ट्विशा शर्मा केस में SC की दो टूक, मीडिया में नहीं जांच एजेंसी में बयान दें पीड़ित और आरोपी

Neel Tiwari | May 25, 2026, 13:06 IST
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twisha sharma death
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ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की कार्रवाई की सराहना करते हुए CBI जांच के निर्देशों को संवेदनशील कदम बताया है। कोर्ट ने मीडिया से संयम बरतने और पीड़ित व आरोपियों के बयान प्रसारित न करने की अपील की है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सुप्रीम कोर्ट ने ट्विशा शर्मा की मौत के मामले की जांच CBI को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कराई।
  • कोर्ट ने मीडिया से पीड़ित और आरोपियों के बयान प्रकाशित करने से बचने की अपील की।
  • सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गिरिबाला सिंह जांच में सहयोग नहीं कर रहीं।
  • हाईकोर्ट के आदेश पर AIIMS भोपाल की टीम ने शव का दूसरा पोस्टमार्टम किया।
  • समर्थ सिंह पहले ही सरेंडर कर चुके हैं और उन्हें 7 दिन की पुलिस रिमांड मिली है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की कार्रवाई को सराहा

ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार की कार्रवाई की सराहना की। कोर्ट ने कहा कि जब जांच में पक्षपात जैसे आरोप आए, तो सरकार ने तुरंत CBI जांच की तरफ कदम बढ़ाए।

कोर्ट ने माना कि इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार मामले को गंभीरता और संवेदनशीलता से देख रही है। सुनवाई में कोर्ट को यह भी बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद ट्विशा का दोबारा पोस्टमार्टम हो चुका है। ट्विशा का अंतिम संस्कार भी हो गया है।

CBI डायरेक्टर से बात करेंगे तुषार मेहता

भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अब पूरा मामला CBI संभालेगी। उन्होंने कहा कि वह खुद CBI डायरेक्टर से बात करके सुनिश्चित करेंगे कि सारे प्रशासनिक काम उसी दिन निपटा लिए जाएं, ताकि जांच में कोई देरी न हो।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि मामले की संभावित आरोपियों में से एक, ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह, लगातार मीडिया में बयान दे रही हैं। साथ ही वह जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं।

तुषार मेहता ने कहा कि पुलिस ने बयान के लिए नोटिस भेजा, लेकिन सहयोग नहीं मिला। इसकी वजह से मोबाइल और बाकी इलेक्ट्रॉनिक सबूत सुरक्षित रखने में दिक्कत हो रही है।

मेहता ने अदालत में एक बड़ी बात कही जो देश भर में चर्चा बन गई। उन्होंने कहा कि तलाकशुदा बेटी होना बेहतर है, ऐसे दुखद हादसे से।

मीडिया कवरेज पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया कवरेज को लेकर भी चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कुछ गतिविधियों से अदालत को पीड़ा हुई है। कोर्ट ने मीडिया से कहा कि वे पीड़ित परिवार या आरोपी के बयान दिखाने में सावधानी बरतें और जांच में हस्तक्षेप न करें।

कोर्ट ने कहा कि गवाहों और आरोपियों के बयान बार-बार दिखाने से आगे की जांच और ट्रायल पर असर पड़ सकता है। आम लोगों से भी अपील की कि अफवाहों से बचें और CBI पर भरोसा रखें।

बयान मीडिया को नहीं, जांच एजेंसी को दें

सुप्रीम कोर्ट ने ट्विशा के परिवार को भी सलाह दी कि वे मीडिया के सामने बयान देने के बजाय जांच एजेंसी को अपने दें। अदालत का मानना था कि लगातार मीडिया ट्रायल से मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।

इस दौरान आरोपी के वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने भी कहा कि मीडिया में धारा 164 CrPC के बयान छप रहे हैं, जो जांच के लिए गंभीर समस्या बन सकते हैं।

एफआईआर में देरी और सबूतों पर उठे सवाल

वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट को बताया कि FIR दर्ज करने में तीन दिन की देरी हुई। साथ ही शुरुआती सबूत सुरक्षित रखने में भी गंभीर लापरवाही हुई। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी अपनी तरफ से कॉल रिकॉर्ड पेश कर रहे हैं, जिसकी वैधता पर सवाल हैं।

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश के बाद रविवार को AIIMS Bhopal की मेडिकल टीम ने ट्विशा का दूसरा पोस्टमार्टम किया।

क्या है पूरा मामला?

ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद उनके परिवार ने ससुराल पक्ष पर लगातार घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। परिवार का कहना था कि मौत के वास्तविक कारण सामने लाने के लिए दोबारा पोस्टमार्टम जरूरी है, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने मंजूरी दे दी।

मामले में ट्विशा के पति समर्थ सिंह, जो पेशे से वकील हैं, और उनकी सास गिरिबाला सिंह, जो पूर्व जिला न्यायाधीश रही हैं, पर दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगे हैं।

आरोपी पक्ष की स्थिति

ट्विशा का पति समर्थ सिंह पेशे से वकील है। वह अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस लेने के बाद निचली अदालत में सरेंडर कर चुका है। फिलहाल वह सात दिन की पुलिस रिमांड पर है। वहीं मध्य प्रदेश पुलिस ने गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है जिसकी आज दोपहर 2:30 बजे जस्टिस देवनारायण मिश्रा की कोर्ट में सुनवाई होनी है।

गिरिबाला सिंह के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई

भोपाल के ट्विशा शर्मा केस में, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सोमवार को हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में सुनवाई हुई।

जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल बेंच के सामने सुनवाई के दौरान मामले की जांच, दोबारा पोस्टमार्टम और सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया गया। कोर्ट रूम में सुनवाई के दौरान पूरा माहौल गंभीर रहा, क्योंकि अब इस केस की जांच CBI को सौंपे जाने की जानकारी भी अदालत को दी गई।

सुनवाई में सरकार की ओर से तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर ट्विशा का दोबारा पोस्टमार्टम हो चुका है और अंतिम संस्कार भी हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब CBI के हाथ में है। दिल्ली से सीबीआई की टीम भोपाल के लिए रवाना हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई की जानकारी भी हाईकोर्ट को दी गई। अधिवक्ता प्रशांत श्रीवास्तव ने कहा कि गिरिबाला सिंह जमानत पर रहते हुए साक्ष्यों को प्रभावित कर सकती हैं, क्योंकि कथित घटनास्थल अभी आरोपियों के कब्जे में है। इसी वजह से सरकार ने शीघ्र सुनवाई की मांग की।

गिरिबाला सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने कोर्ट में कहा कि यह गलत है कि उनकी मुवक्किल जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। उन्होंने विस्तृत जवाब देने के लिए समय मांगा। शुरू में अगली सुनवाई 29 मई तय थी, लेकिन सरकार के अनुरोध पर अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तारीख आगे बढ़ा दी। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि आरोपी पक्ष को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जवाब पेश करने का पूरा मौका दिया जाएगा।

इसी के साथ हाईकोर्ट ने अब इस बहुचर्चित मामले में अगली सुनवाई 27 मई को दोपहर 2:30 बजे तय की है। मामले की हर सुनवाई के साथ न केवल कानूनी दांव-पेंच तेज होते जा रहे हैं, बल्कि ट्विशा शर्मा की मौत को लेकर उठ रहे सवाल भी और गहरे होते जा रहे हैं।

अब सबकी निगाहें 27 मई की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां गिरिबाला सिंह की जमानत को लेकर अदालत का रुख बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गिरिबाला की जमानत पर सुनवाई टली

गिरिबाला की जमानत खारिज करने के लिए सरकार ने याचिका दायर की है। इसके साथ ही ट्विशा के पिता नव निधि सिंह ने भी याचिका दायर की है। सरकार की ओर से दायर याचिका में तो नोटिस तामील हो गई थी, लेकिन पीड़ित परिवार की ओर से दायर याचिका में नोटिस तामील नहीं हो पाए थे। यही वजह है कि सुनवाई 2 दिन के लिए टाली गई है। गिरिबाला की ओर से वकील को निर्देश दिए गए हैं कि अगली सुनवाई में पूरा जवाब पेश करें।

यह खबर क्यों जरूरी है?

ट्विशा शर्मा मामला सिर्फ एक मौत की खबर नहीं है। यह उस सिस्टम पर सवाल है जहां आरोपी के कानूनी पेशे से जुड़े होने पर जांच प्रभावित हो सकती है। दहेज प्रताड़ना से जुड़े मामलों में जांच में देरी और संस्थागत पूर्वाग्रह एक बड़ी समस्या है।

सुप्रीम कोर्ट का सू मोटो संज्ञान यह संकेत देता है कि न्यायपालिका ऐसे मामलों में निष्क्रिय नहीं रहेगी। यह केस आने वाले समय में दहेज कानूनों और जांच एजेंसियों की जवाबदेही के लिए एक मिसाल बन सकता है।

FAQ

  1. ट्विशा शर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
    सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच का रास्ता साफ किया, आरोपियों और पीड़ित परिवार को मीडिया में बयान देने से रोका और कहा कि जांच निष्पक्ष और स्वतंत्र होनी चाहिए।
  2. ट्विशा शर्मा का दूसरा पोस्टमार्टम क्यों हुआ?
    परिवार ने पहले पोस्टमार्टम में अनियमितताओं का आरोप लगाया। हाईकोर्ट के आदेश पर AIIMS दिल्ली की टीम ने भोपाल में दूसरा पोस्टमार्टम किया।
  3. क्या ट्विशा शर्मा केस में CBI जांच होगी?
    हां, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में आश्वासन दिया कि CBI जल्द ही जांच संभाल लेगी।
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