अब देश में सिर्फ एक हेल्पलाइन नंबर 112, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
समझें क्या है पूरा मामला
- सुप्रीम कोर्ट ने इमरजेंसी मेडिकल केयर को नागरिकों का मूल अधिकार माना है।
- सभी राज्यों को तीन महीने में एकल इमरजेंसी नंबर 112 चालू करना होगा।
- सड़क हादसों में घायलों की मदद करने वालों के लिए विशेष सुरक्षा मिलेगी।
- मददगारों की शिकायतों को दूर करने के लिए नया सिस्टम बनाया जाएगा।
- राज्यों को हर महीने इस आदेश पर अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट देनी होगी।
देश की सबसे बड़ी अदालत ने आम नागरिकों के हित में बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज को लेकर नए और कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने साफ कहा कि किसी भी हादसे के वक्त तुरंत इलाज मिलना बहुत जरूरी है। यह हर नागरिक के जीने के अधिकार का एक बेहद जरूरी हिस्सा है।
इमरजेंसी सेवाओं के लिए अब सिर्फ 112 नंबर
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को समय सीमा दी है। सभी सरकारों को अगले तीन महीने के भीतर एक बड़ा काम पूरा करना होगा। इमरजेंसी सेवाओं के लिए अब केवल एक नंबर 112 ही चालू रखा जाएगा। अब देश के किसी भी कोने में लोग इस नंबर पर मदद मांग सकेंगे। अलग-अलग नंबरों याद रखने का झंझट अब पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।
अक्सर लोग सड़क हादसों में घायलों की मदद करने से काफी डरते हैं। उन्हें लगता है कि वे पुलिस और कानूनी पचड़ों में फंस जाएंगे। अदालत ने इस डर को पूरी तरह दूर करने का आदेश दिया है। अब नेक मददगारों की सुरक्षा के लिए एक विशेष शिकायत निवारण सिस्टम बनेगा।
राज्यों को हर महीने देना है अनुपालन रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने यह सख्त आदेश जारी किया है। इस बेंच में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर शामिल हैं। अदालत ने राज्यों से हर महीने एक समीक्षा बैठक करने के लिए कहा है। इसके बाद सरकारों को अपनी अनुपालन रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कुछ बहुत ही भावुक बातें कहीं। कोर्ट ने कहा कि दुर्घटना का शिकार व्यक्ति बहुत ज्यादा सदमे में होता है। उस नाजुक वक्त में घायल इंसान खुद को बेहद बेबस महसूस करता है। उसे उम्मीद होती है कि आसपास के लोग उसकी जान बचाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला एक विशेष जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। यह याचिका सेवलाइफ फाउंडेशन नाम की संस्था ने कोर्ट में दायर की थी। संस्था ने सड़क हादसों में मरने वाले लोगों का गंभीर मुद्दा उठाया था। कोर्ट ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए नए नियम तय किए।
अब एम्बुलेंस के लिए नहीं भटकेंगे लोग
इस नए आदेश के बाद सभी एम्बुलेंस सेवाओं को एक साथ जोड़ा जाएगा। देश की सभी आपातकालीन हेल्पलाइन अब सीधे नंबर 112 से जुड़ जाएंगी। इससे एम्बुलेंस को हादसे वाली जगह पर पहुंचने में बहुत कम समय लगेगा। सही समय पर अस्पताल पहुंचने से हजारों मासूमों की जान बच सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक और महत्वपूर्ण काम सौंप दिया है। कोर्ट ने पीएम राहत कैशलेस इलाज योजना को जल्द शुरू करने को कहा है। इस योजना के आने से घायलों का इलाज बिना पैसों के तुरंत शुरू हो सकेगा। पैसों की कमी से अब किसी भी घायल की जान नहीं जाएगी।
कानूनी पचड़ों के डर को दूर करना बहुत जरूरी
अदालत ने माना कि कानून के डर से लोग घायलों की मदद नहीं करते। वे हादसे को देखकर भी आगे आने से लगातार हिचकिचाते रहते हैं। नया नियम आने से अब कोई भी पुलिसवाला मददगार को परेशान नहीं करेगा। लोग बिना किसी डर के दूसरों की जान बचाने के लिए आगे आएंगे।
यह फैसला देश की सड़कों को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। एकल हेल्पलाइन नंबर 112 से पूरी आपातकालीन व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा। तकनीक और सही नियमों के तालमेल से अब हर नागरिक सुरक्षित महसूस करेगा। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
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