स्मार्टफोन से घटी जन्म दर: नई स्टडी में दावा, देंखे 20 साल का फर्टिलिटी रेट

Jitendra Shrivastava | Jun 12, 2026, 17:43 IST
Photograph: (THESOOTR)
INTERNATIONAL DESK. नई रिसर्च में पाया गया कि आईफोन के आने के बाद से दुनिया में जन्म दर तेजी से घटी है। सबसे ज्यादा असर 15 से 24 साल के युवाओं पर पड़ा है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • नई रिसर्च में बड़ा दावा, फोन बदल रहा है रिश्ते।
  • क्या आईफोन की वजह से कम पैदा हो रहे हैं बच्चे।
  • स्मार्टफोन और गिरती जन्म दर का चौंकाने वाला कनेक्शन।
  • 2007 से क्यों घट रही दुनिया की जन्म दर।
  • टीनएजर्स पर स्मार्टफोन का असर सबसे ज्यादा।

साल 2007 में जब एप्पल ने पहला आईफोन लॉन्च किया, उसी साल से दुनिया में जन्म दर घटना शुरू हुई। अब दो नई रिसर्च में दावा किया गया है कि स्मार्टफोन का इस गिरावट से सीधा संबंध हो सकता है। अमेरिका में फर्टिलिटी रेट 22 प्रतिशत तक गिर चुकी है, और सबसे ज्यादा असर युवाओं पर देखा गया है। आखिर रिसर्चर्स ने क्या पाया, जानिए पूरी रिपोर्ट में।



2007 से लगातार घट रही जन्म दर

दुनिया में जन्म दर साल 2007 से लगातार घट रही है। यही वह साल था जब एप्पल ने पहला आईफोन लॉन्च किया था। दो नई रिसर्च में पाया गया है कि स्मार्टफोन का इससे सीधा संबंध हो सकता है। अमेरिका में फर्टिलिटी रेट 22 प्रतिशत तक गिर चुकी है। सबसे ज्यादा असर 15 से 24 साल के युवाओं पर देखा गया है।



स्मार्टफोन और घटती फर्टिलिटी रेट

साल 2007 से पहले अमेरिका में जन्म दर लगभग स्थिर थी। हर हजार महिलाओं पर 65 से 70 बच्चे पैदा होते थे, लेकिन 2007 के बाद यह संख्या घटने लगी।



2024 तक यह आंकड़ा घटकर 54 पर आ गया। पहले माना जाता था कि 2008 की मंदी इसकी वजह है, लेकिन मंदी खत्म होने के बाद भी जन्म दर नहीं बढ़ी।



smartphone से घटती जन्म दर


आईफोन पर खास रिसर्च...

मिडलबरी कॉलेज की स्टडी

मिडलबरी कॉलेज की अर्थशास्त्री केटलिन मायर्स और उनके छात्र ईजेकील हूपर ने एक खास तरीका अपनाया। पहला आईफोन जून 2007 में आया था। शुरुआत में यह सिर्फ एटीएंडटी (AT&T – American Telephone and Telegraph) नेटवर्क पर ही मिलता था।



यह सुविधा फेब्रुअरी 2011 तक सिर्फ इसी कंपनी के पास थी। रिसर्चर्स ने उन काउंटियों की तुलना की जहां एटीएंडटी की कवरेज ज्यादा थी, उनसे जहां कम थी।



नतीजा चौंकाने वाला निकला। जिन इलाकों में आईफोन ज्यादा उपलब्ध था, वहां जन्म दर ज्यादा घटी।



टीन बर्थ रेट बिना एटीएंडटी कवरेज वाले इलाकों में 13.8 प्रतिशत घटी। आंशिक कवरेज वाले इलाकों में यह गिरावट 18.9 प्रतिशत रही। ज्यादा कवरेज वाले इलाकों में यह आंकड़ा 26 प्रतिशत तक पहुंच गया।



नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च (NBER – National Bureau of Economic Research) में प्रकाशित इस पेपर के मुताबिक, आईफोन का असर जनरल फर्टिलिटी रेट में 33 से 52 प्रतिशत गिरावट के लिए जिम्मेदार हो सकता है। यह असर 15 से 44 साल की महिलाओं पर देखा गया। सबसे ज्यादा प्रभाव 15 से 24 साल के युवाओं पर पड़ा।



सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी की स्टडी

मई 2026 में सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी के नाथन हडसन और हर्नान मोस्कोसो बोएडो ने एक और स्टडी की। उन्होंने सौ से ज्यादा देशों का डेटा देखा।



उन्होंने पाया कि स्मार्टफोन के आने के बाद टीनएज प्रेगनेंसी की दर तेजी से गिरी। यह ट्रेंड अलग-अलग संस्कृति और इकोनॉमी वाले देशों में भी एक जैसा रहा।



हालांकि 25 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं पर यह असर नहीं दिखा। यह वर्ग कुल जन्मों का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा है। इसलिए यह स्टडी पूरी गिरावट की वजह नहीं बताती।



एलन मस्क ने क्या कहा?

टेस्ला और स्पेसएक्सके सीईओ एलन मस्क ने6 जून 2026को एक्स पर पोस्टकिया। उन्होंनेलिखा कि भारत की जन्मदर रिप्लेसमेंटलेवल से नीचे आगई है। उन्होंनेयह भी कहा किपढ़े-लिखे भारतीयों में यहदर कई साल पहलेही इस स्तर से नीचेगिर चुकी थी।





मस्क एकमीडिया रिपोर्टको शेयर कर रहे थे।उस रिपोर्ट में दइकोनॉमिस्ट के एक लेख काहवाला दिया गया था।लेख का शीर्षक थाकि भारत कीआबादी जल्द ही घटने लगेगी,और यह काफीतेजी से होगा।



आखिर स्मार्टफोन ने क्या बदला

  • रिसर्चर्स का मानना है कि स्मार्टफोन ने युवाओं के समय बिताने का तरीका बदल दिया।
  • पहले लोग आमने-सामने मिलते थे, अब ज्यादा समय ऑनलाइन बीतता है।
  • इससे रिश्ते बनने की संभावना कम हो गई है। जब रिश्ते कम बनते हैं, तो बच्चों की संख्या भी घटती है।
  • यह सीधा कारण नहीं है, बल्कि एक सामाजिक बदलाव का संकेत है।
smartphone fertility rate


भारत समेत कई देशों में असर

यह सिर्फ अमेरिका की बात नहीं है। भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और कई यूरोपीय देशों में भी जन्म दर घट रही है। हालांकि, हर देश में इसके अलग-अलग कारण भी हैं। महंगाई, हाउसिंग की कीमत, करियर की प्राथमिकता और शादी में देरी जैसे फैक्टर भी अहम हैं।



क्या यह सिर्फ शुरुआत है या पूरी तस्वीर

रिसर्चर्स साफ कहते हैं कि आईफोन या स्मार्टफोन को अकेला कारण नहीं माना जा सकता। यह एक बड़ी सामाजिक तस्वीर का हिस्सा है।



लेकिन इस स्टडी से एक बात साफ होती है। तकनीक का असर सिर्फ काम या मनोरंजन तक सीमित नहीं है। यह हमारे रिश्तों और निजी फैसलों को भी प्रभावित कर रही है। आने वाले समय में इस विषय पर और रिसर्च हो सकती है।



भारत में पिछले 20 वर्षों में जन्म दर (Crude Birth Rate – CBR) में लगातार गिरावट आई है। CBR को प्रति 1,000 लोगों पर जन्म के रूप में मापा जाता है।



वर्ष 2000 के आसपास भारत की जन्म दर लगभग 25–26 जन्म प्रति 1,000 लोग थी, जबकि 2020 तक यह घटकर लगभग 17–18 जन्म प्रति 1,000 लोग हो गई।



2025 के लिए नवीनतम जन्म दर आंकड़ा उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 16.9–17.0 प्रति 1,000 लोग है। यह पिछले सालों के गिरते हुए रुझान को जारी रखता है।



भारत में जन्मदर की संक्षिप्त तालिका:

वर्षजन्म दर (CBR, प्रति 1,000 लोग)
200025.5
200523.8
201021.5
201519.3
202017.7
202517.0

मुख्य कारण: परिवार नियोजन, शिक्षा, महिलाओं की सामाजिक भागीदारी, आर्थिक और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार।



सोर्स: [World Bank Data – India Birth Rate]


- Registrar General & Census of India, Vital Statistics Reports (2000–2020)



एक्सपर्ट कोट्स...



मिडलबरी कॉलेज की अर्थशास्त्री केटलिन मायर्स ने कहा कि लोग अब वे रिश्ते नहीं बना रहे जिनसे बच्चे होते हैं। (स्रोत: Axios)



वेलेस्ली कॉलेज के अर्थशास्त्री फिलिप बी. लेविन ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा कि आईफोन उन सामाजिक बदलावों का एक उदाहरण है जिनसे जन्म दर में गिरावट आई है। (स्रोत: Axios)



जर्मनी की जनसंख्या रिसर्चर डॉ. कारमेन फ्रेडरिच ने कहा कि बच्चे पैदा करना आज भी युवाओं के लिए जरूरी लक्ष्य है, लेकिन फैसले अब टाले जा रहे हैं। (स्रोत: Euronews)



FAQ

  1. क्या आईफोन सीधे तौर पर जन्म दर घटाता है?
    नहीं, रिसर्चर्स इसे सीधा कारण नहीं मानते। यह सामाजिक बदलाव का एक संकेत है। आईफोन से जुड़ा डेटा सिर्फ एक मजबूत संबंध दिखाता है।
  2. किस उम्र के लोगों पर सबसे ज्यादा असर हुआ?
    सबसे ज्यादा असर 15 से 24 साल के युवाओं पर देखा गया। 25 साल से ऊपर की महिलाओं पर असर बहुत कम मिला। टीन बर्थ रेट में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई।
  3. यह स्टडी किसने और कब की?
    यह स्टडी मिडलबरी कॉलेज और सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने की है। मिडलबरी का पेपर हाल में नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च में प्रकाशित हुआ। दूसरी स्टडी मई 2026 में आई थी।

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