पत्नी को बेवकूफ और निकम्मी कहना क्रूरता नहीं, जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्यों की ऐसी टिप्पणी

Sandeep Kumar | Nov 06, 2026, 16:27 IST
सुप्रीम कोर्ट बोला पत्नी को बेवकूफ और निकम्मी कहना क्रूरता नहीं
Calling wife foolish and useless not cruelty, Supreme Court's big verdict
पत्नी को 'बेवकूफ' और 'निकम्मी' कहना अपने आप में कानून के तहत क्रूरता नहीं माना जा सकता। केवल ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से पति को पत्नी की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार भी नहीं ठहराया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह अहम टिप्पणी की। अदालत ने पत्नी की मौत के बाद पति के खिलाफ दर्ज दहेज हत्या, मारपीट से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा कि पति का गुस्सैल स्वभाव या पत्नी को अपमानजनक शब्द कहना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। इसके लिए ठोस सबूत होना जरूरी है। कोर्ट के मुताबिक, पत्नी को 'बेवकूफ' और 'निकम्मी' कहने के आरोप सही भी मान लिए जाएं, तब भी केवल इन्हीं बातों से भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के तहत क्रूरता या आपराधिक धमकी का मामला नहीं बनता। बिना पर्याप्त सबूत के ऐसे आरोपों पर मुकदमा चलाना कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल होगा।



कनाडा में 22वीं मंजिल से कूदकर महिला ने दी थी जान

इस मामले में पति-पत्नी की शादी 2021 में हुई थी। इसके बाद 2022 में दोनों कनाडा के टोरंटो शहर चले गए। 11 जून 2023 को महिला ने अपने अपार्टमेंट की 22वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को घटनास्थल से महिला का हाथ से लिखा एक Suicide Note मिला था। इसमें उसने नौकरी नहीं मिलने और जीवन में असफलता से परेशान होने की बात लिखी थी।



महिला की मौत के बाद उसके पिता ने महाराष्ट्र के सतारा पुलिस थाने में FIR दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि शादी से पहले 15 तोला सोना मांगा गया था। इसके अलावा शादी के बाद पहली दिवाली पर सोने की अंगूठी और ब्रेसलेट तथा बाद में तीन तोला सोने की मांग की गई थी। पिता ने यह भी आरोप लगाया कि पति उनकी बेटी को मानसिक रूप से परेशान करता था और उसे 'बेवकूफ' व 'निकम्मी' कहता था।



जांच में पति के खिलाफ नहीं मिले ठोस सबूत

सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़ी जांच रिपोर्टों पर भी गौर किया। कनाडा के कोरोनर की जांच और टोरंटो पुलिस की 2024 की Closure Report में किसी संघर्ष या साजिश के संकेत नहीं मिले थे। जांच में यह भी सामने आया कि सुसाइड नोट महिला ने खुद लिखा था। वहीं, CCTV फुटेज से पता चला कि घटना के समय पति घर पर मौजूद नहीं था। अदालत ने कहा कि दहेज मांगने के आरोप 2021 और 2022 की घटनाओं से जुड़े थे, लेकिन महिला की मौत से पहले इस संबंध में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। FIR भी उसकी मौत के बाद दर्ज हुई थी।



शादी में दिया गया सोना दहेज नहीं माना

कोर्ट ने शादी में दिए गए 15 तोला सोने को दहेज मानने से इनकार कर दिया। अदालत के अनुसार, महिला के पिता ने खुद माना था कि यह सोना बेटी और दामाद को शादी के उपहार के तौर पर दिया गया था। इसी तरह शादी के बाद पहली दिवाली पर उपहार देना भारतीय परिवारों की सामान्य परंपरा है। अदालत ने कहा कि बिना ठोस प्रमाण के ऐसे उपहारों को दहेज की मांग से नहीं जोड़ा जा सकता।



क्रूरता साबित करने के लिए स्पष्ट घटनाएं बताना जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति पर क्रूरता का आरोप लगाने के लिए यह बताना जरूरी है कि उसने कब और किस तरह प्रताड़ित किया। केवल सामान्य आरोपों के आधार पर आपराधिक मामला आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। अदालत के मुताबिक, वैवाहिक विवादों में लगाए गए आरोपों की सावधानी से जांच होनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कानून का गलत इस्तेमाल न हो।



हाईकोर्ट का आदेश रद्द, पति को राहत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बेटी को खोने वाले पिता का दुख समझा जा सकता है, लेकिन बिना सबूत पति या ससुराल वालों को उसकी मौत के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। अदालत ने हरियाणा राज्य बनाम भजन लाल मामले में तय कानूनी सिद्धांतों का हवाला दिया। इसके साथ ही बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ का 8 जनवरी 2025 का आदेश रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पति के खिलाफ दर्ज FIR और उससे जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही भी समाप्त कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी के व्यवहार को गलत या अपमानजनक मानना और उसे कानून के तहत अपराध साबित करना, दोनों अलग बातें हैं।

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