दिमाग ऐसा कि IIT हो गया मुरीद, 19 साल के निसर्ग अधिकारी ने खोली थी CBSE की पोल
Anjali Dwivedi | Jun 11, 2026, 19:01 IST
निसर्ग अधिकारी
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के 19 वर्षीय Nisarga Adhikary ने CBSE के OSM पोर्टल की गंभीर खामियां उजागर कीं। बिना डिग्री के IIT कानपुर के C3iHub में OSINT इंजीनियर के रूप में नियुक्त हुए।
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के 19 वर्षीय निसर्ग अधिकारी ने वह काम कर दिखाया, जो बड़े-बड़े साइबर एक्सपर्ट्स नहीं कर पाए। उन्होंने CBSE के OSM पोर्टल में ऐसी गंभीर खामियां ढूंढ निकालीं, जिनसे लाखों छात्रों के नंबरों से छेड़छाड़ हो सकती थी।
निसर्ग के पास कोई डिग्री नहीं है और वे अभी 12वीं के छात्र हैं। फिर भी IIT कानपुर ने उन्हें अपने साइबर सुरक्षा इनोवेशन हब C3iHub में OSINT और थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के रूप में रख लिया। आईआईटी कानपुर के निदेशक मनींद्र अग्रवाल ने खुद उनका ब्लॉग पढ़कर उनसे संपर्क किया।
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Nisarga Adhikary की कहानी किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है। उन्होंने महज छह-सात साल की उम्र में कोडिंग सीखना शुरू किया था। जब वे क्लास 6th में थे, तभी से उन्होंने CTF साइबर सुरक्षा प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। यह वे प्रतियोगिताएं होती हैं जिनमें प्रतिभागियों को जानबूझकर बनाई गई कमजोर प्रणालियों को हैक करना होता है।
उनके माता-पिता दोनों वित्त क्षेत्र में काम करते हैं। यानी साइबर सुरक्षा की दुनिया से उनका कोई घर का रिश्ता नहीं था। सब कुछ उन्होंने खुद सीखा।
मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में Nisarga ने कहा, पहले की नौकरियों में मैं मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करता था। साइबर सुरक्षा मेरा शौक था।
CBSE का OSM पोर्टल बेहद संवेदनशील है। इसी पर देशभर के लाखों छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की ऑनलाइन जांच होती है। इसमें करीब 18 लाख परीक्षार्थियों का डेटा था। फरवरी 2026 में Nisarga ने पहली बार CBSE को इस पोर्टल की कमजोरियों की जानकारी दी। लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो Nisarga ने 22 मई 2026 को अपने ब्लॉग पर एक विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट प्रकाशित की। इसमें उन्होंने सभी खामियों को खुलकर सामने रखा।
उन्होंने खुलासा किया कि पोर्टल में एक हार्डकोडेड मास्टर पासवर्ड खुले टेक्स्ट में लिखा हुआ था। OTP (One Time Password) की जांच क्लाइंट साइड पर होती थी जिसे आसानी से बायपास किया जा सकता था। कोई भी व्यक्ति किसी भी परीक्षक का रूप धारण करके छात्रों के नंबर बदल सकता था।
Nisarga ने बाद में बताया, मुझे पोर्टल की सभी खामियां ढूंढने में एक घंटे से भी कम समय लगा। इसके लिए प्रोग्रामिंग जानना भी जरूरी नहीं था। बस Ctrl+F और थोड़ी-सी समझ काफी थी। यह मेरी जिंदगी की सबसे आसान हैक थी।
CBSE ने
ब्लॉग पोस्ट वायरल होने के बाद CBSE पर भारी दबाव आया। बोर्ड ने IIT मद्रास और IIT कानपुर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों से मदद मांगी। IIT कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ टीम ने 24 मई से करीब दो हफ्ते तक काम करके पोर्टल की सभी खामियां दुरुस्त कीं।
इस पूरी प्रक्रिया में Nisarga को दिल्ली बुलाया गया। उन्होंने IIT की टीम को सभी कमजोर बिंदु दिखाए और मदद की।
जब प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल ने Nisarga का ब्लॉग पढ़ा तो वे इस 19 वर्षीय युवक की काबिलियत से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने खुद उनसे संपर्क किया। आईआईटी कानपुर ने तेजी से काम किया और Nisarga को अपने Cyber security इनोवेशन हब C3iHub में पूर्णकालिक रूप से रख लिया।
उनकी भूमिका OSINT (Open-Source Intelligence) और थ्रेट इंटेलिजेंस की होगी। आगे चलकर वल्नरेबिलिटी असेसमेंट और पेनिट्रेशन टेस्टिंग में भी काम बढ़ सकता है।
IIT कानपुर की ओर से कहा गया, Nisarga Adhikary को हमारी साइबर सुरक्षा टीम में इंजीनियर के रूप में नियुक्त किया गया है। कुछ साल पहले भी हमने इसी तरह कुछ युवा इंजीनियरों को इसी टीम के लिए रखा था।
Nisarga की नियुक्ति इसलिए और भी खास है क्योंकि उनके पास कोई औपचारिक कॉलेज डिग्री नहीं है। वे एक सेल्फ-टॉट यानी खुद से सीखे हुए डेवलपर और रिसर्चर हैं।
उनका यह सफर उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सोचते हैं कि बिना डिग्री के कुछ नहीं हो सकता। Nisarga ने साबित किया कि असली हुनर और जिम्मेदाराना तरीके से उसका इस्तेमाल करना किसी भी डिग्री से बड़ा होता है।
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निसर्ग के पास कोई डिग्री नहीं है और वे अभी 12वीं के छात्र हैं। फिर भी IIT कानपुर ने उन्हें अपने साइबर सुरक्षा इनोवेशन हब C3iHub में OSINT और थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के रूप में रख लिया। आईआईटी कानपुर के निदेशक मनींद्र अग्रवाल ने खुद उनका ब्लॉग पढ़कर उनसे संपर्क किया।
Nisarga-Adhikary
छह साल की उम्र में शुरू की कोडिंग
उनके माता-पिता दोनों वित्त क्षेत्र में काम करते हैं। यानी साइबर सुरक्षा की दुनिया से उनका कोई घर का रिश्ता नहीं था। सब कुछ उन्होंने खुद सीखा।
मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में Nisarga ने कहा, पहले की नौकरियों में मैं मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करता था। साइबर सुरक्षा मेरा शौक था।
CBSE का पोर्टल और करोड़ों छात्रों का डेटा
एक घंटे से कम समय में खुली पोल
उन्होंने खुलासा किया कि पोर्टल में एक हार्डकोडेड मास्टर पासवर्ड खुले टेक्स्ट में लिखा हुआ था। OTP (One Time Password) की जांच क्लाइंट साइड पर होती थी जिसे आसानी से बायपास किया जा सकता था। कोई भी व्यक्ति किसी भी परीक्षक का रूप धारण करके छात्रों के नंबर बदल सकता था।
Nisarga ने बाद में बताया, मुझे पोर्टल की सभी खामियां ढूंढने में एक घंटे से भी कम समय लगा। इसके लिए प्रोग्रामिंग जानना भी जरूरी नहीं था। बस Ctrl+F और थोड़ी-सी समझ काफी थी। यह मेरी जिंदगी की सबसे आसान हैक थी।
CBSE ने IIT की मदद ली
इस पूरी प्रक्रिया में Nisarga को दिल्ली बुलाया गया। उन्होंने IIT की टीम को सभी कमजोर बिंदु दिखाए और मदद की।
IIT निदेशक ने खुद उठाया फोन
उनकी भूमिका OSINT (Open-Source Intelligence) और थ्रेट इंटेलिजेंस की होगी। आगे चलकर वल्नरेबिलिटी असेसमेंट और पेनिट्रेशन टेस्टिंग में भी काम बढ़ सकता है।
IIT कानपुर की ओर से कहा गया, Nisarga Adhikary को हमारी साइबर सुरक्षा टीम में इंजीनियर के रूप में नियुक्त किया गया है। कुछ साल पहले भी हमने इसी तरह कुछ युवा इंजीनियरों को इसी टीम के लिए रखा था।
डिग्री नहीं, हुनर है
उनका यह सफर उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सोचते हैं कि बिना डिग्री के कुछ नहीं हो सकता। Nisarga ने साबित किया कि असली हुनर और जिम्मेदाराना तरीके से उसका इस्तेमाल करना किसी भी डिग्री से बड़ा होता है।
FAQ
- Nisarga Adhikary ने CBSE के OSM पोर्टल में क्या खामी पकड़ी थी?
Nisarga ने पाया कि CBSE के OSM पोर्टल में मास्टर पासवर्ड खुले टेक्स्ट में लिखा था, OTP की जांच आसानी से बायपास हो सकती थी और कोई भी किसी भी परीक्षक का रूप धारण करके छात्रों के नंबर बदल सकता था। करीब 18 लाख परीक्षार्थियों का डेटा खतरे में था। - IIT कानपुर ने Nisarga को किस पद पर रखा है?
IIT कानपुर ने Nisarga को अपने साइबर सुरक्षा इनोवेशन हब C3iHub में OSINT और थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के रूप में नियुक्त किया है। यह एक संविदा आधारित (Contractual) नियुक्ति है। IIT के निदेशक मनींद्र अग्रवाल ने खुद उनका ब्लॉग पढ़कर उनसे संपर्क किया था। - Nisarga Adhikary कौन हैं और उनकी पढ़ाई-लिखाई क्या है?
Nisarga पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के 19 वर्षीय युवक हैं। उन्होंने 6-7 साल की उम्र में कोडिंग शुरू की और छठी कक्षा से साइबर सुरक्षा प्रतियोगिताओं में भाग लेने लगे। उनके पास अभी कोई औपचारिक कॉलेज डिग्री नहीं है।
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CBSE री-इवैल्यूएशन डेडलाइन बढ़ी: अब 7 जून तक कर सकते हैं आवेदन
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