महंगे हवाई टिकट पर SC ने लगाई फटकार, केंद्र सरकार से मांगा जवाब
समझें क्या है पूरा मामला
- सुप्रीम कोर्ट ने महंगे हवाई किराए पर नाराजगी जताई।
- नियम तोड़ने पर उड़ानें रोकने की बात कही।
- केंद्र नए किराया नियम तैयार कर रहा है।
- सरकार ने कोर्ट से तीन हफ्ते का समय मांगा।
- मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।
त्योहारों और छुट्टियों में आसमान छूते हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने एयरलाइंस के किराया निर्धारण और अतिरिक्त शुल्क पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि नियमों का पालन नहीं करने पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। केंद्र ने नए नियम तैयार करने के लिए तीन हफ्ते मांगे हैं। इसके बाद मामला फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने आएगा।
एयरलाइंस को सख्त चेतावनी
त्योहारों और छुट्टियों में हवाई टिकट अचानक महंगे हो जाते हैं। इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह सुनवाई की। पीठ ने कहा कि अगर एयरलाइंस तय नियमों का पालन नहीं करतीं, तो उनकी उड़ानें रोक दी जाएं।
कोर्ट ने साफ कहा कि यात्रियों के हित में नियम तो बने हैं। लेकिन इन नियमों का पालन ठीक से नहीं हो रहा। इसकी निगरानी को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। यही वजह है कि कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।
केंद्र ने मांगा समय
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG – Additional Solicitor General) अनिल कौशिक कोर्ट में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि हवाई किराए से जुड़े नए नियम लगभग तैयार हैं। यह प्रक्रिया अंतिम दौर में है।
उन्होंने कोर्ट को एक सीलबंद लिफाफे में नियमों का मसौदा भी सौंपा। केंद्र ने कहा कि इन नियमों को अंतिम रूप देने में तीन हफ्ते और लगेंगे। इसके बाद इन्हें कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। कोर्ट ने यह मांग मान ली है।
किराए पर लगाम की मांग
याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट में एक अहम बात रखी गई। कहा गया कि नागरिक उड्डयन मंत्री ने संसद में कहा था कि सरकार हवाई किराए पर सीमा तय नहीं कर सकती। याचिकाकर्ता ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
आरोप है कि एयरलाइंस मनमाने ढंग से यात्रियों से शुल्क वसूल रही हैं। इसके लिए बने नियमों का पालन असरदार तरीके से नहीं हो रहा। यह पूरा मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मी नारायणन की याचिका पर आधारित है।
नारायणन ने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दाखिल की थी। उन्होंने निजी एयरलाइंस पर मनमाने ढंग से किराया तय करने का आरोप लगाया। साथ ही अलग-अलग तरह के अतिरिक्त शुल्क वसूलने का भी आरोप है।
याचिका में हवाई किराया को पारदर्शी बनाने की मांग की गई है। साथ ही यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए मजबूत नियामक व्यवस्था बनाने की भी मांग है। कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है।
पहले भी जताई नाराजगी
यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराए पर नाराजगी जताई हो। इससे पहले भी कोर्ट ने त्योहारों और बड़े आयोजनों में किराया बढ़ने को यात्रियों का शोषण बताया था। कोर्ट ने कहा था कि एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस के किराए में बहुत अंतर है।
मई महीने की सुनवाई में एक चौंकाने वाला उदाहरण सामने आया था। एक ही मार्ग पर किसी एयरलाइन का किराया 8 हजार रुपए था। वहीं दूसरी एयरलाइन उसी रूट पर 18 हजार रुपए तक वसूल रही थी। कोर्ट ने इस अंतर पर सवाल उठाए थे।
आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन हफ्ते का समय दे दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी। उस दिन केंद्र सरकार नए नियमों का अंतिम मसौदा कोर्ट के सामने रखेगी।
इसके बाद कोर्ट तय करेगा कि हवाई किराए और अतिरिक्त शुल्क को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाएं। इस फैसले का असर उन लाखों यात्रियों पर पड़ेगा जो त्योहारों में हवाई सफर करते हैं। खासकर वे लोग जो सीमित बजट में टिकट बुक करते हैं।
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