चुनाव आयोग नहीं बदल सकता फॉर्म 6, 7 और 8! SIR सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
पीठ ने आयोग को खुद मतदाताओं तक पहुंचने की सलाह दी। आवेदन प्रक्रिया आसान बनाने का सुझाव भी दिया।
फॉर्म 6 पर कोर्ट का सवाल क्या है?
सुनवाई के दौरान सबसे अहम सवाल फॉर्म 6 के इस्तेमाल पर उठा। कोर्ट ने पूछा कि मतदाता सूची में शामिल लोग फॉर्म 6 क्यों भरें? फॉर्म 6 नए मतदाताओं के लिए निर्धारित है। पीठ ने नए और पुराने मतदाताओं की अलग-अलग स्थिति पर चिंता जताई। नए मतदाता फॉर्म 6 भरते हैं। वहीं, सूची में पहले से दर्ज मतदाताओं की स्थिति अलग होती है।
नाम कटा हो तो नया मतदाता क्यों मानें?
पीठ ने पहले से पंजीकृत मतदाताओं को लेकर भी अहम टिप्पणी की। किसी व्यक्ति का नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज हो सकता है। बाद में उसका नाम सूची से हट भी सकता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को नया मतदाता नहीं माना जाना चाहिए। उसकी स्थिति के अनुसार समाधान निकाला जाना चाहिए। सवाल यह है कि पहले से पंजीकृत व्यक्ति दोबारा नया आवेदन क्यों करे?
फॉर्म 6 पर विवाद क्यों शुरू हुआ?
फॉर्म 6 को लेकर विवाद पिछले महीने शुरू हुआ था। दरअसल दो चुनाव आयुक्तों ने बदलावों पर आपत्ति जताई थी। यह आपत्ति एसआईआर (Special Intensive Revision) से जुड़े फॉर्म 6 के बदलावों पर थी। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई। विपक्ष ने नए मतदाताओं के आवेदन फॉर्म में बदलाव को लेकर सवाल उठाए। उसका आरोप है कि आयोग ने एसआईआर से संबंधित अतिरिक्त घोषणा शामिल कर दी। विपक्ष के मुताबिक, यह नियमों का उल्लंघन है। आरोप है कि इससे पहली बार मतदाता बनने वालों के लिए बाधाएं बढ़ीं।
आयोग का पक्ष किसने रखा?
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्रि नायडू ने पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता भी सुनवाई में प्रमुख वकीलों में शामिल रहे। वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह भी इनमें शामिल थे।
30 अक्टूबर की डेडलाइन पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने 30 अक्टूबर की डेडलाइन को लेकर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि राजधानी में निकट भविष्य में कोई चुनाव नहीं है। ऐसे में आयोग 30 अक्टूबर की समय-सीमा पर जोर क्यों दे रहा है?
कट-ऑफ तारीख पर कोर्ट ने क्या कहा?
सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कट-ऑफ तारीख पर अहम टिप्पणी की।
"नामों को दोबारा दर्ज कराने के लिए कोई अंतिम तारीख तय न करें।"
कट-ऑफ तारीख का मतलब आवेदन जमा करने की अंतिम निर्धारित तारीख है। इसके बाद सामान्यतः आवेदन स्वीकार नहीं किए जाते। पीठ ने आयोग को आसान समाधान निकालने की सलाह भी दी। यह सुझाव उन मतदाताओं के लिए था, जो गणना फॉर्म जमा नहीं कर सके।
सीजेआई सूर्यकांत ने क्या सुझाया?
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने चुनाव आयोग को अहम सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि आयोग को केवल आवेदनों का इंतजार नहीं करना चाहिए। आयोग को खुद मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने फॉर्म 6 और 8 के माध्यम से आवेदन लेना जारी रखने को कहा। साथ ही मतदाताओं के लिए सबसे आसान समाधान अपनाने की सलाह दी। इसके बाद चुनाव आयोग ने आवेदन जमा करने की समय-सीमा बढ़ाने पर सहमति जताई।
फॉर्म 6, 7 और 8 में क्या फर्क है?
मतदाता सूची से जुड़े तीनों फॉर्म के अलग-अलग काम हैं।
फॉर्म 6: मतदाता सूची में नया नाम शामिल कराने के लिए है।
फॉर्म 7: मतदाता सूची में नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए है।
फॉर्म 8: जानकारी सुधारने, पता बदलने और अन्य निर्धारित संशोधनों के लिए है।
यानी नया नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 इस्तेमाल होता है। नाम हटाने या आपत्ति के लिए फॉर्म 7 निर्धारित है। वहीं, पता बदलने और जानकारी सुधारने के लिए फॉर्म 8 है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को तीन प्रमुख सुझाव दिए हैं। पहला, नाम दोबारा दर्ज कराने के लिए अंतिम तारीख तय न की जाए। दूसरा, आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाया जाए। तीसरा, आयोग खुद मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश करे। फिलहाल चुनाव आयोग को आवेदन की नई समय-सीमा पर फैसला लेना होगा। नई तारीख क्या होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
FAQs
- क्या चुनाव आयोग फॉर्म 6, 7 और 8 में बदलाव कर सकता है?
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इन फॉर्म के निर्धारित प्रारूपों पर टिप्पणी की। पीठ के मुताबिक, आयोग इनमें बदलाव नहीं कर सकता। सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। - फॉर्म 6 पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या सवाल उठाया?
कोर्ट ने पूछा कि पहले से पंजीकृत मतदाता फॉर्म 6 क्यों भरें? यह फॉर्म नए मतदाताओं के लिए निर्धारित है। पीठ ने पुराने मतदाताओं को नया आवेदक मानने पर सवाल उठाया।