बोको हराम जैसे कई आतंकी संगठन AI से बना रहे बम, चौंकाने वाली स्टडी आई

Pawan Modiya | Jul 12, 2026, 21:31 IST
आतंकी संगठनों का एआई इस्तेमाल
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की नई स्टडी में खुलासा हुआ कि बोको हराम जैसे आतंकी संगठन हमलों की प्लानिंग में चैटजीपीटी, क्लॉड और जेमिनी जैसे एआई टूल्स इस्तेमाल कर रहे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • एक नई स्टडी में आतंकी संगठनों के एआई इस्तेमाल का खुलासा हुआ है।
  • बोको हराम जैसे संगठन हमलों की प्लानिंग में एआई टूल्स इस्तेमाल कर रहे हैं।
  • स्टडी में चैटजीपीटी, क्लॉड और जेमिनी जैसे टूल्स का जिक्र है।
  • आईएसआईएस ने कमांडरों को एआई सेफ्टी फिल्टर बायपास करने की ट्रेनिंग दी।
  • रिसर्चर्स ने इसे लेकर बड़ी चिंता जाहिर की है।

कैंब्रिज की नई स्टडी सामने आई

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की एक रिसर्चर एंटोनिया जूलिष ने यह स्टडी की है। यह स्टडी कैंब्रिज प्रोग्राम ऑन एआई साइंस एंड पॉलिसी ने प्रकाशित की है। रिसर्च के लिए बोको हराम के 27 पूर्व सदस्यों से बातचीत की गई। यह बातचीत नाइजीरिया के उत्तर पूर्वी इलाके में आमने सामने हुई। कुल मिलाकर 57 इंटरव्यू किए गए। इसमें कुछ पूर्व कमांडर भी शामिल थे।



दोनों गुट कर रहे इस्तेमाल

स्टडी के मुताबिक बोको हराम के दोनों गुट एआई इस्तेमाल कर रहे हैं। यह इस्तेमाल पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तेज और व्यवस्थित पाया गया। पहले माना जाता था कि आतंकी संगठन एआई सिर्फ प्रोपेगंडा में इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इस स्टडी ने यह धारणा पूरी तरह बदल दी है। शोधकर्ताओं ने पाया कि एआई का इस्तेमाल कई मोर्चों पर हो रहा है।



किन कामों में हो रहा उपयोग

पूर्व सदस्यों के मुताबिक एआई हथियारों से जुड़ी मदद में इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा यह हमलों की योजना बनाने में भी काम आ रहा है।स्टडी में ऑपरेशनल सिक्योरिटी और हमलों की समीक्षा का भी जिक्र है। पूर्व सदस्यों ने बताया, जब्त हथियारों की पहचान में एआई मदद करता है। हालांकि स्टडी यह दावा नहीं करती कि एआई के बिना हमले नामुमकिन थे।



कौन-कौन से टूल्स इस्तेमाल हुए

पूर्व सदस्यों ने कई बड़े एआई टूल्स के नाम गिनाए। इनमें चैटजीपीटी, क्लॉड, जेमिनी, ग्रोक, मेटा एआई और डीपसीक शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक संगठन किसी एक टूल पर निर्भर नहीं रहा। जरूरत के हिसाब से अलग अलग टूल्स का इस्तेमाल किया गया। विशेषज्ञों ने इसे टूल्स की अदला बदली वाली रणनीति बताया है।



विदेशी ट्रेनिंग का हुआ खुलासा

स्टडी के मुताबिक विदेशी आतंकी संगठनों के लोग भी बोको हराम कैंप पहुंचे। उन्होंने चुनिंदा कमांडरों को एआई इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी। यह ट्रेनिंग साल 2023 से 2025 के बीच हुई बताई जा रही है। एक सेशन में करीब 30 से 50 कमांडर और लड़ाके मौजूद थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आईएसआईएस ने बायपास तरीके भी सिखाए। यह ट्रेनिंग सेफ्टी फिल्टर को दरकिनार करने के लिए दी गई थी।



कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती

यह स्टडी एआई कंपनियों के लिए भी एक चेतावनी की तरह है। रिसर्चर्स लंबे समय से आगाह करते रहे हैं। उनके मुताबिक एआई मॉडल खतरनाक जानकारी को आसान बना सकते हैं। स्टडी में पाया गया कि मौजूदा सेफ्टी फिल्टर हमेशा कारगर नहीं रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि जेलब्रेक जैसी तकनीकों को पूरी तरह रोकना मुश्किल है। एआई कंपनियां भी मानती हैं कि यह चुनौती आसानी से खत्म नहीं होगी।



विशेषज्ञों की राय क्या है

जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के आतंकवाद विशेषज्ञ डैनियल बायमैन ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की। उनके मुताबिक आतंकी संगठन अलग अलग एआई सिस्टम को मिलाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि मकसद कंपनियों की तकनीकी रोकथाम से बचना है। एक अन्य विशेषज्ञ ट्रिशिया बेकन ने आईएसआईएस-के गुट का हवाला दिया। उनके मुताबिक यह गुट समर्थकों को एआई इस्तेमाल की सलाह देता रहा है। मकसद जांच एजेंसियों से बचना बताया गया है।



आगे की बड़ी चिंता

स्टडी में यह भी लिखा है। कुछ सदस्यों ने बड़े हथियारों पर भी विचार किया था। शोधकर्ता ने इसे लेकर खास तौर पर आगाह किया है। उनके मुताबिक भले ही अभी तक इस्तेमाल परंपरागत तरीकों तक सीमित रहा हो। लेकिन आगे रासायनिक और जैविक हथियारों का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से इसे गंभीरता से लेने की सलाह दी गई है।



भारत के लिए भी सबक

भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद की चुनौती झेलता रहा है। ऐसे में यह स्टडी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी अहम है। विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकी संगठन तकनीक को तेजी से अपनाते हैं। भारत को भी अपनी साइबर और डिजिटल निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी होगी। एआई कंपनियों के साथ मिलकर सुरक्षा नीतियां बनाना जरूरी माना जा रहा है।



इस रिपोर्ट के बाद एआई कंपनियों पर सवाल और तेज हो गए हैं। कंपनियां लगातार दावा करती रही हैं कि उनके सेफ्टी फिल्टर मजबूत हैं।लेकिन स्टडी बताती है कि हकीकत में यह फिल्टर पूरी तरह कारगर नहीं रहे। विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ स्वैच्छिक नियमन से यह समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए सरकारों को भी सख्त नीति बनानी होगी।



जरूरी FAQ

कैंब्रिज स्टडी में आतंकी संगठनों के एआई इस्तेमाल को लेकर क्या पाया गया?


कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्चर एंटोनिया जूलिष की स्टडी में पाया गया कि बोको हराम के दोनों गुट हथियारों से जुड़ी मदद, हमलों की योजना और ऑपरेशनल सिक्योरिटी में एआई टूल्स इस्तेमाल कर रहे हैं। यह स्टडी 27 पूर्व सदस्यों के 57 इंटरव्यू पर आधारित है।



आतंकी संगठन कौन से एआई टूल्स इस्तेमाल कर रहे हैं?


स्टडी के मुताबिक पूर्व सदस्यों ने चैट जीपीटी, क्लॉड, जेमिनी, ग्रोक, मेटा एआई और डीपसीक जैसे टूल्स के नाम गिनाए। संगठन किसी एक टूल पर निर्भर नहीं रहा, बल्कि जरूरत के हिसाब से अलग अलग टूल्स का इस्तेमाल करता रहा।



क्या आईएसआईएस ने भी इसमें कोई भूमिका निभाई?


स्टडी के मुताबिक आईएसआईएस से जुड़े लोगों ने बोको हराम कमांडरों को एआई इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी। यह ट्रेनिंग 2023 से 2025 के बीच हुई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सेफ्टी फिल्टर बायपास करने के तरीके भी सिखाए गए।



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