स्लीपर सेल बनाने आया था, कश्मीर देखकर बदल गया आतंकी का प्लान

Sandeep Kumar | May 17, 2026, 20:11 IST
terrorist sleeper cell
भारत में घुसपैठ कर स्लीपर सेल बनाने आया लश्कर का आतंकी अपना सपना पूरा करने में लग गया। उसने श्रीनगर के क्लीनिक में गुपचुप हेयर ट्रांसप्लांट कराया। वह लंबे समय से अपने गंजेपन से परेशान था।

News in Short

  • मोहम्मद उस्मान जट्ट भारत में स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने आया।
  • श्रीनगर में हेयर ट्रांसप्लांट कर नई पहचान बनाने की कोशिश की।
  • पंजाब में अंग्रेजी सीखकर भागने की तैयारी की।
  • फर्जी आधार-पैन और पासपोर्ट बनाने की योजना थी।
  • NIA ने जट्ट और अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर पूरी साजिश उजागर की।

News in Detail

भारत में लश्कर-ए-तैयबा का पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद उस्मान जट्ट पकड़ा गया। उसने स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने का मिशन छोड़ दिया। NIA ने गिरफ्तारी और पूछताछ कर पूरी कहानी उजागर की।



स्लीपर सेल मिशन का उद्देश्य

मोहम्मद उस्मान जट्ट उर्फ ‘चाइनीज’ भारत में स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने आया था। उसे जम्मू-कश्मीर के बाहर आतंकियों का नेटवर्क विकसित करने का काम सौंपा गया था। पाकिस्तान में लश्कर ट्रेनिंग कैंप में उसे जो बताया गया था, कश्मीर की असल जिंदगी उससे अलग निकली।



श्रीनगर में हेयर ट्रांसप्लांट

जट्ट ने श्रीनगर में हेयर ट्रांसप्लांट करवाई। स्थानीय दुकानदार की मदद से वह क्लिनिक पहुंचा। कई सेशन में उपचार हुआ। गंभीर हेयर लॉस की समस्या के कारण उसने यह कदम उठाया। इस दौरान कई बार रातभर क्लिनिक में रुकना पड़ा।



पंजाब में अंग्रेजी सीखने की कोशिश

हेयर ट्रांसप्लांट के बाद जट्ट पैसेंजर गाड़ी से जम्मू गया और फिर स्लीपर बस से पंजाब के मालेरकोटला पहुंचा। वहां उसने टीवी शो देख कर अंग्रेजी सीखने का प्रयास किया। यह कदम भारत से भागने और नए पहचान बनाने की तैयारी का हिस्सा था।



फर्जी दस्तावेज बनाने की योजना

जट्ट ने असली आधार-पैन (Aadhaar-PAN) और बाद में पासपोर्ट बनवाने की योजना बनाई। वह भारत से भागकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छिपना चाहता था। उसकी योजना उमर उर्फ ‘खरगोश’ की तरह थी, जो पहले जयपुर से फर्जी पासपोर्ट बनवाकर इंडोनेशिया भाग चुका था।



NIA की जांच और गिरफ्तारियां

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जट्ट और अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि जट्ट लाहौर का रहने वाला है और लश्कर का प्रशिक्षित ऑपरेटिव है। वह उत्तर और मध्य कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा।



पिछले मॉड्यूल और आतंक नेटवर्क

जट्ट का मॉड्यूल नवंबर 2025 में अल-फलाह मॉड्यूल के भंडाफोड़ के छह महीने बाद सामने आया। इसमें डॉक्टरों और पढ़े-लिखे कट्टरपंथियों का नेटवर्क भी था। अल-फलाह यूनिवर्सिटी के डॉ. उमर-उन-नबी भी इसमें शामिल थे, जिन्होंने लाल किले पर विस्फोटकों से भरी कार चलाई थी।



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