सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन का अधिकार नहीं, पुरानी वैकेंसी भी नहीं देती गारंटी - सुप्रीम कोर्ट

Amresh Kushwaha | May 20, 2026, 10:24 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन का कोई निहित अधिकार नहीं है। भले ही वैकेंसी पुराने नियमों के समय की हो। सरकार नीतिगत जरूरत के तहत भर्ती प्रक्रिया बदल सकती है।

शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला...

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन का कोई निहित अधिकार नहीं होता है। पद पुराने नियमों के समय खाली हुआ हो, फिर भी पुराने नियमों के तहत प्रमोशन की मांग नहीं की जा सकती। ओडिशा के परिवहन विभाग के कर्मचारियों ने असिस्टेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर यानी ARTO पद पर प्रमोशन की मांग की थी। राज्य सरकार ने 2021 में नए सेवा नियम लागू करके यह पद चयन आधारित बना दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाई कोर्ट का आदेश पलटते हुए सरकार का पक्ष सही माना।



क्या था ओडिशा का यह मामला?

ओडिशा के परिवहन विभाग में काम करने वाले कुछ कर्मचारी ARTO (Assistant Regional Transport Officer) पद पर प्रमोशन चाहते थे। उनका तर्क था कि जब ये पद खाली हुए, तब पुराने नियम लागू थे। इसलिए उन्हें पुराने नियमों के तहत ही प्रमोशन मिलना चाहिए।



राज्य सरकार ने 2017 में कैडर पुनर्गठन किया था। इसके बाद 2021 में नए सेवा नियम लागू किए गए थे। नए नियमों के तहत ARTO का पद अब प्रमोशन का नहीं, बल्कि चयन का पद बन गया था। अब इस पद पर भर्ती ओडिशा लोक सेवा आयोग यानी OPSC (Odisha Public Service Commission) द्वारा आयोजित परीक्षा के जरिए होनी थी।



हाई कोर्ट ने क्या कहा था?

ओडिशा हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि पुराने नियमों के तहत ही इन कर्मचारियों के प्रमोशन पर विचार किया जाए। इसी आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।



सुप्रीम कोर्ट की दो टूक

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने हाई कोर्ट का आदेश पूरी तरह रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी कर्मचारी को प्रमोशन का कोई निहित अधिकार या वैध अपेक्षा नहीं होती। चयन और भर्ती की प्रक्रिया तय करना पूरी तरह सरकार का नीतिगत फैसला है।



कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि सरकार को सेवा नियमों में बदलाव करने का अधिकार है। बशर्ते यह बदलाव मनमाना या दुर्भावनापूर्ण न हो।



नई प्रक्रिया को गलत नहीं ठहराया जा सकता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार पदों के पुनर्गठन के बाद प्रशासनिक दक्षता के लिए नई और ज्यादा प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया अपनाती है, तो इसमें कोई गलत नहीं है। यह सरकार का अधिकार है कि वह तय करे कि किस पद पर कैसे भर्ती होगी।



इस फैसले से यह भी साफ होता है कि महज इसलिए कि पद पहले से खाली है, कोई कर्मचारी पुराने नियमों का फायदा नहीं उठा सकता है।



लाखों सरकारी कर्मचारियों पर असर

यह फैसला सिर्फ ओडिशा तक सीमित नहीं है। देश भर के सरकारी विभागों में ऐसे हजारों मामले होते हैं जहां कर्मचारी पुरानी वैकेंसी के आधार पर पुराने नियमों के तहत प्रमोशन की मांग करते हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन सभी मामलों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि नीतिगत बदलाव को चुनौती नहीं दी जा सकती, जब तक वह मनमाना न हो।



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