सुप्रीम कोर्ट ने रेल यात्रियों को दी राहत, टिकट नहीं फिर भी मिलेगा मुआवजा

Saurabh Mishra | Jul 18, 2026, 13:31 IST
टिकट खोने पर भी नहीं रुकेगा मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने रेल यात्रियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि टिकट न मिलने से मुआवजा नहीं रोका जा सकता। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला पलटते हुए कोर्ट ने पीड़ित परिवार को 8 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया।

समझें क्या है पूरा मामला...



  • सुप्रीम कोर्ट ने रेल यात्रियों को बड़ी राहत देने वाला फैसला दिया है।
  • कोर्ट ने कहा कि टिकट न मिलने से मुआवजा नहीं रोका जा सकता।
  • मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और ट्रिब्यूनल का फैसला पलट दिया।
  • पीड़ित परिवार को 8 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश हुआ।
  • कोर्ट ने सेकेंड क्लास पैसेंजर शब्द पर भी आपत्ति जताई है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने रेल यात्रियों को बड़ी राहत देने वाला फैसला सुनाया है। शुक्रवार को कोर्ट ने कहा कि किसी यात्री की श्रेणी उसके खर्च से तय नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने रेलवे के नियमों में इस्तेमाल होने वाले शब्द पर भी आपत्ति जताई। कोर्ट का कहना था कि सेकेंड क्लास कोच से जुड़ा शब्द होना चाहिए, यात्री से नहीं। इसी फैसले में कोर्ट ने साफ किया कि टिकट न मिलने से मुआवजा नहीं रोका जा सकता।



यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने दिया। बेंच ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के पुराने फैसले को पलट दिया। कोर्ट ने पीड़ित परिवार को 8 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया। केंद्र सरकार को 4 हफ्ते में यह राशि जारी करनी होगी। देरी होने पर 8 फीसदी सालाना ब्याज भी देना होगा।



क्या था पूरा मामला

यह मामला नवंबर 2015 का है। चंद्रकांत ठक्कर रायपुर से अहमदाबाद जा रहे थे। सफर के दौरान वे अहमदाबाद-हावड़ा मेल से गिर गए थे। इस हादसे में उनकी मौत हो गई थी और उनका बैग भी गायब हो गया था। परिवार का कहना था कि उसी बैग में टिकट रखा था।



टिकट नहीं मिलने पर रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें वैध यात्री नहीं माना। बाद में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी मुआवजा देने से इनकार कर दिया था। परिवार को न्याय पाने में करीब 11 साल लग गए।



टिकट न मिलने पर भी हक

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेल दुर्घटना मुआवजा कानून एक कल्याणकारी कानून है। ऐसे कानूनों की व्याख्या संकीर्ण नहीं, बल्कि उदार होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ टिकट न मिलने से किसी की वैध यात्री की स्थिति खत्म नहीं होती।



दावेदार शपथपत्र और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अपना दावा साबित कर सकता। इसके बाद दावे को गलत ठहराने की जिम्मेदारी रेलवे की होगी, न की पीड़ित की। कोर्ट ने यह भी बताया कि रेल हादसा मुआवजा कानून 'नो-फॉल्ट लायबिलिटी' के सिद्धांत पर आधारित है। यानी गलती साबित किए बिना भी मुआवजा मिल सकता।



सुप्रीम कोर्ट ने दिए सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश

कोर्ट ने भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में सुरक्षा को लेकर भी अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि भीड़ भरी ट्रेनों से गिरने की घटनाएं लगातार सामने आ रही। रेलवे ने सुरक्षा और क्राउड मैनेजमेंट के लिए पहले से नियम बना रखे हैं। लेकिन कोर्ट ने कहा कि इन नियमों पर सख्ती से अमल होना जरूरी है।



सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे में स्टाफ बढ़ाने का सुझाव भी दिया। कोर्ट के मुताबिक इससे यात्रियों की सुरक्षा बेहतर होगी। साथ ही इससे रोजगार के नए मौके भी बन सकते। पर्याप्त स्टाफ होने से टिकट को जांचना आसान होगा। साथ ही भीड़ को नियंत्रित करना और फौरन मदद पहुंचाने में भी तेजी आएगी।



हादसे की पूरी जिम्मेदारी रेलवे पर नहीं डाली जा सकती

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हर हादसे की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ रेलवे पर नहीं डाली जा सकती। कोर्ट ने कहा कि यात्रियों को भी अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहिए। चलती ट्रेन पकड़ना और दरवाजे पर लटककर सफर करना खतरनाक है।



कोर्ट ने ऐसे गैरजरूरी जोखिम उठाने से बचने की सलाह दी। साथ ही कोर्ट ने यह भी माना कि कई बार यात्रियों के सामने व्यावहारिक मजबूरियां होती हैं। इसके बावजूद यात्रियों को सफर के दौरान सावधानी बरतनी चाहिए।



केंद्र सरकार को 4 हफ्ते में मुआवजा राशि देनी होगी

कोर्ट के आदेश के मुताबिक केंद्र सरकार को 4 हफ्ते में 8 लाख रुपए जारी करने होंगे। अगर तय समय में भुगतान नहीं हुआ तो अतिरिक्त ब्याज देना होगा। यह ब्याज दावा दायर करने की तारीख से 8 प्रतिशत सालाना दर से जुड़ेगा।



कोर्ट का यह कदम पीड़ित परिवारों के हक में एक बड़ी राहत माना जा रहा है। मृतक की पत्नी लता को यह राशि सीधे मिलेगी। इस फैसले से रेलवे दुर्घटना के अन्य लंबित मामलों पर भी असर पड़ सकता है।



फैसले की बड़ी बातें

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले में कई अहम बातें सामने आईं। कोर्ट ने 'सेकेंड क्लास पैसेंजर' की जगह कोच आधारित शब्दावली अपनाने की सलाह दी। पीड़ित के पास टिकट न मिलने पर भी मुआवजा नहीं रोका जा सकता। शपथपत्र और परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी दावा साबित करने के लिए काफी हो सकते हैं।



सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल और निचली अदालतों को भी साफ दिशा मिलेगी। भविष्य में इस तरह के मामलों में फैसले जल्दी और पीड़ितों के पक्ष में आने की संभावना बढ़ेगी। यह फैसला रेल यात्रियों के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।



FAQ

  1. टिकट न मिलने पर भी रेल हादसे में मुआवजा क्यों मिलेगा?
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेल दुर्घटना मुआवजा कानून एक कल्याणकारी कानून है, इसकी उदार व्याख्या होनी चाहिए। सिर्फ मृतक के पास टिकट न मिलने से उसकी वैध यात्री की स्थिति खत्म नहीं होती।
  2. रेल यात्रियों को मुआवजा देने से जुड़े मामले में कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
    सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए पीड़ित परिवार को 8 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया। केंद्र सरकार को चार हफ्ते में राशि जारी करनी होगी।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने 'सेकेंड क्लास पैसेंजर' शब्द पर क्या कहा?
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेकेंड क्लास शब्द कोच से जुड़ा होना चाहिए, यात्री की सामाजिक या आर्थिक स्थिति से नहीं।

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