15 डॉक्यूमेंट देने के बाद भी अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सका दिहाड़ी मजदूर
Aman Vaishnav | Jul 03, 2026, 11:18 IST
नागरिकता साबित नहीं कर सका दिहाड़ी मजदूर
असम में नागरिकता के मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने दिहाड़ी मजदूर की याचिका खारिज कर दी है। नागरिकता साबित करने के लिए मजदूर ने कोर्ट के सामने कुल 15 दस्तावेज पेश किए थे। इसके बावजूद उसकी नागरिकता साबित नहीं हो सकी।
समझें क्या है पूरा मामला...
- गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक मजदूर की नागरिकता याचिका खारिज कर दी है।
- मजदूर ने भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए 15 दस्तावेज पेश किए थे।
- कोर्ट इन 15 दस्तावेजों से भी संतुष्ट नहीं हो सका।
- हाईकोर्ट ने विदेशी न्यायाधिकरण के फैसले को बरकरार रखा।
- कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ठोस और कानूनी रूप से मान्य सबूत पेश नहीं कर सका।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता की पहचान उजागर नहीं की। हालांकि उसके पास अभी भी कानूनी विकल्प मौजूद हैं।
गुवाहाटी हाईकोर्ट का आदेश
कोर्ट ने कहा कि विदेशी अधिनियम के तहत नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी याचिकाकर्ता की थी।
अदालत ने पाया कि विदेशी न्यायाधिकरण ने सभी सबूतों की सही तरीके से जांच की थी। न्यायाधिकरण के फैसले में कोई कानूनी या तथ्यात्मक गलती नहीं मिली।
कौन से दस्तावेज पेश हुए
- 1951 की NRC (National Register of Citizens) में पिता और दादा-दादी के नाम
- 1966 से 2017 तक की वोटर लिस्ट
- 1973 की जमीन खरीद की रजिस्ट्री
- 2017 का स्कूल प्रमाणपत्र
- PAN कार्ड (Permanent Account Number)
- वोटर आईडी यानी EPIC (Elector's Photo Identity Card)
- पिता की मौखिक गवाही
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न पासपोर्ट, न आधार, न वोटर ID, तो फिर कौन सा डॉक्युमेंट बताएगा भारतीय नागरिकता
दस्तावेज क्यों रद्द हुए
स्कूल प्रमाणपत्र भी अमान्य माना गया। न तो प्रधानाध्यापक को गवाह बनाया गया, न ही स्कूल का मूल रजिस्टर पेश किया गया।
साथ ही 1973 की जमीन रजिस्ट्री पर कोर्ट ने कहा कि इससे परिवार के साथ लगातार संबंध साबित नहीं होता है। उत्तराधिकार और जमीन राजस्व के रिकॉर्ड भी पेश नहीं किए गए।
कोर्ट ने साफ किया कि PAN कार्ड और वोटर ID नागरिकता के सबूत नहीं हैं। ये केवल पहचान और कर से जुड़े दस्तावेज हैं।
वोटर लिस्ट में खामियां
- अलग-अलग सालों में उम्र का रिकॉर्ड मेल नहीं खाया।
- परिवार के सदस्य अलग-अलग गांवों में दर्ज मिले।
- पारिवारिक संबंधों का कोई मजबूत रिकॉर्ड नहीं था।
कोर्ट की आखिरी टिप्पणी
तो नागरिकता साबित कौन करता है
फरवरी 2020 में गृह मंत्रालय (MHA - Ministry of Home Affairs) ने संसद में स्पष्ट किया था कि आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी, पैन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र - इनमें से किसी भी दस्तावेज को अकेले नागरिकता का पक्का और अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
जन्म तिथि के आधार पर अलग नियम
पासपोर्ट रद्द भी हो सकता है
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