बेटा-बहू कर रहे परेशान, तो संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं माता-पिता: सुप्रीम कोर्ट
Supreme Court judgement: सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार (19 अगस्त) को बुजुर्गों के हक में एक बहुत बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया है कि सीनियर सिटीजन्स अपने बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं। अगर बच्चे अपने माता-पिता को प्रताड़ित करते हैं या देखभाल नहीं करते, तो पेरेंट्स उन्हें घर से निकाल सकते हैं।
यह फैसला लखनऊ के एक परिवार से जुड़े विवाद के बाद आया है। यहां बेटे-बहू के व्यवहार से दुखी होकर एक बुजुर्ग मां को वृद्धाश्रम जाना पड़ा था। इसके बाद पिता ने अपने बेटे को खुद के खरीदे मकान से निकालने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई शुरू की।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि केवल संतान होने के नाते बच्चों को पेरेंट्स की मेहनत से कमाई गई प्रॉपर्टी पर रहने का कोई अधिकार नहीं मिल जाता। Senior Citizens Act की धारा 7, 8 और 27 के तहत ट्रिब्यूनल के पास बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान के लिए बेदखली का आदेश देने की पूरी ताकत है। बुजुर्गों को सम्मान और सुरक्षा देना पूरे समाज का पहला फर्ज है। आइए जानें क्या है पूरा मामला...
क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला लखनऊ के विकास नगर का है। लखनऊ विकास नगर के रवि कांत गुप्ता ने जिला मजिस्ट्रेट से गुहार लगाई थी। उन्होंने अपने बेटे को घर से निकालने की मांग की थी। यह मकान रवि कांत की अपनी कमाई का था। मामला तब बिगड़ा जब 81 साल की बुजुर्ग मां को घर छोड़ना पड़ा।
बेटे के व्यवहार के कारण मां वृद्धाश्रम चली गईं। इस बात से दुखी होकर पिता ने कानूनी रास्ता अपनाया। एसडीएम ने नवंबर 2022 में बेटे को बेदखल करने का आदेश दिया। जिला मजिस्ट्रेट ने अगस्त 2023 में इस आदेश को सही माना। उन्होंने बेटे और बहू को घर खाली करने को कहा।
हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने क्यों बदला
बेटे और बहू ने इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एसडीएम का आदेश रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि कानून बेदखली का अधिकार नहीं देता।
ऐसे में जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट से यह समझने में गलती हुई। सीनियर सिटीजन एक्ट की धारा 7 (Section 7 of the Senior Citizens Act) के तहत ट्रिब्यूनल बने हैं।
Section 8 उन्हें सिविल कोर्ट जैसी ताकत देती है। कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण के लिए बेदखली का आदेश दिया जा सकता है। Section 27 सिविल कोर्ट के दखल को रोकती है। इसलिए ट्रिब्यूनल के पास सख्त कदम उठाने का अधिकार है।
पुरानी अदालती नजीरों का दिया हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2021 के एक फैसले का जिक्र किया। एस. वनिता मामले में भी ऐसा ही आदेश दिया गया था। कोर्ट ने माना था कि सुरक्षा के लिए बेदखली जरूरी है। इसके बाद 2025 के दो और मामलों का जिक्र हुआ। समटोला देवी और कमलकांत मिश्रा मामले में भी यही बात कही गई थी। संपत्ति से हटाना भी सुरक्षा का एक तरीका हो सकता है।
क्या माता-पिता जब चाहें बच्चों को निकाल सकते हैं
माता-पिता हर मामले में सीधे बच्चों को नहीं निकाल सकते। इसके लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है। बच्चों को माता-पिता की संपत्ति पर अपने आप अधिकार नहीं मिलता।
अगर बच्चे बुजुर्गों को परेशान करते हैं तो कानून मदद करता है। गंभीर मामलों में अदालतें बेदखली का आदेश दे सकती हैं। लेकिन इसके लिए ठोस वजह और सबूत होने चाहिए।
सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 क्या कहता है
इस कानून का मकसद बुजुर्गों को आर्थिक मदद देना है। अगर बुजुर्ग अपनी देखभाल करने में असमर्थ हैं तो वे मांग कर सकते हैं। वे बच्चों से भरण-पोषण का खर्च ले सकते हैं।
बुजुर्गों से जुड़े संपत्ति विवाद सामान्य मामलों से अलग होते हैं। धारा 23 के तहत दी गई संपत्ति वापस ली जा सकती है। अगर बच्चा देखभाल नहीं करता तो ट्रांसफर रद्द हो सकता है।
यह नियम तब लागू होता है जब संपत्ति शर्त पर दी गई हो। अगर बच्चे ने देखभाल का वादा तोड़ा है तो कार्रवाई होगी। हर मामले में कागजात और शर्तों की जांच की जाती है।
अपनी कमाई की संपत्ति पर किसका हक
अगर संपत्ति माता-पिता की अपनी कमाई की है तो अधिकार उनका है। सिर्फ बच्चा होने से उस घर पर मालिकाना हक नहीं मिलता। माता-पिता को अपनी संपत्ति पर शांति से रहने का हक है।
अगर विवाद मालिकाना हक या विरासत का है तो नियम बदलते हैं। ऐसे मामलों के लिए दीवानी अदालत जाना पड़ सकता है। सीनियर सिटीजन एक्ट हर विवाद में तुरंत लागू नहीं होता।
माता-पिता के घर में रहने वाले बच्चों के नियम
बेटा अगर माता-पिता के घर में रहता है तो वह मालिक नहीं बन जाता। अगर घर सिर्फ माता-पिता के नाम है तो वे सख्त कदम उठा सकते हैं। उनके पास घर खाली कराने का मजबूत कानूनी आधार होता है।
आपको बता दें कि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी 2025 के एक मामले में यही कहा था। कोर्ट ने माना था कि सही प्रक्रिया का पालन जरूरी है। केवल शिकायत के आधार पर तुरंत बेदखली नहीं हो सकती।
कोर्ट पिता की वित्तीय स्थिति और दूसरी संपत्तियों को भी देखता है। बेटे की स्थिति पर भी विचार किया जाता है। सभी बातों को देखने के बाद ही अंतिम फैसला होता है।
क्या बच्चों पर कानूनी जिम्मेदारी होती है
हां, माता-पिता की देखभाल करना बच्चों की कानूनी जिम्मेदारी है। अगर माता-पिता अपना खर्च नहीं उठा पा रहे तो बच्चे मदद करेंगे। सीनियर सिटीजन एक्ट बच्चों को इसके लिए बाध्य करता है।
इस कानून का मुख्य मकसद बुजुर्गों को सुरक्षा और सम्मान देना है। इसका मतलब यह नहीं कि हर पारिवारिक विवाद में घर छूटेगा। हर मामले की जांच तथ्यों के आधार पर की जाती है।
संपत्ति देने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
- कोई भी पेपर साइन करने से पहले उसे ध्यान से पढ़ें।
- मौखिक वादों पर कभी भी आंख बंद करके भरोसा न करें।
- देखभाल की शर्तों को हमेशा लिखित रूप में दर्ज कराएं।
- संपत्ति ट्रांसफर का तरीका जैसे गिफ्ट या बिक्री को समझें।
- सभी जरूरी कानूनी कागजात की कॉपी अपने पास संभाल कर रखें।
- पैसे या देखभाल से जुड़ी बातचीत का रिकॉर्ड जरूर रखें।
- बड़ा फैसला लेने से पहले किसी अच्छे वकील से सलाह लें।
बुजुर्गों की अनदेखी होने पर क्या करें
अगर बच्चे देखभाल नहीं कर रहे तो सबूत इकट्ठा करें। मेडिकल बिल, बैंक रिकॉर्ड और प्रॉपर्टी के कागजात सुरक्षित रखें। इसके बाद संबंधित अधिकारी या एसडीएम ट्रिब्यूनल में शिकायत करें।
संपत्ति के मालिकों के लिए यह फैसला एक बड़ी सीख है। अपनी संपत्ति के अधिकारों और कानूनों की जानकारी होना बहुत जरूरी है। सही प्रक्रिया अपनाकर ही कानूनी सुरक्षा पाई जा सकती है।
बच्चों को भी समझना होगा कि विरासत पर अपने आप हक नहीं मिलता। खुद की कमाई गई संपत्ति पर माता-पिता का पूरा नियंत्रण होता है। कानून का इस्तेमाल सही तरीके से होना चाहिए।
FAQ
- क्या माता-पिता अपनी खुद की संपत्ति से बच्चों को निकाल सकते हैं?
हां, अगर संपत्ति माता-पिता की अपनी कमाई की है और बच्चे उन्हें परेशान करते हैं, तो सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत कानूनी प्रक्रिया का पालन करके बच्चों को घर से बेदखल किया जा सकता है। - सीनियर सिटीजन एक्ट की धारा 23 क्या है?
धारा 23 के तहत अगर बुजुर्गों ने इस शर्त पर अपनी संपत्ति बच्चे के नाम की थी कि वह उनकी देखभाल करेगा, लेकिन बाद में बच्चा देखभाल नहीं करता, तो संपत्ति का ट्रांसफर रद्द कराया जा सकता है। - क्या बच्चों का माता-पिता की संपत्ति पर अपने आप अधिकार होता है?
नहीं, अगर संपत्ति माता-पिता ने खुद खरीदी है, तो केवल संतान होने के नाते बच्चों को उस पर अपने आप कोई मालिकाना हक या रहने का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता है।
ये खबरें भी पढ़ें...
RGHS में शामिल कैंसर की CAR-T थेरेपी, जानें कैसे मिलेगा फायदा?
IRCTC MP Tour Package: 6 दिन घूमें एमपी की खूबसूरत वादियां, जानें खर्च और पूरी डिटेल
जल जीवन मिशन का दावा हवा-हवाई! प्रदेश के 23 जिलों में 70% घरों तक नहीं पहुंचा पानी
भोजशाला केस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 19 अगस्त को सुनवाई, दोनों पक्षों की टिकी नजरें