सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: महिला वकीलों के लिए हर कोर्ट में अलग टॉयलेट और बार रूम बनाना जरूरी, राज्यों को मिले ये निर्देश

Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 26, 2026, 23:53 IST
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: महिला वकीलों के लिए हर कोर्ट में अलग टॉयलेट और बार रूम
The Supreme Court has directed states and High Courts to provide separate bar rooms and washrooms for women lawyers in courts across India.
देशभर की अदालतों में महिला वकीलों के लिए अलग टॉयलेट और बार रूम बनाए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और हाई कोर्ट्स को जरूरी सुविधाएं देने के निर्देश दिए हैं। यह व्यवस्था जिला, सब-डिविजनल और तालुका स्तर की अदालतों में भी लागू होगी। राज्यों और हाई कोर्ट्स को इसके लिए बजट और जमीन का इंतजाम भी करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि महिला वकीलों को बुनियादी सुविधाएं देने में कोई बहाना नहीं चलेगा। दरअसल, देश की कई अदालतों में महिला वकीलों को आज भी जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। उन्हें टॉयलेट और बैठने की जगह जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। महिला वकील रोज अदालतों में अपने मुवक्किलों का पक्ष रखती हैं। वे लोगों को न्याय दिलाने के लिए घंटों काम करती हैं। इसके बावजूद उनके लिए जरूरी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या पर सख्त रुख अपनाया है।



सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकीलों के लिए सुविधाओं की कमी पर जताई चिंता

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि कई राज्यों की अदालतों में महिला वकीलों के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं हैं। मामले में एमिकस ने कोर्ट के सामने 16-17 हलफनामों की जानकारी रखी है। इन हलफनामों से पता चला कि कई जगहों पर महिला वकीलों के लिए अलग टॉयलेट तक नहीं हैं। कुछ अदालतों में उपलब्ध सुविधाओं की हालत भी खराब है।



हरियाणा और पंजाब के आंकड़ों से भी यह समस्या सामने आई । हरियाणा में अभी तक इस मामले में निरीक्षण नहीं हुआ है। वहीं, पंजाब के 67 जिला अदालत परिसरों में से सिर्फ 9 में महिला वकीलों के लिए वॉशरूम हैं। इससे साफ है कि महिला वकीलों को जरूरी सुविधाएं देने के लिए अभी काफी काम करना बाकी है।



सुनवाई में कोलकाता की स्थिति का भी जिक्र हुआ। एडवोकेट मनिका ने बताया कि कोलकाता जैसे बड़े शहर की अदालतों में भी महिला वकीलों के लिए टॉयलेट की सुविधा नहीं है। ऐसी स्थिति में महिला वकीलों को रोजाना काम करने में परेशानी होती है।



सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये जरूरी निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकीलों की सुविधाओं को लेकर अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट चाहता है कि देशभर की अदालतों में महिला वकीलों को जरूरी सुविधाएं मिलें। इसके लिए कोर्ट ने राज्यों और हाई कोर्ट को कई जिम्मेदारियां सौंपी हैं।



1. महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम और टॉयलेट बनेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिला अदालतों, सब-डिविजनल कोर्ट और तालुका अदालतों में महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम बनाए जाएं। उनके लिए अलग टॉयलेट की व्यवस्था भी जरूरी होगी।



यह सुविधा उन सभी अदालतों में देनी होगी, जहां महिला वकील प्रैक्टिस करती हैं। इससे उन्हें अदालत परिसर में काम करने के दौरान होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी।



2. राज्यों को देना होगा बजट, जरूरत पर जमीन भी

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को जरूरी फंड देने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर इसके लिए जमीन भी उपलब्ध करानी होगी।



कोर्ट का साफ कहना है कि इन सुविधाओं की व्यवस्था में पैसों या जगह की कमी बाधा नहीं बननी चाहिए। राज्यों को इसके लिए जरूरी कदम उठाने होंगे।



3. हाई कोर्ट की बिल्डिंग कमेटियां काम को प्राथमिकता देंगी

सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट की बिल्डिंग कमेटियों को इस काम को प्राथमिकता देने को कहा है। इन कमेटियों को महिला वकीलों के लिए बार रूम और टॉयलेट बनवाने पर ध्यान देना होगा।



इसके अलावा, निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी भी देनी होगी। इसके लिए अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया के कार्यालय में प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा करनी होगी। इससे पता चलेगा कि कोर्ट के निर्देशों पर कितना काम हुआ है।



4. देशभर में सुविधाओं का डिजाइन एक जैसा होगा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि महिला वकीलों के लिए बनने वाली सुविधाओं का डिजाइन और पैटर्न देशभर में एक जैसा होना चाहिए।



इससे अलग-अलग राज्यों की अदालतों में सुविधाओं को लेकर एक समान व्यवस्था बनाई जा सकेगी। महिला वकीलों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सभी जगह एक ही तरह का पैटर्न अपनाया जाएगा।



5. अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी। इस दौरान राज्यों को अदालत को बताना होगा कि निर्देशों का पालन करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।



इसके लिए सभी राज्यों को अनुपालन रिपोर्ट यानी Compliance Report पेश करनी होगी। इस रिपोर्ट के जरिए कोर्ट निर्देशों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा करेगा।



महिला वकीलों को मिलेंगी जरूरी सुविधाएं

सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि अदालतों में काम करने वाली महिला वकीलों को जरूरी सुविधाएं मिलें। इसके लिए महिला वकीलों के अलग बार रूम और टॉयलेट बनाए जाएंगे। इससे उन्हें अदालत में काम करने के दौरान बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।



अदालतों में बुनियादी सुविधाएं होना बहुत जरूरी है। महिला वकीलों को भी सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल मिलना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और हाई कोर्ट्स को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।



अब सभी राज्यों को अदालत में बताना होगा कि इन निर्देशों पर कितना काम हुआ है। अगली सुनवाई में सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रगति की जानकारी सामने आएगी।



FAQ

  1. सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकीलों के लिए क्या निर्देश दिए हैं?
    सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम और टॉयलेट बनाने के निर्देश दिए हैं। यह व्यवस्था सभी अदालतों में लागू की जाएगी जहाँ महिला वकील प्रैक्टिस करती हैं।
  2. महिला वकीलों के लिए कौन सी अदालतों में सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी?
    महिला वकीलों के लिए जिला अदालतों, सब-डिविजनल कोर्ट और तालुका अदालतों में सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
  3. इन सुविधाओं का इंतजाम करने की जिम्मेदारी किसकी है?
    इन सुविधाओं का इंतजाम करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और हाई कोर्ट्स की है। उन्हें इसके लिए आवश्यक फंड और जमीन उपलब्ध करानी होगी।
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