शेयर बाजार में बड़ा झटका: एक दिन में 13 लाख करोड़ डूबे, सेंसेक्स 2497 अंक टूटा, निफ्टी धड़ाम

Pawan Modiya | Mar 19, 2026, 17:47 IST
Photograph: (the sootr)
19 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले 22 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। सेंसेक्स 2497 अंक यानी 3.26% गिरकर 74,207 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 776 अंक टूटकर 23,002 के स्तर पर पहुंच गया।

भारतीय शेयर बाजार में 19 मार्च का दिन निवेशकों के लिए भारी साबित हुआ। बाजार में अचानक आई तेज गिरावट ने 22 महीनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। लेकिन इस खबर को सिर्फ अंकों में समझना काफी नहीं है—असल कहानी निवेशकों के भरोसे और वैश्विक हालात से जुड़ी है।



निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट

इस गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की जेब पर पड़ा। एक ही दिन में करीब 13 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति साफ हो गई।



BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 439 लाख करोड़ रुपए से घटकर 426 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। यानी लाखों निवेशकों की पूंजी पर सीधा असर पड़ा।



सेंसेक्स-निफ्टी में तेज गिरावट

  • सेंसेक्स 2497 अंक गिरकर 74,207 पर बंद हुआ
  • निफ्टी 776 अंक टूटकर 23,002 पर आ गया

यह गिरावट करीब 3.26% की रही, जो पिछले 22 महीनों में सबसे बड़ी मानी जा रही है।



एक दिन पहले थी तेजी, फिर अचानक गिरावट

दिलचस्प बात यह है कि एक दिन पहले यानी 18 मार्च को बाजार में तेजी थी।



  • सेंसेक्स 633 अंक चढ़ा था
  • निफ्टी 197 अंक बढ़ा था

लेकिन अगले ही दिन माहौल पूरी तरह बदल गया। इससे साफ है कि बाजार अभी बहुत अस्थिर (volatile) बना हुआ है।



सबसे ज्यादा असर किन सेक्टरों पर पड़ा

बैंकिंग सेक्टर दबाव में

बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई। HDFC, SBI और ICICI जैसे बड़े शेयरों में गिरावट आई।



ऑटो सेक्टर भी फिसला

ऑटो कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। महंगाई और बढ़ती लागत का असर इन कंपनियों पर दिखा।



HDFC बैंक चेयरमैन के इस्तीफे का असर

HDFC बैंक को भी बड़ा झटका लगा। बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद शेयर में करीब 5% की गिरावट आई। उन्होंने अपने इस्तीफे में बैंक के कामकाज पर सवाल उठाए, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ। अब केकी मिस्त्री को 3 महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन बनाया गया है।



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गिरावट के पीछे क्या वजह है?

इस गिरावट की वजह सिर्फ देश के अंदर की नहीं, बल्कि वैश्विक हालात भी हैं।



1. युद्ध जैसे हालात

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। इससे दुनिया भर में अनिश्चितता बढ़ी है।



2. महंगा

कच्चे तेल के दाम 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा है।



3. ग्लोबल मार्केट का असरकच्चा तेल

अमेरिका और एशिया के बाजारों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।



आम निवेशकों के लिए क्या संकेत?

यह गिरावट निवेशकों के लिए एक चेतावनी भी है और एक मौका भी।



चेतावनी इसलिए:



  • बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है
  • छोटे निवेशकों को ज्यादा नुकसान हो सकता है

मौका इसलिए:



  • अच्छे शेयर सस्ते दाम पर मिल सकते हैं
  • लंबी अवधि के निवेश के लिए यह सही समय हो सकता है

जब दुनिया में तनाव बढ़ता है, तेल महंगा होता है और कंपनियों का खर्च बढ़ता है तो उनका मुनाफा कम होता है। ऐसे में निवेशक डरकर शेयर बेचते हैं। यही वजह है कि बाजार गिरता है।



शेयर बाजार की यह गिरावट सिर्फ एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि यह वैश्विक और आर्थिक संकेतों का नतीजा है। निवेशकों को ऐसे समय में घबराने के बजाय सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए। बाजार में गिरावट आती-जाती रहती है, लेकिन समझदारी से किया गया निवेश ही लंबे समय में फायदा देता है।



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