बिना बदलाव छपेगी सोनिया गांधी की बुक बिलॉन्गिंग, सिर्फ भारत में क्यों अटकी
सोचकर देखिए। एक किताब अमेरिका, यूरोप और बाकी दुनिया में बिना किसी सेंसरशिप के छप रही है। लेकिन वही किताब भारत में आने से पहले रुक जाती है।
यही सवाल अब सोनिया गांधी की मेमोयर को लेकर उठ रहा है। इधर कांग्रेस ने इसे सीधे लोकतंत्र से जोड़ दिया है।
समझें क्या है मामला
सोनिया गांधी की किताब "Belonging: A Journey of Love" 10 नवंबर को दुनिया भर में रिलीज होनी है। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने भारत में इसे छापने से इनकार कर दिया है। कांग्रेस नेता अशोक गहलोत का कहना है कि पेंगुइन वर्ल्ड वाइड किताब को बिना बदलाव छापने को तैयार था, लेकिन भारतीय में इसने मोदी, RSS और चीन से जुड़े हिस्से हटाने की मांग रखी है। सोनिया गांधी ने इससे इनकार कर दिया।
यह मामला आपसे क्यों जुड़ा है?
अगर एक ही किताब दुनिया में एक तरह से छपे और भारत में दूसरी तरह से, तो सवाल यह बनता है कि आप बतौर पाठक असली कहानी पढ़ पा रहे हैं या नहीं। यह सिर्फ एक नेता की किताब का मुद्दा नहीं रह गया। यह इस बात का मुद्दा भी बन गया है कि प्रकाशक भारतीय पाठकों को क्या पढ़ने लायक समझते हैं।
क्या है सोनिया गांधी की इस किताब में
सोनिया गांधी की यह मेमोयर उनकी जिंदगी, प्रेम और प्रधानमंत्री पद ठुकराने के फैसले को फिर से बयां करेगी। इसे अमेरिकी प्रकाशक अल्फ्रेड ए नॉफ छाप रहा है, जो पेंगुइन रैंडम हाउस का ही हिस्सा है। भारत में यह किताब मूल रूप से पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के जरिए छपकर बाजार में आनी थी।
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के लिए यह पहला ऐसा विवाद नहीं है। इसी साल कंपनी जो सैको की मुजफ्फरनगर दंगों पर किताब और पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की किताब को लेकर भी विवादों में रह चुकी है।
Core Explanation: विवाद क्या हुआ और क्यों
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने अपने बयान में कहा कि फैक्ट चेक और संपादकीय सुझाव देना उसकी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। कंपनी ने कहा कि वह किताब छापने के लिए तैयार है।
लेकिन कांग्रेस नेताओं ने इस सफाई को खारिज कर दिया है। अशोक गहलोत ने एक्स पर लिखा कि पेंगुइन वर्ल्डवाइड सोनिया गांधी की किताब को उसके मूल रूप में दुनिया भर में छापने को तैयार है, जबकि पेंगुइन इंडिया भारत में रिलीज के लिए बदलाव चाहता है।
गहलोत ने पूछा, आखिर ऐसी कौन सी वजह या दबाव है कि जो दुनिया भर में छप सकता है, वो भारत में नहीं छप सकता। गहलोत यहीं नहीं रुके। उन्होंने इसे सीधे लोकतंत्र से जोड़ते हुए कहा, "यह लोकतंत्र की हत्या है।" उनका कहना था कि असली मुद्दा यह है कि मोदी, RSS और चीन की सीमा घुसपैठ से जुड़े हिस्सों को हटाने का दबाव डाला गया।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है। उन्होंने पूछा कि क्या प्रकाशक यह फैसला अपने आप ले रहा है या किसी और के दबाव में?
लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने पेंगुइन के बयान को कमजोर बताया। उनका तर्क था कि यही प्रकाशक मोदी की किताब "एग्जाम वॉरियर्स" और RSS पर कई किताबें बिना झिझक छापता है।
कांग्रेस सेवा दल के प्रमुख बी वी श्रीनिवास ने भी पेंगुइन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रकाशक पर संपादकीय स्वतंत्रता से समझौता करने का आरोप लगाया और तंज कसते हुए कहा कि "रीढ़ की हड्डी होती तो प्रकाशक कहलाते।"
लेकिन दूसरी तरफ से तस्वीर अलग दिखती है। भाजपा नेता अमित मालवीय पहले ही पूछ चुके हैं कि जब किताब खुद सोनिया गांधी की लिखी है, तो उसमें फैक्ट चेक की जरूरत किस बात की। पेंगुइन ने भी दोहराया है कि उसने कोई राजनीतिक फैसला नहीं लिया, बल्कि यह हर किताब के लिए सामान्य प्रक्रिया है।
सवाल यह है, आखिर सच कहां है? कांग्रेस के आरोप अभी तक किसी स्वतंत्र सबूत से पुष्ट नहीं हुए हैं। पेंगुइन का दबाव वाला आरोप स्वीकार करना तो दूर, कंपनी ने इसे साफ खारिज किया है।
नेहरू गांधी परिवार ने कितनी किताबें लिखीं
- जवाहरलाल नेहरू
- लेटर्स फ्रॉम अ फादर टू हिज डॉटर (1929)
- ग्लिम्पसेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री (1934)
- एन ऑटोबायोग्राफी / टुवर्ड्स फ्रीडम (1936)
- द डिस्कवरी ऑफ इंडिया (1946)
- इंदिरा गांधी
- माय ट्रुथ (1980) — यह इंटरव्यू पर आधारित किताब है, फ्रांसीसी पत्रकार इमैनुएल पूशपादास के साथ मिलकर तैयार हुई।
- सोनिया गांधी
- फ्रीडम्स डॉटर (1989, संपादित)
- राजीव (1992)
- राजीव्स वर्ल्ड (1994)
- टू अलोन, टू टुगेदर (करीब 2004-05, संपादित)
- बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव (2026, आने वाली)
- मेनका गांधी
- ब्रह्मा'स हेयर (1989)
- हेड्स एंड टेल्स
- द सेकंड हेड्स एंड टेल्स
- रेनबो एंड अदर स्टोरीज
- बुक ऑफ हिंदू नेम्स / द कम्प्लीट बुक ऑफ हिंदू नेम्स
- कम्प्लीट बुक ऑफ मुस्लिम एंड पारसी नेम्स
- फर्स्ट एड फॉर एनिमल्स
- एनिमल लॉज़ ऑफ इंडिया
- द बुक ऑफ ट्रीज़: अ वसुधैव कुटुम्बकम पर्सपेक्टिव
- देयर्स अ मॉन्स्टर अंडर माय बेड
- वरुण गांधी
- द अदरनेस ऑफ सेल्फ (2000, कविता संग्रह)
- स्टिलनेस (2015, कविता संग्रह)
- अ रूरल मैनिफेस्टो: रियलाइजिंग इंडियाज फ्यूचर थ्रू हर विलेजेज (2018)
- द इंडियन मेट्रोपोलिस: डीकंस्ट्रक्टिंग इंडियाज अर्बन स्पेसेज (2023)
- राजीव गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा
- इनके नाम कोई प्रकाशित किताब सामने नहीं आती।
दोनों sides की बात
कांग्रेस का कहना है कि यह सीधा-सीधा सेंसरशिप है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि जो किताब दुनिया भर में बिना बदलाव छप सकती है, उसे भारत में क्यों रोका जा रहा है। कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र से जोड़ रही है।
दूसरी तरफ पेंगुइन का कहना है कि यह पूरी तरह सामान्य संपादकीय प्रक्रिया है। कंपनी के मुताबिक हर लेखक की किताब पर फैक्ट चेक और सुझाव देना उसकी जिम्मेदारी है, चाहे लेखक कोई भी हो। भाजपा ने भी इसी तर्क का समर्थन किया है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि दबाव का आरोप अभी सिर्फ कांग्रेस नेताओं का बयान है, स्वतंत्र रूप से पुष्ट तथ्य नहीं।
MP और RJ कनेक्शन
इस पूरे विवाद में सबसे तीखी प्रतिक्रिया देने वाले दो बड़े नाम राजस्थान और मध्य प्रदेश से ही आए हैं। पूर्व राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे लोकतंत्र की हत्या तक बता दिया। पूर्व मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रकाशक की स्वतंत्रता पर ही सवाल उठा दिया। दोनों नेता अपने-अपने राज्यों में कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ चेहरे माने जाते हैं, इसलिए उनकी टिप्पणियों का असर MP और RJ की सियासत में भी महसूस किया जा रहा है।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर इस पर है कि भारत में किताब कौन छापेगा। हार्पर कॉलिंस के साथ बातचीत आखिरी दौर में बताई जा रही है। यह भी देखना होगा कि क्या भारतीय संस्करण में वही हिस्से शामिल होंगे जो अंतरराष्ट्रीय संस्करण में हैं, या कुछ बदलाव के साथ आएंगे। 10 नवंबर की वैश्विक रिलीज पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
एक बात जो आप नहीं जानते थे
कांग्रेस के मुताबिक पेंगुइन वर्ल्डवाइड और पेंगुइन इंडिया की स्थिति इस मामले में अलग- अलग बताई जा रही है। यानी एक ही कंपनी समूह के भीतर दो अलग रुख की बात सामने आ रही है, जो इस विवाद को और पेचीदा बना देती है।
FAQ
- गहलोत ने पेंगुइन विवाद को क्या कहा?
अशोक गहलोत ने इसे "लोकतंत्र की हत्या" बताया और आरोप लगाया कि मोदी, RSS और चीन घुसपैठ वाले हिस्से हटाने का दबाव था। - क्या पेंगुइन वर्ल्डवाइड और पेंगुइन इंडिया का रुख अलग है?
कांग्रेस के मुताबिक हां, पेंगुइन वर्ल्डवाइड किताब बिना बदलाव छापने को तैयार था जबकि पेंगुइन इंडिया ने बदलाव मांगे। पेंगुइन ने इसका खंडन किया है। - गौरव गोगोई ने पेंगुइन पर क्या आरोप लगाया?
गौरव गोगोई ने पेंगुइन के बयान को कमजोर बताया और कहा कि वही प्रकाशक मोदी और RSS से जुड़ी किताबें बिना झिझक छापता है।
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