी मौजूद है।
इसे साइंटिस्ट्स इंटरोसेप्शन (Interoception) कह रहे हैं। आसान शब्दों में कहें तो, ये हमारे बॉडी और माइंड के बीच मजबूत कनेक्शन है। हालांकि, हमारी मानसिक सेहत की असली चाबी इसी के पास है। ये हमारे पूरे मूड और खुशियों को कंट्रोल करती है। आइए इसे डिटेल से समझें...
क्या है इंटरोसेप्शन का पूरा साइंस
विज्ञान की दुनिया में इसे इंटरोसेप्शन नाम दिया गया है। आप इसे शरीर का अंदरूनी मोबाइल नेटवर्क कह सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन की रिसर्चर जेनिफर मर्फी ने इस पर रिसर्च की है। उनके साथ रिसर्चर फ्रेया ने भी इस पर काम किया है।
उनके मुताबिक ये सेंस दिमाग को पल-पल की खबर देती है। ये कोई जादू नहीं, बल्कि हमारे शरीर का 'अंदरूनी मोबाइल नेटवर्क' है। ये सीधे हमारी मेंटल हेल्थ और खुशियों को कंट्रोल करता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये सेंस हमारे दिमाग को पल-पल की इनर अपडेट्स देता है। ये बताती है कि शरीर के अंदर क्या चल रहा है।
जैसे दिल की धड़कन तेज होना या सांसें भारी होना। भूख, प्यास, शरीर का तापमान और दिल की धड़कन जैसे संकेत यही सेंस दिमाग तक पहुंचाती है। अगर ये इंटरनल नेटवर्क कमजोर हो जाए, तो एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
पेट और दिमाग का गहरा कनेक्शन
जब पेट में मरोड़ उठती है, तो दिमाग तुरंत अलर्ट हो जाता है। मांसपेशियों में खिंचाव होने पर भी यह सिस्टम तुरंत सिग्नल भेजता है। इससे दिमाग समझ जाता है कि अंदर सब ठीक है या नहीं।
बहुत से लोगों को भूख लगते ही भयंकर गुस्सा आने लगता है। कुछ लोगों का मूड अचानक बहुत ज्यादा खराब हो जाता है। इसे अंग्रेजी की आम बोलचाल में हैंग्री होना कहते हैं।
जर्मनी में हुआ ये साइंटिफिक रिसर्च
जर्मनी में हाल ही में एक नया साइंटिफिक रिसर्च हुआ है। इस शोध में कुछ दिलचस्प बातें सामने आई हैं। जिन लोगों की ये छठी इंद्रीय बहुत मजबूत होती है, वे लोग भूख लगने पर भी कभी चिड़चिड़े नहीं होते।
उनका दिमाग शरीर के इन सिग्नलों को आराम से संभाल लेता है। ऐसे लोग हर मुश्किल परिस्थिति में बिल्कुल शांत बने रहते हैं। उनका बॉडी और माइंड का कनेक्शन बहुत मजबूत होता है।
तालमेल कमजोर होने से बढ़ती है बीमारी
रिसर्चर्स के मुताबिक, इस अंदरूनी समझ का असर खान-पान पर पड़ता है। इसकी कमी से वजन बढ़ने के डर जैसी बीमारियां होती हैं। लोग डर के मारे खाना-पीना तक पूरी तरह छोड़ देते हैं।
अमेरिका की UCLA यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने भी रिसर्च (human body) की है। बीमारी से ठीक होने के बाद भी मरीज का तालमेल कमजोर रहता है। उनके पेट और दिमाग का आपसी तालमेल ठीक नहीं हो पाता।
सिर्फ वजन ठीक होना पूरा पक्का इलाज नहीं
मरीज कई बार पेट के सिग्नलों को सही महसूस नहीं कर पाते। Scienceडॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ वजन ठीक होना इलाज नहीं है। दिमाग और शरीर के बीच इस बिगड़े रिश्ते को सुधारना जरूरी है।
तभी कोई भी मरीज पूरी तरह से सेहतमंद हो पाता है। इसके लिए इंटरनल सिग्नलों को समझना बहुत जरूरी माना गया है। इसके बिना कोई भी मेडिकल रिकवरी बिल्कुल अधूरी रहती है।
महिलाओं और पुरुषों में क्षमता क्यों होती है अलग
वैज्ञानिकों ने करीब 93 बेहतरीन रिसर्च का डीप रिसर्च किया है। इसके बाद डॉक्टरों ने एक बहुत ही अनोखा अंतर पाया है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ये कैपेसिटी थोड़ी अलग होती है।
महिलाएं दिल और शरीर के इन इंटरनल सिग्नल्स को अलग समझती हैं। यही वजह है कि महिलाओं में उदासी ज्यादा दिखती है। उनमें एंग्जायटी की समस्या भी पुरुषों से ज्यादा देखने को मिलती है।
क्या इंसानी शरीर में कुल 33 सेंस होते हैं
हालांकि, कुछ मॉडर्न साइंटिस्ट एक और नया दावा भी करते हैं। उनके मुताबिक, इंसान के पास सिर्फ पांच या छह इंद्रियां नहीं हैं। इंसानी शरीर में बल्कि कुल 33 तक अलग-अलग सेंस हो सकते हैं।
इस बड़े विश्लेषण से साफ पता चलता है कि शरीर बातचीत करता है। हमारा शरीर लगातार हमसे इंटरनल कन्वर्सेशन (mental health) करता रहता है। इन इंटरनल कन्वर्सेशन को समझना फ्यूचर के लिए बहुत जरूरी है।
फ्यूचर में मेन्टल इलनेस का होगा बेहतर इलाज
इन सिग्नलों को समझने से इलाज का नया रास्ता खुलेगा। फ्यूचर में मेन्टल इलनेस का बहुत बेहतर इलाज हो सकेगा। ये खोज मेडिकल साइंस के फिल्ड में बड़ी क्रांति ला सकती है।
जिस छठी इंद्रीय को अब तक सिर्फ रहस्य माना जाता था। वही अब हमारी सेहत की सबसे जरूरी गार्ड साबित हुई है। ये हमारे शरीर को अंदर से पूरी तरह सुरक्षित रखती है।
Reference Links:
london.ac.uk (University of London Researchers)
ucla.edu (UCLA University Study)
FAQ
- विज्ञान की भाषा में इंसानी शरीर की छठी इंद्रीय या सिक्स्थ सेंस क्या है?
विज्ञान की भाषा में इसे इंटरोसेप्शन कहा जाता है। यह हमारे शरीर का एक अंदरूनी नेटवर्क है, जो दिल की धड़कन, सांसों की गति और पेट के सिग्नलों को सीधे हमारे दिमाग तक पल-पल पहुंचाता रहता है। - कमजोर इंटरोसेप्शन का हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?
जब दिमाग और शरीर का आपसी तालमेल कमजोर होता है, तो एंग्जायटी, उदासी और खान-पान से जुड़ी गंभीर मानसिक बीमारियां बढ़ने लगती हैं। मरीज भूख और पेट के सही सिग्नलों को ठीक से महसूस नहीं कर पाता है। - क्या महिलाओं और पुरुषों में इस छठी इंद्रीय की क्षमता अलग होती है?
हां, वैज्ञानिकों की रिसर्च के अनुसार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में इन अंदरूनी सिग्नलों को समझने की क्षमता अलग होती है। इसी वजह से महिलाओं में चिंता और उदासी की समस्या थोड़ी ज्यादा दिखती है।
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