फर्जी AI केस लॉ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, NCLT का आदेश किया रद्द
समझें क्या है पूरा मामला
- सुप्रीम कोर्ट ने NCLT का एक आदेश रद्द कर दिया है।
- यह आदेश फर्जी AI-जनरेटेड केस लॉ पर आधारित था।
- कोर्ट ने इसे न्याय व्यवस्था के लिए विनाशकारी बताया है।
- जजों ने वकीलों और कोर्ट, दोनों के लिए जीरो टॉलरेंस का ऐलान किया है।
- मामला अब दोबारा सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल को भेज दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार दो जुलाई को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी (NCLT) के एक आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में ऐसे केस लॉ का इस्तेमाल किया, जो असल में मौजूद ही नहीं थे। यह फर्जी केस लॉ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जनरेट हुए थे।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के लिए बेहद खतरनाक बताया है। बेंच ने कहा कि बिना जांच किए AI से बने फर्जी उदाहरणों पर भरोसा करना गलत है। इससे न्याय की पूरी व्यवस्था दूषित होती है।
फर्जी नजीरों पर सख्त टिप्पणी
बेंच ने कहा कि फर्जी या हैलुसिनेटेड सामग्री का एक अंश भी अगर फैसले में शामिल हो जाए, तो यह न्याय की पवित्रता को तोड़ता है। कोर्ट ने कहा, निर्णय प्रक्रिया में ईमानदारी बनाए रखना जरूरी है। इसीलिए बार और बेंच, दोनों के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई गई।
इस पर कोर्ट ने एक दिलचस्प तुलना भी की। बेंच ने कहा कि कानून की दुनिया में हैलुसिनेटेड सामग्री का इस्तेमाल वैसा ही है, जैसे मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव होना। यह अदृश्य होता है, धीरे-धीरे फैलता है, और पता चलने तक बहुत नुकसान कर चुका होता है।
गहरे सहयोग की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने बार और बेंच के बीच AI को लेकर गहरे सहयोग की जरूरत बताई। कोर्ट ने BCI (बार काउंसिल ऑफ इंडिया) से इस मुद्दे पर नियम बनाने को कहा है।
कोर्ट ने यह भी माना कि आज के दौर में काम का दबाव बढ़ा है। इस वजह से वकील और जज AI का सहारा ले रहे हैं। लेकिन कोर्ट ने साफ किया कि इंसानी निगरानी हर स्तर पर बनी रहनी चाहिए।
ड्राफ्ट रेगुलेशन पहले से तैयार
कोर्ट ने बताया कि यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। कोर्ट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल के लिए ड्राफ्ट रेगुलेशन 2026 पहले ही सार्वजनिक चर्चा के लिए जारी किया जा चुका है।
इन नियमों के मुताबिक AI सिस्टम केवल सहायक भूमिका में काम कर सकते हैं। वे जजों की जगह नहीं ले सकते। नियमों में यह भी कहा गया है कि अगर किसी फाइलिंग में AI का इस्तेमाल हुआ है, तो इसकी जानकारी देनी होगी। साथ ही न्यायिक फैसलों में AI के इस्तेमाल पर रोक रहेगी।
बार काउंसिल को निर्देश
कोर्ट में AI से बने फर्जी नजीरों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसे देखते हुए बेंच ने BCI को एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया। यह कमेटी इस मुद्दे की जांच करेगी और उचित नियम तैयार करेगी।
इंसॉल्वेंसी का पूरा मामला
यह मामला पूजा रमेश सिंह की अपील से जुड़ा है। पूजा एस्सेल इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड की सस्पेंड डायरेक्टर हैं। उन्होंने NCLT के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें कंपनी को कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस में भेजा गया था।
यह याचिका जम्मू-कश्मीर बैंक ने दाखिल की थी। बैंक ने IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) की धारा सात के तहत अर्जी लगाई थी। यह मामला 200 करोड़ रुपए की क्रेडिट फैसिलिटी में हुए कथित डिफॉल्ट से जुड़ा है। यह रकम जम्मू-कश्मीर बैंक ने पैन इंडिया यूटिलिटीज डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को दी थी।
NCLT की मुंबई बेंच ने अगस्त में यह इंसॉल्वेंसी अर्जी स्वीकार की थी। उस समय 87.43 करोड़ रुपए के डिफॉल्ट का दावा दर्ज किया गया था। बाद में NCLAT (National Company Law Appellate Tribunal) ने भी इस आदेश को बरकरार रखा था।
प्रक्रिया की अखंडता पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई कि NCLAT ने भी यह नहीं पकड़ा कि NCLT के आदेश में फर्जी नजीरों का इस्तेमाल हुआ था। कोर्ट ने कहा कि अदालतों और ट्रिब्यूनल को वकीलों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।
कोर्ट में पेश की गई हर नजीर की स्वतंत्र रूप से जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि गलती चाहे कहीं से भी हुई हो, इससे न्यायिक प्रक्रिया की अखंडता पर असर कम नहीं होता है।
कोर्ट का अंतिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अंत में NCLT और NCLAT, दोनों के आदेश रद्द कर दिए। कोर्ट ने पूरा मामला ट्रिब्यूनल को वापस भेज दिया है। अब इस पर कानून के मुताबिक नए सिरे से सुनवाई होगी।
इस पर एक्सपर्ट का क्या कहना है
सुप्रीम कोर्ट बेंच (जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे): फर्जी या हैलुसिनेटेड सामग्री का एक अंश भी अगर निर्णय प्रक्रिया में शामिल हो जाए, तो यह न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता का उल्लंघन होगा। निर्णय में ईमानदारी बनाए रखना जरूरी है, और हम बार व बेंच दोनों के लिए ऐसी सामग्री पर जीरो टॉलरेंस दोहराते हैं।
सुप्रीम कोर्ट बेंच: हैलुसिनेटेड सामग्री और कानून में इसका इस्तेमाल वैसा ही खतरनाक है, जैसे कानून-न्याय के क्षेत्र में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव, जो अदृश्य रूप से फैलता है और पता चलने तक भारी नुकसान कर चुका होता है।
(सार्स: सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, समाचार रिपोर्ट से)
FAQ
- सुप्रीम कोर्ट ने NCLT का आदेश क्यों रद्द किया?
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि NCLT के आदेश में फर्जी AI-जनरेटेड केस लॉ का इस्तेमाल हुआ था। कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के लिए खतरनाक बताया। इसीलिए आदेश रद्द कर दिया गया। - यह मामला किससे जुड़ा है?
यह मामला एस्सेल इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड की इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया से जुड़ा है। जम्मू-कश्मीर बैंक ने कंपनी के खिलाफ अर्जी दाखिल की थी। कंपनी की सस्पेंड डायरेक्टर पूजा रमेश सिंह ने NCLT के फैसले को चुनौती दी थी। - सुप्रीम कोर्ट ने आगे क्या निर्देश दिए?
कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को AI से जुड़े नियम बनाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा, वकीलों और कोर्ट दोनों को फर्जी नजीरों पर जीरो टॉलरेंस अपनानी चाहिए। मामला अब नए सिरे से सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल को भेजा गया है।
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